- लापरवाही की इंतेहा! नाकामी का ठीकरा प्राकृतिक आपदाओं के मत्थे मढ़ा
- सड़कों के नवीनीकरण से लेकर विशेष मरम्मत तक के कार्य में भी पिछड़ गया विभाग
- 30 नवंबर के बाद होगी काम की मॉनिटिरिंग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पीडब्ल्यूडी यानि कि लोक निर्माण विभाग। नाम दमदार और काम भी दमदार, लेकिन इस सबसे परे विभागीय अफसरशाही में कामों को लटकाना शायद इनका शगल बन चुका है और यही कारण है कि मुख्यमंत्री तक के आदेश विभाग के लिए शायद कोई मायने नहीं रखते। अंत में मुख्यमंत्री को ही बैकफुट पर आना पड़ा और उन्होंने सड़कों के उद्धार का जो आदेश दिया था उसकी टाइम लाइन को 15 दिन के लिए बढ़ाना पड़ा गया।
शासन ने प्रदेश भर की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का आदेश दिया था जो कि तय समय सीमा में पूरा नहीं हो पाया। इसके अलावा 10 हजार 973 किलोमीटर का मार्ग ऐसा भी था जिस पर नवीनीकरण का कार्य अंजाम दिया जाना था। यहां भी पीडब्ल्यूडी सोता रह गया और निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 4 हजार 596 किलोमीटर मार्ग का ही नवीनीकरण कर पाया। यानि पूरे दिनों में आधा काम भी नहीं कर पाया।
गड्ढों और नवीनीकरण के कार्य से बाहर निकलें तो एक और पेंच फंसा मिलता है और वो पेंच है सड़कों की विशेष मरम्मत का। यहां भी विभाग अपनी परफॉर्मेंस पर बट्टा लगवा बैठा। विशेष मरम्मत के अंतर्गत प्रदेश भर में 11 हजार 918 किलोमीटर लक्ष्य के सापेक्ष विभाग सिर्फ 6 हजार 142 किलोमीटर सड़क पर ही विशेष मरम्मत को अंजाम दे पाया। यहां एक खास बात और यह है कि विभाग ने इन सब कार्यों के पीछे जो कारण गिनाए वो भी समझ से परे हैं।
दलील यह दी गई कि प्रदेश में अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक अत्याधिक वर्षा के कारण बाढ़ व जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई तथा कुछ जगहों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एनजीटी) द्वारा निर्माण कार्यों पर ही पाबंदी लगा दी गई। इसके अलावा यह भी दलील पेश की गई कि नहरों में सिल्ट की सफाई का कार्य चला और इन सबके चलते ही कार्य में विलम्ब हुआ।
हालांकि इस तरह की दलीलें किसी भी प्रशासनिक क्षमता व दक्षता पर अगुंली उठाने के लिए काफी हैं। हालांकि शासन ने पीडब्ल्यूडी की इन दलीलोें से इत्तेफाक करते हुए उन्हें 15 दिनों का एक तरह से जीवनदान दे दिया। शासन ने इन कार्यों के लिए करोड़ो रुपयों का धन स्वीकृत कर दिया था। इसके तहत इसी वित्तीय वर्ष में विशेष मरम्मत के लिए 1698 करोड़ रुपये व नवीनीकरण के लिए 1813 करोड़ तथा गड्ढा मुक्ति के लिए 503 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे।
हड़ताल के चलते निर्माणाधीन इमारतों पर लगा ब्रेक
र्इंट-भट्ठों की अनिश्चतकालीन हड़ताल का असर अब धीरे धीरे निर्माण कार्यों पर पड़ने लगा है। र्इंटों के आभाव में विभिन्न निर्माणाधीन इकाईयों में काम पर ब्रेक लगने लगा है। कई निर्माणाधीन मकानों में भी र्इंटों की कालाबाजारी के चलते फिलहाल काम रोक दिया गया है। उधर दूसरी ओर हड़ताल लम्बी खिंचने की आशंका के चलते कुछ निर्माण इकाईयों ने अपने यहां कन्स्ट्रक्शन को फिलहाल रोक दिया है।
जीएसटी स्लैब में बदलाव के साथ साथ कोयले की खरीद में आ रही दिक्कतों सहित कुछ अन्य मांगों के समर्थन में देश भर के र्इंट-भट्ठा संचालक पिछले काफी दिनों से हड़ताल पर चल रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने 10 नवम्बर को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया तथा संसद तक का घेराव किया था।
हालांकि उसी दिन सांसद राजेन्द्र अग्रवाल ने प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर उन्हें आश्वासन दिया था कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। हालांकि इस प्रकरण में अभी फिलहाल कोई पहल नहीं हुई है। इसी के चलते इस बात की आशंका जताई जा रही है कि र्इंट भट्ठा संचालकों की हड़ताल लम्बी खिंच सकती है। हड़ताल लम्बी खिंचने से इसका सीधा असर अब निर्माणाधीन इमारतों पर पड़ने लगा है।
शहरा में ही इस समय कई निर्माणाधीन इकाईयां कार्य कर रही हैं। यहां या तो स्टॉक किए गए माल में से काम को अंजाम दिया जा रहा है या फिर कालाबाजारी के रूप में इन इकाईयों को महंगी र्इंटे खरीदनी पड़ रही हैं। आॅल इंडिया ब्रिक्स एडं टाइल्स मैन्यूफैक्चर्स फेडरेशन की अपील पर र्इंट-भट्ठा मालिक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

