जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। विधानसभा से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार और चुनाव आयोग पर लगातार हमलावर है। वहीं अब चुनाव आयोग ने खुद सामने आकर स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुरूप और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए की जा रही है।
चुनाव आयोग का तीखा सवाल – क्या फर्जी मतदाताओं को भी वोट देना चाहिए?
चुनाव आयोग ने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि “क्या चुनाव आयोग को मृत, फर्जी या स्थायी रूप से पलायन कर चुके मतदाताओं को भी वोट देने देना चाहिए? क्या लोकतंत्र को मजबूत करने वाली इस प्रक्रिया पर सिर्फ राजनीतिक दबाव के चलते विराम लगा देना चाहिए?” आयोग ने यह भी कहा कि भारत का संविधान लोकतंत्र की मां है, और एक निष्पक्ष मतदाता सूची ही मजबूत लोकतंत्र और विश्वसनीय चुनाव प्रणाली का आधार है।
पुनरीक्षण से कट सकते हैं 56 लाख नाम
सूत्रों के मुताबिक, इस विशेष अभियान के तहत अब तक यह संभावना जताई गई है कि करीब 56 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं:
20 लाख मृत मतदाता
28 लाख स्थायी पलायन कर चुके
1 लाख मतदाता – कोई सूचना नहीं
7 लाख – दोहरे पंजीकरण वाले मतदाता
15 लाख मतदाता फॉर्म अभी तक नहीं लौटे
इस अभियान के तहत चुनाव आयोग ने 7.7 करोड़ मतदाता फॉर्म प्राप्त कर लिए हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 90.89% है। इनका डिजिटलीकरण भी किया जा चुका है। हालांकि अब भी 15 लाख मतदाताओं के गणना फॉर्म लंबित हैं, जिन्हें लेकर आयोग राजनीतिक दलों की मदद से काम कर रहा है।
आयोग ने कहा – यह समय गंभीरता से विचार करने का
चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि इस विषय पर अब राजनीतिक वैचारिकता से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है। आयोग का कहना है कि एक पारदर्शी और निष्पक्ष मतदाता सूची ही आने वाले समय में भारत के लोकतंत्र की मजबूती की नींव होगी।

