Saturday, April 11, 2026
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आज गोरखपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राघव दास मेडिकल कॉलेज का करेंगे लोकार्पण

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: गोरखपुर जिले के विकास के सफर में मंगलवार को एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 हजार करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट खाद कारखाना, एम्स और बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के रिजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) का मंगलवार को लोकार्पण करेंगे।

वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री ने ही खाद कारखाना और एम्स की नींव रखी थी। अब वे खुद अपने हाथों इसे जनता को समर्पित करेंगे। इस दौरान पीएम करीब सवा दो घंटे तक यहां रहेंगे।

खाद कारखाने के रूप में गोरखपुर को केंद्रित कर पूर्वांचल के किसानों और नौजवानों के हित में योगी आदित्यनाथ का सपना साकार हो गया है।

अपने संसदीय कार्यकाल में करीब दो दशक तक जिसके लिए वह संघर्षरत रहे, उसका परिणाम आज सामने है। गोरखपुर का खाद कारखाना मुख्यमंत्री योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है।

गोरखपुर में 1990 में बंद हुए फ़र्टिलाइजर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के खाद कारखाने को दोबारा चलवाने या उसकी जगह नया कारखाना स्थापित करने के लिए योगी आदित्यनाथ बतौर सांसद 19 साल तक संघर्षरत रहे।

साल 1998 से लेकर मार्च 2017 तक उनके संसदीय कार्यकाल में संसद का कोई भी सत्र ऐसा नहीं रहा जिसमें उन्होंने इसके लिए आवाज बुलंद न की हो।

योगी की पहल और पुरजोर मांग पर 22 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाद कारखाने की आधारशिला रखी थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने खाद कारखाना के निर्माण को भी गति दी जिसका परिणाम स्वरूप यह जनता को समर्पित होने जा रहा है।

 किसानों-नौजवानों को लाभ

नीम कोटेड यूरिया से किसानों को समय से खाद सुलभ होगी। वहीं, करीब बीस हजार लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रोजगार मिलने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।

खाद कारखाने से उत्तर प्रदेश और अन्य सीमावर्ती राज्यों को पर्याप्त खाद की उपलब्धता तो होगी ही आयात पर से निर्भरता भी कम होगी।

8603 करोड़ की लागत से बना कारखाना, रोजाना 3850 मीट्रिक टन उत्पादन

गोरखपुर खाद कारखाने के निर्माण पर 8603 करोड़ रुपये की लागत आई है। कारखाना परिसर में दक्षिण कोरिया की विशेष तकनीक से 30 करोड़ रुपये की लागत से विशेष रबर डैम बनाया गया है, जिस पर गोलियों का भी असर नहीं होता है।

कारखाने की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 3850 मीट्रिक टन और प्रतिवर्ष 12.7 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उत्पादन की है। खाद कारखाने की स्थापना व संचालन की जिम्मेदारी हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (एचयूआरएल) ने निभाई है।

एचयूआरएल एक संयुक्त उपक्रम है, जिसमें कोल इंडिया लिमिटेड, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल कार्पोरेशन प्रमोटर्स हैं, जबकि इसमें फर्टिलाइजर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कार्पोरेशन लिमिटेड भी साझीदार हैं।

कारखाने का प्रिलिंग टावर दुनिया में सबसे ऊंचा

गोरखपुर खाद कारखाने में बना प्रिलिंग टावर विश्व में सबसे ऊंचा है। इसकी ऊंचाई कुतुब मीनार की ऊंचाई से दोगुनी से अधिक है। प्रिलिंग टावर से खाद के दाने नीचे आएंगे तो इनकी गुणवत्ता सबसे अच्छी होगी।

एक खास बात यह भी है कि इस खाद कारखाना में 30 फीसदी से ज्यादा पूर्वांचल के युवाओं को नौकरी दी गई है। इनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है।

 योगी की मांग पर मोदी ने निभाया वादा

गोरखपुर में 1968 में स्थापित फर्टिलाइजर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया के खाद कारखाने को 1990 में हुए एक हादसे के बाद बंद कर दिया गया। एक बार यहां की मशीनें शांत हुईं तो तरक्की से जुड़ी उनकी आवाज को दोबारा सुनने की दिलचस्पी सरकारों ने नहीं दिखाई।

1998 में गोरखपुर से पहली बार सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने हर सत्र में खाद कारखाने को चलाने या नए प्लांट के लिए आवाज बुलंद की।

साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने सांसद योगी आदित्यनाथ की मांग पर संजीदगी दिखाई और 22 जुलाई 2016 को नए खाद कारखाने का शिलान्यास किया था।

चार मार्च 2021 को गोरखपुर खाद कारखाने का निरीक्षण करने आए तत्कालीन केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कहा था कि गोरखपुर में खाद कारखाने को स्थापित करने की पहल सांसद के रूप में योगी आदित्यनाथ ने की थी।

उन्होंने सीएम योगी की इस बात की भी सराहना की थी कि मुख्यमंत्री बनने के बाद पहले दिन से उन्होंने खाद कारखाने से जुड़ी हर मांग स्वीकार कर कार्य को आगे बढ़ाया।

एक साल से अधिक का समय वैश्विक महामारी कोरोना से प्रभावित रहने के बावजूद कार्य समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सका, तो इसका श्रेय राज्य की योगी सरकार को है।

अक्तूबर माह में वर्तमान केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने भी कारखाने की प्रगति जानने के दौरान मुख्यमंत्री योगी की सराहना की थी।

गोरखपुर खाद कारखाना : एक नजर में

  • शिलान्यास – 22 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों
  • संचालनकर्ता : हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड
  • कार्यदायी संस्था – टोयो जापान
  • कुल लागत –  8603 करोड़ रुपये
  • क्षेत्रफल  – 600 एकड़
  • यूरिया प्रकार – नीम कोटेड
  • प्रिलिंग टॉवर – 149.2 मीटर ऊंचा (विश्व में किसी भी खाद कारखाने में सबसे ऊंचा)
  • रबर डैम का बजट- 30 करोड़
  • रोजाना यूरिया उत्पादन – 3850 मीट्रिक टन
  • रोजाना लिक्विड अमोनिया उत्पादन -2200 मीट्रिक टन
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