- रैली के जरिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चलायेंगे कई सियासी तीर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्रांतिधरा से पांच लोकसभा क्षेत्रों की जनता को साधेंगे। पांच लोकसभा जाट बेल्ट में हैं। इसलिए भी ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी की ये रैली अहम हैं। इस रैली के जरिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई सियासी तीर चलायेंगे, जिससे विपक्ष की रणनीति को ध्वस्त करेंगे। क्रांतिधरा की रैली का पूरे देश में मैसेज जाएगा। पहले भी नरेन्द्र मोदी ने ऐसा ही किया हैं। यही से चुनावी माहौल बनता है तो पूरे देश में माहौल बना रहता हैं। इसीलिए क्रांतिधरा को ही चुनावी शंखनाद करने के लिए रैली स्थल चुना हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जयंत चौधरी विशेष रणनीति के तहत विपक्ष को यहां अपने निशाने पर लेंगे।
दरअसल, रालोद को कई बार भाजपा का साथ रास आ चुका है। 2009 के लोकसभा चुनाव में चौधरी जयंत सिंह भाजपा गठबंधन में थे, तब मथुरा से सांसद निर्वाचित हुए। तब रालोद को भाजपा ने सात लोकसभा सीटें दी थी। इनमें मुजफ्फरनगर और नगीना को छोड़कर रालोद ने बागपत, हाथरस, मथुरा, अमरोहा और बिजनौर लोकसभा सीट पर जीत हासिल की। 2024 के चुनाव में बागपत और बिजनौर दो सीटें लोकसभा की दी हैं। भाजपा-रालोद ने तीन लाख की भीड़ का लक्ष्य रैली में रखा हैं। भीड़ तो रैली में जुटेगी। 18 सौ बसें भाजपा-रालोद ने लगाई हैं, जिसमें 750 बसों को भरकर लाने की जिम्मेदारी रालोद को दी गई हैं। हालांकि ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार होकर किसान पहुंचेंगे।
भाजपा जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा ने बताया कि रैली में 18 सौ बसों, छह सौ कारों और ट्रैक्टर के जरिए तीन लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। पांच किलोमीटर के दायरे में गांव-कालोनी में जाकर रैली में आने का आह्वान किया जा रहा है। भीड़ जुटाकर भी पांच लोकसभा क्षेत्र की जनता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी साधेंगे। पांचों लोकसभा क्षेत्र जाट बाहुल्य हैं, जो भाजपा के लिए अहम मानी जाती हैं। इनमें कैराना और मुजफ्फरनगर, बागपत सीट ही 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा जीत पाई थी।

जाट बेल्ट में रालोद का प्रभावी असर हैं। जाटों को लुभाने के लिए पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न केन्द्र सरकार दे चुकी हैं। इसी के जरिये भी जाट बेल्ट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों को साधने के हर संभव प्रयास करेंगे, फिर मंच पर रालोद सुप्रीमो जयंत भी होंगे। जयंत पन्द्रह साल बाद भाजपा के मंच पर नजर आने वाले हैं। पश्चिमी यूपी की राजनीति की तस्वीर ही बदली-बदली नजर आने वाली हैं। प्रधानमंत्री किसानों को साधकर कई निशाने विपक्ष में साधने वाले हैं, पीएम का ये मैसेज पूरे भारत में जाएगा।
…जब समर्पित होकर पार्टी के लिए काम किया करते थे कार्यकर्ता
मेरठ: चार दशक से अधिक का समय राजनीति को दे चुके वरिष्ठ रालोद नेता मुकेश जैन का कहना है कि उन्होंने राजनीति में कई उतार चढ़ाव देखे हैं। चौधरी चरण सिंह परिवार से जुड़े मुकेश जैन रालोद में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वे चौधरी चरण सिंह से लेकर चौधरी अजित सिंह और जयंत चौधरी तक तीन पीढ़ियों के चुनाव में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। इस दौरान मेरठ, बागपत मुजफ्फरनगर जनपद की चुनाव लड़ने-लड़ाने की प्रक्रिया को बहुत नजदीक से देखा है।
उन्होंने ऐसा दौर भी देखा है जब किसी रैली को करने के लिए कार्यकर्ता स्वेच्छा से चंदा इकट्ठा करते थे और बसों को अपने-अपने क्षेत्र में मनाने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते थे। ऐसे भी अवसर आए हैं जब निर्धारित किए गए लक्ष्य से अधिक डिमांड कार्यकर्ता बसों की किया करते थे। एक बार तो डिमांड अधिक होने के कारण मेरठ क्षेत्र में बसों की कमी हो गई। ऐसे में व्यवस्था देख रहे मुकेश जैन को 400 बसे दिल्ली से भी मांगनी पड़ी थी। मुकेश जैन का कहना है कि राजनीतिक रूप से काफी बदलाव देखने को मिले हैं।
पहले वर्कर समर्पित भाव से कार्य करता था। इसका एक कारण यह था कि पार्टी कार्यकर्ताओं के पास में समय का अभाव नहीं था। सामूहिक परिवार होने के नाते पारिवारिक तौर से इतनी जिम्मेदारी भी नहीं होती थी। अपने जॉब या नौकरी के सिलसिले में उन्हें इतनी भागदौड़ नहीं करनी होती थी। खेतीबाड़ी से काम चल जाया करता था, लेकिन आज एकल परिवार होने के कारण कार्यकर्ताओं के पास समय का अभाव साफ-साफ नजर आता है। घर परिवार के लालन पालन के लिए बढ़े हुए खर्चों की पूर्ति के लिए आदमी बेहद व्यस्त होकर रह गया है। इस बदली हुई परिस्थितियों से कार्यकर्ता भी अछूता नहीं है।
वोट मेरा अधिकार, मतदान करना मेरा कर्तव्य
मेरठ: बेरोजगार भर्ती ओर नियुक्ति के लिए भटक रहे है भर्तियां ओर नियुक्ति के लिए समय निर्धारित हो ताकि तय समय पर उसे पूरा किया जाए पर यह चुनाव में किसी भी दल के लिए मुद्दे नहीं है। आज छात्र ओर उनके अभिभावक महंगी शिक्षा से त्रस्त है। कम लागत में उच्च शिक्षा की सुविधाएं हो शोध ओर नवाचार के लिए सरकारी मदद मिले। राजनीतिक दलों को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। पेपर लीक की रोकथाम हो नकल माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई हो युवाओं के यह प्रमुख मुद्दे हैं।

