- सबसे बड़ा सत्कर्म है भागवत ज्ञानयज्ञ: अचल शास्त्री
- भगवान की अतिशय कृपा का फल है भागवत मिलना
जनवाणी संवाददाता |
मोरना: भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के राम दयाल भागवत भवन में पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज के सान्निध्य में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने आनंद पुण्यलाभ प्राप्त किया। कथा में भगवान वाराह एवं कपिल अवतार के साथ ध्रुव तथा सती चरित्र का विशद वर्णन किया गया।
राष्ट्रीय कथाव्यास अचल कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा से मनुष्य का आहार, व्यवहार, आचरण सध जाता है। आहार की शुद्धता से आचरण में पवित्रता आती है। पवित्र आचरण मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है। भागवत कथा सबसे बड़ा सत्कर्म है। द्रव्ययज्ञ, तपयज्ञ, योगयज्ञ, स्वाध्याय यज्ञ तथा ज्ञानयज्ञ यह सत्कर्म के पांच स्वरूप बताये गए हैं। इनमें ज्ञानयज्ञ सर्वश्रेष्ठ है। भागवत सद् व्यवहार तथा सद्ज्ञान की जननी है। सद्ज्ञान और सद्व्यवहार मानव उत्थान के सबसे बड़े साधन हैं।
उन्होंने कहा कि भागवत नैतिक मूल्यों की शिक्षा देती है तथा कर्तव्य परायणता का बोध कराती है। भागवत कथा मिलना भगवान की अतिशय अतिविशिष्ट कृपा का फल है। मनुष्य मनु की संताने हैं। आकूति, देवहूति, प्रसूति, प्रियव्रत और उत्तानपाद मनु जी की इन पांच संतानों से ही सम्पूर्ण मानव जाति का विस्तार हुआ है। कथा में हैदराबाद से पधारे मुख्य यजमान विजय अग्रवाल लक्ष्मी अग्रवाल, गोविंद लाल मोर आदि मौजूद रहे।

