- आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति का विरोध
जनवाणी संवाददाता |
शामली: भारत में आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी करने की अनुमति प्रदान किए जाने के सरकार के फैसले के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने जनपद में 12 घंटे तक हड़ताल रखकर विरोध जताया। सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही जारी रही।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन शामली के अध्यक्ष डा. अकबर खान ने बताया कि शुक्रवार को आईएमए के देशव्यापारी आहवान के बाद सभी डाक्टरों ने सुबह 6 से शाम 6 बजे तक 12 घंटे की हड़ताल रखकर सरकार के फैसले का विरोध किया।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी करने की जो अनुमति प्रदान की है, आईएमए उसका विरोध करती है। सरकार को पूरे देश के डाक्टरों के विरोध का संज्ञान लेना चाहिए। सरकार यह समझने की कोशिश करें कि दो अलग-अलग पद्धतियों को मिलाना गलत कार्य है।
आयुर्वेद हमारे देश की एक महान पद्धति है इसलिए सरकार को चाहिए कि उसको अलग से विकसित करें और आयुर्वेद के योग्य एवं प्रशिक्षित चिकित्सक देश को प्रदान करें। आयुर्वेद की दवाइयां और उनका तरीका अलग है और एलोपैथिक दवाइयां और उनका तरीका अलग है। दोनों को मिश्रित करना बिल्कुल भी ठीक कार्य नहीं है। इसलिए हम इस मिक्सो पैथी के खिलाफ है।
हड़ताल पर रहे डाक्टरों में आइएमए अध्यक्ष डा. अकबर खान, डा. अजय सैनी, डा. रणदेव तोमर, डा. आरपी सिंह, डा. वेदभानु मालिक, डा. विनय बोहरा, डा. कविता गर्ग, डा. मुकेश गर्ग, डा. उपहार गुप्ता, डा. सलीम जावेद, डा. सुनील मित्तल, डा. केपी देशवाल, डा. गौरव गोयल, डा. रुचि गोयल, डा. डीके सिंघल, डा. पंकज गर्ग, डा. अंकित गुप्ता, डा. शेखर गुप्ता इत्यादि शामिल रहे।
आयुर्वेद चिकित्सकों के प्रति भ्रम फैलाना बहुत गलतनेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) शामली के अध्यक्ष डा. राज तायल ने बताया कि सरकार के द्वारा सर्जरी से संबंधित लिए गए फैसले के समर्थन में अपने क्लीनिक दो घंटे अधिक समय तक खोलकर उपचार किया। आयुर्वेद में पांच वर्ष बीएमएस अर्थात बेचलर इन आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी की पढ़ाई करके तीन वर्ष की एमएस होने के बाद सर्जरी कराई जाती है। इसलिए आयुर्वेद सर्जन भी पूरा अध्ययन और अभ्यास करके ही सर्जरी करेंगे व करते आ रहे हैं। एक नोटिफिकेशन में इन 58 प्रकार की सर्जरी को लिस्टेड किया है। जो बनारस, नासिक, अमरावती आदि देश के अनेक आयुर्वेद संस्थानों में एनेस्थीसिया में एमडी किए हुए विशेषज्ञों की देखरेख में की जाती रही है। एनेस्थीसिया में पीजी डिप्लोमा भी चल रहा है। कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं कि छह महीने में सर्जन हो जाना गलत है। इस मौके पर अध्यक्ष डा. राज तायल, सचिव डा. विवेक तोमर, डा. सतीश गर्ग, डा. सुशीला शर्मा, डा. अरुण संगल, डा. भूपेंद्र सिंह, डा. जगमोहन सिंघल, डा. बनीता शर्मा, डा. नीलम शुक्ला, डा. रीतिनाथ शुक्ला, डा. कविता चौधरी, डा. सरोज तोमर, डा. स्वाति गुप्ता आदि मौजूद रहे। |

