Monday, March 23, 2026
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परेशानी: बिना ट्रेनिंग पोर्टल पर लिपिक कैसे कर रहे काम?

  • सरकारी विभागों में 75 प्रतिशत लिपिकों की भर्ती 2014 से पहले की है
  • विभागों को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए सरकार ने शुरू की है पोर्टल व्यवस्था

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सरकारी विभागों को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए राज्य सरकार आॅनलाइन पोर्टल पर कार्य करने की व्यवस्था चला रही है। सरकार की मंशा है इस व्यवस्था से विभागों में आसानी से कार्य होगा और समय पर भी पूरा हो सकेगा। इसके लिए विभागों में नियुक्त लिपिकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह पूरी परदर्शिता के साथ सभी कामों को अंजाम दे साथ ही इनकी निगरानी भी शासन स्तर पर रखी जाती है।

लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लिपिक भी विभागों में है जिन्हें कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है। साथ ही उनकी संख्या काम के हिसाब से काफी कम है। ऐसे में लिपिकों पर काम का दबाव काफी ज्यादा है साथ ही उन्हें आॅनलाइन पोर्टल के बारे में ट्रेनिंग भी नहीं दी जा रही है।

कंप्यूटर टाइपिंग 2014 से अनिवार्य

विभागों में जो लिपिक कार्य कर रहें है उनमें से 75 प्रतिशत की नियुक्ति 2014 से पहले की है। जबकि इसके बाद नए नियम के अनुसार कंप्यूटर टाइपिंग से लेकर अन्य तकनीकी जानकारी होना अनिवार्य है। ऐसे में जिन लिपिकों की नियुक्तियां 2014 से पहले की है उन्हें कंप्यूटर व टाइपिंग का ज्ञान नहीं है। जबकि वह जिस समय नियुक्त किए गए थे तब यह अनिवार्यता नहीं थी। अब इन लिपिकों पर आॅनलाइन काम करने का दबाव है जिसको लेकर यह तनाव में रहते है।

बीएसए, स्वास्थ्य व खेल विभाग में है कई लिपिक

केवल बेसिक शिक्षा विभाग के मुख्यालय में ही कुल 16 लिपिक है जिनपर विभाग का आॅनलाइन काम करने की जिम्मेदारी है। इनमें से बड़ी संख्या में लिपिकों को न तो कंप्यूटर की जानकारी है और न ही हिंदी टाइपिंग का ज्ञान है। जबकि विभाग का ज्यादातर काम आॅनलाइन होता है। ऐसे में इन लिपिकों को तकनीकी तौर पर ट्रेनिंग भी नहीं दी जाती है जिससे इनपर काफी दबाव है।

स्वास्थ्य विभाग में भी परेशानी

वहीं स्वास्थ्य विभाग में भी कुल ग्यारह लिपिक है जिनपर आॅनलाइन पोर्टल पर डाटा अपडेट करने की जिम्मेदारी है। लेकिन तकनीकी जानकारी के आभाव में कुछ लिपिकों खासी परेशानी हो रही है। इसी तरह एएनएम से लेकर आशा बहनों को भी अपने कार्य का डाटा मोबाइल से पोर्टल पर अपडेट करना होता है।

लेकिन बड़ी संख्या में यह अपने काम को सही ढंग से अंजाम नहीं दे पाती है। सरकारी योजनाओं को लागू करने के बाद उनमें क्या काम किया गया है इसका विवरण आॅनलाइन पोर्टल पर भेजा जाता है, लेकिन इसमें काफी परेशानी हो रही है।

बिजली विभाग में नहीं है ज्यादा समस्या

विद्युत विभाग में कार्य करने वाले ऐसे लिपिकों की संख्या काफी कम है जिन्हें कंप्यूटर व टाइपिंग का ज्ञान नहीं है। बताया जा रहा है 2014 के बाद बड़ी संख्या में लिपिकों की नियुक्तिायां हुई है जो तकनीकी रूप से काफी सक्षम है। विभाग में ऐसे लिपिकों की ही नियुक्तियां हो रही है जो कंप्यूटर व टाइपिंग की जानकारी रखते है।

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