- निलंबन के बाद अध्यापिका ने पूरी तरह नहीं छोड़ा विद्यालय इंचार्ज का पद
- भुगतान न होने पर प्रधान ने बीएसए से की शिकायत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: उच्च प्राथमिक विद्यालय गगोल में शिक्षिका की मनमानी के कारण छात्रों को मिलने वाले मिड-डे-मील पर संकट पैदा हो गया है। प्रधान के अनुसार पिछले काफी समय से उनके द्वारा दिये जाने वाले मिड-डे-मील का भुगतान नहीं हो सका है। विद्यालय की इंचार्ज शिक्षिका का तीन महिनें पहले निलंबन हो चुका है, लेकिन उन्होंने अभी तक भी नई इंचार्ज को विद्यालय का पूरा चार्ज नहीं सौंपा। इसी वजह से मिड-डे-मील का भुगतान नहीं हो रहा है। अब बच्चों को मिलने वाला मिड-डे-मील कभी भी बंद हो सकता है।
उच्च प्राथमिक विद्यालय की पूर्व इंचार्ज चंचल वर्मा को तीन महीने पहले विद्यालय से निलंबित कर दिया गया था। उनकी जगह दूसरी शिक्षिका को इंचार्ज बनाया गया, लेकिन चंचल वर्मा ने आज तक भी विद्यालय की इंचार्ज पद को पूरी तरह नहीं छोड़ा है। इस कारण विद्यालय को मिलने वाली ग्रांट का पैसे का लाभ विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को नहीं मिल रहा है। यहां तक की छात्रों को मिलने वाले मिड-डे-मील का पैसा भी ग्राम प्रधान को नहीं मिला है।
बीएसए योगेंद्र कुमार से इस मामले को लेकर जानकारी करने की कोशिश की गई तोे हमेशा की तरह उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। कुल मिलाकर सरकारी विद्यालयोंं मे फैला भ्रष्ठाचार अपने चरम पर है, जिसमें सुधार होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। अधिकतर विद्यालयों में शिक्षा का स्तर तो खराब है ही, यहां मिलने वाली सरकारी योजनाओं से भी छात्रों को वंचित रखा जा रहा है।
शिक्षिका हो चुकी है कई बार निलंबित
गगोल ग्राम पंचायत सदस्य शिवकुमार का आरोप है कि शिक्षिका चंचल वर्मा पहले भी कई बार निलंबित हो चुकी है, लेकिन हर बार बीएसए कार्यालय के एक वरिष्ठ लिपिक की मेहरबानी से इसी विद्यालय में नियुक्ति पा लेती है। इस बार भी निलंबन होने के बावजूद चंचल वर्मा ने विद्यालय का पूरा चार्ज इंचार्ज बनाई गई दूसरी शिक्षिका को नहीं सौंपा है। यही वजह है कि विद्यालय में तैयार होने वाले मिड-डे-मील की गुणवत्ता बेहद खराब है, क्योंकि इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई जिम्मेदारा व्यक्ति विद्यालय में नहीं है।

