- प्रकाशवीर शास्त्री ने धारा 370 हटाने के लिए कई बार किए प्रयास
- पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रकाशवीर को बताया था अपने से बेहतर वक्ता
- अलग-अलग लोकसभा में तीन बार निर्दलीय चुने गए सांसद
बृजवीर चौधरी |
बिजनौर: नाम प्रकाशवीर शास्त्री (त्यागी)। एक ऐसा नाम जनपद बिजनौर लोकसभा में निर्दलीय सांसद बने। प्रखर वक्ता और वाणी के जादूगर का भाषण सुनने के लिए चंद समय में ही हजारों की संख्या में लोग एकत्र हो जाते थे। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने भी प्रकाशवीर शास्त्री को अपने से बेहतर वक्ता बताया था। प्रकाशवीर शास्त्री तीन बार अलग-अलग लोकसभा से निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत दर्ज कराई। इनके बाद अभी तक जनपद में कोई निर्दलीय सांसद नहीं चुना गया।
सूबे के जनपद अमरोहा गांव रेहरा निवासी प्रकाशवीर शास्त्री का जन्म 30 दिसंबर 1977 को हुआ था। पिता का नाम दिलीप त्यागी था। शिक्षा गुरुकुल ज्वालापुर हरिद्वार में हुई। गुरुकुल के बाद प्रकाशवीर ने आगरा विवि से एमए की परीक्षा पास की। इसके बाद शास्त्री की उपाधि बनारस विवि से ली। प्रकाशवीर शास्त्री ने 1950 से लेकर 1960 तक कई ज्वलंत मुद््दों पर जोरशोर से अपने विचार रखे। इसी दौरान आर्य समाज की ओर से संचालित आंदोलनों में अपने भाषणों से जान फूंकी।
प्रकाशवीर शास्त्री ने बिजनौर लोकसभा से 1962 में निर्दलीय चुनाव लड़ा। यहां से जीत दर्ज की। इससे पहले प्रकाशवीर शास्त्री 1957 में गुडगांव लोकसभा से चुनाव जीता और बिजनौर के बाद 1967 मेें हापुड़ गाजियाबाद लोकसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ा था और रिपब्लिकन पार्टी के बीपी मौर्य को 48 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। जबकि बिजनौर लोकसभा में प्रकाशवीर शास्त्री को एक लाख 22 हजार 777 मत मिले और कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल लतीफ 76 हजार 584 मत मिले थे। प्रकाशवीर 46 हजार से अधिक मतों से कांग्रेस प्रत्याशी को पराजित कर दिया था। जनपद बिजनौर में पहली बार कांग्रेस का तिलिस्म प्रकाशवीर शास्त्री ने तोड़ा था। प्रकाशवीर शास्त्री इसके बाद वर्ष 1974 में राज्यसभा के सदस्य बने।
प्रकाशवीर शास्त्री के विचार सुनने के लिए लोग दूर दूर से आते थे। चंद समय मेें ही प्रकाशवीर की रैली में हजारों की भीड़ जुट जाती थी। बिजनौर के राजनीतिकार बताते है कि उन्हे हर वर्ग जाति का वोट मिलता था। एडवोकेट प्रवीण देशवाल की माने तो प्रकाशवीर शास्त्री ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव दिया था, लेकिन पूर्व पीएम इंदिरा गांधी से इसे अस्वीकार कर दिया था।
प्रकाशवीर शास्त्री अपनी बात को बेबाकी से बोलते थे। प्रकाशवीर शास्त्री ने मेरठ, कानपुर और वाराणसी में आर्य समाज के कई सफल सम्मेलन कराए और आर्य समाज की स्थापना की। प्रकाशवीर का 23 नवंबर 1977 को जयपुर से दिल्ली की ओर आते समय एक रेल हादसे में निधन हो गया।

