- पांच साल से परेशान किसानों को बाजार से मिली आक्सीजन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तीन साल से लगातार मंदी की मार झेल रहे किसानों के लिए ये समय अनुकूल है। इस बार शुरूआत में ही आलू के दामों ने मई की गर्मी की तरह किसानों की जेब को भी गर्म किया है। तीन साल से मंदी की मार झेल रहे तराई के आलू उत्पादक किसानों के लिए यह सीजन राहत भरा है।
शुरू में ही आलू के दाम अच्छे होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। वहीं मांग बढ़ने से किसानों को आलू के अच्छे दाम मिल रहे हैं। इस बार आलू किसान पुराना घाटा पूरा होने से काफी खुश हैं। पिछले पांच साल से मुरझाए आलू किसानों के चेहरे इस बार खिलने की उम्मीद है। आलू के दाम आसमान छू रहे है।
जिस कारण किसानों को बाजार से आक्सीजन मिल गई है। कोरोना महामारी के कारण किसानों ने सोचा नहीं था कि इस बार आलू के दाम इतने हो बढ़ जाएंगे।
गन्ने के बाद वेस्ट यूपी में आलू की खेती किसान बड़े स्तर पर करते है। ये खेती ऐसी है कि जब दाम अच्छे हो जाएं तो किसानों को काफी लाभ मिलता है और जब दाम गिर जाते है तो किसान भी औंधे मुंह गिर जाते है। पिछले कुछ साल से वेस्ट यूपी के किसानों को आलू की लागत भी नहीं मिल पा रही थी।
किसान इसी उम्मीद में आलू की खेती करता है कि इस बार अच्छे दाम हो जाएंगे, लेकिन लगातार गिरते दामों से किसान परेशान थे। आर्थिक रूप से भी किसान टूट रहे थे। किसानों को अच्छा दाम न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही थी। इस बार शुरूआत से आलू के दाम अच्छे थे।
जिस कारण लग रहा था कि आलू महंगा होगा, लेकिन बीच में लॉकडाउन और कोरोना के चलते आलू में भी उतार चढ़ाव आया, लेकिन लॉकडाउन के हटते ही दाम बढ़ते चले गए और लगातार अभी तक आलू के दामों में उछाल आया हुआ है। चार साल पहले जो आलू के दाम 300 रुपये से 400 रुपये तक थे, वह अब दाम 1200 रुपये से 1300 रुपये तक है। लगातार दामों में उछाल आने से किसानों को बाजार से आॅक्सीजन मिली है।
यहां होती है आलू की खेती
वेस्ट यूपी के इन जिलों में मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बागपत, बिजनौर, हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, फिरोजाबाद, संभल, बरेली, एटा, इटावा, फतेहपुर सिकरी, बदायूं, रामपुर, सीतापुर, कौशांबी, कासगंज आदि में ज्यादा आलू की खेती होती है।
इस बार बीज बिका महंगा
बाजार में इस समय जो आलू के दाम चल रहे हैं, उसे देखते हुए इस बार बीज के दाम भी अधिक रहे। प्राइवेट कंपनी भी बीज पर काम कर रही है और बीज के दाम चार हजार तक रहा। आलू वाले सीजन के लिए किसानों ने अभी से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
31 तक चलेंगे शीतगृह
आलू के बढ़ते दामों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने इस बार शीतगृह 31 अक्टूबर तक चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। आदेशों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इससे आलू की जमाखोरी पर लगाम लगेगी, साथ ही आलू के बढ़ते दामों को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
ये हैं आलू के दाम
वर्ष आलू दाम
2015 300 400
2016 250 350
2017 300 100
2018 600 700
2019 750 850
2020 1200 1300
चिप सोना प्रजाति
2015—400
2016—200
2017—100
2018—250
2019—900
2020—1300
- नोट: दाम प्रति 50 किलो में दिए गए है।
वेस्ट यूपी में आलू का क्षेत्रफल और उत्पादन
जनपद———क्षेत्रफल———उत्पादन
मेरठ———–6700———162330
बागपत———600———-14400
बुलदंशहर——8200———221400
गाजियाबाद—–2500———59000
हापुड़———3800———-97600
गौतमबुद्धनगर—-400———10260
- (नोट: क्षेत्रफल हक्टेयर व उत्पादन मेट्रिक टन में है, आंकड़े जिला उद्यान विभाग से लिए गए है)
पिछले साल उठाया नुकसान
पिछले कई साल से आलू की खेती में नुकसान उठाना पड़ रहा था। लागत बढ़ती जा रही थी और आमदनी घट रही थी। इस बार कोरोना के दौरान भी चिंता बढ़ गई थी, ऐसा लग रहा था कि जैसा नोटबंदी के दौरान आलू को फ्री छोड़ना पड़ा था, कहीं इस बार भी ऐसा ही न हो जाए, लेकिन इस बार आलू के दाम अब तक 1300 के पास पहुंच गए है, काफी लंबे समय बाद अच्छे दाम मिले हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। -रत्न सिंह, आलू उत्पादक
कई साल बाद बढ़े दाम
आलू के दाम पिछले कई साल बाद बढ़े हैं। किसानों को संजीवनी मिली है। आलू हर घर की जरूरत है। वहीं, खेती में किसानों के लिए आलू की खेती रीढ़ साबित होती है। बीज महंगा बिकने से आलू के दाम भी बढ़ने की संभावना है, परंतु सरकार का फैसला आलू किसानों को नुकसान दे सकता है। जिसका खामियाजा आम जनता के साथ-साथ किसानों को भी भुगतना पड़ सकता है।-मनोज सैनी, आलू उत्पादक
अच्छी प्रजाति से होगा उत्पादन
पिछले सालों की तुलना में आलू के दाम इस बार बहुत अच्छे हैं। आलू की खेती करने वाले किसान परेशान थे, उन्हे लागत भी नहीं मिल रही थी, लेकिन इस बार के दाम ने किसानों को काफी लाभ दिया है। किसान अच्छी प्रजाति लगाएंगे तो उनका उत्पादन भी अच्छा होगा और दाम भी अच्छे होंगे। सीपीआरआई भी किसानों के हित में काम कर रही है और समय-समय पर किसानों को आलू की खेती के लिए जागरूक भी किया जाता है। -डा. मनोज कुमार, संयुक्त निदेशक केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम




