- हाइवे पर चल रहे किसानों के धरने को दिया समर्थन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: पिछले एक सप्ताह से मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के खिलाफ हाइवे पर किसानों और व्यापारियों का धरना चल रहा हैं। अब इस आंदोलन भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी कूद गए हैं। किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल भाकियू नेता राकेश टिकैत से मिलने मुजफ्फरनगर गया था। महापंचायत के लिए उनसे समय मांगा गया, जिसके लिए राकेश टिकैत ने 14 सितंबर को महापंचायत में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचने के लिए सहमति दे दी तथा कहा कि किसानों को एकजुट करें और आंदोलन का बिगुल बजा दे।
मेडा अफसरों की हठधर्मिता के चलते ये बड़ा आंदोलन का रूप लेता दिख रहा हैं। क्योंकि राकेश टिकैत के इस आंदोलन में कूदने से ये मामला नेशनल स्तर का बन जाएगा, जिसके भाजपा को भी 2024 के लोकसभा चुनाव में नुकसान हो सकता हैं। दरअसल, भाजपा के खिलाफ एक तरह से माहौल खड़ा करने में मेडा की भूमिका भी अहम बनती जा रही हैं। छोटा-सा धरना आरंभ हुआ, जो बड़ा रूप लेता जा रहा हैं। आंदोलनकारियों से किसी तरह की वार्ता भी प्राधिकरण अफसरों ने नहीं की। अब ये आंदोलन गांव-गांव में घुस सकता हैं।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे गौरव चौधरी का कहना है कि 10 हजार किसानों को जुटाने का इसमें 14 सितंबर को लक्ष्य रखा गया हैं। इस भीड़ को प्राधिकरण भी देखे कि आंदोलन छोटा नहीं, कितना बड़ा हो गया हैं। अब आंदोलनकारी पीछे नहीं हटेंगे। इसमें जरूरत पड़ी तो किसान प्राधिकरण आफिस पर भी कढ़ाई चढ़ाना जानते हैं, जो प्राधिकरण अफसरों के लिए ठीक नहीं होगा। दरअसल, ग्रीन वर्ज में जिन किसानों की जमीन हैं, उसको मेडा खाली करा रहा हैं। बिल्डिंग जो बनी हुई हैं, उसको तोड़ने का फरमान जारी कर रखा हैं।
बाकायदा होटलों व ढाबों पर निशान भी लगा रखे है, जिसके बाद कभी भी इन पर तोड़फोड़ चालू की जा सकती हैं। श्रद्धापुरी में हाइवे से 48 मीटर रोड वाइडिंग में हैं। श्रद्धापुरी प्राधिकरण की आवासीय कॉलोनी हैं, इसका कुछ हिस्सा भी रोड बाइडिग में आ रहा हैं। पहले मेडा अपनी कॉलोनी का ही ध्वस्तीकरण करें। सर्विस रोड पूरी रोड वाइडिंग में कैसे बना दी? इसके लिए प्राधिकरण अफसर जवाब दे।
जब ग्रीन वर्ज छोड़ा, तब नहीं था एनजीटी
जब प्राधिकरण ने ग्रीन वर्ज छोड़ा, तब एनजीटी अस्तित्व में नहीं था। उस दौरान प्राधिकरण अफसरों ने मास्टर प्लान में अपनी कॉलोनी को ग्रीन वर्ज से बाहर कर दिया और किसानों की जमीन पर ग्रीन वर्ज लगा दिया। इस तरह से किसानों की जमीन कोडियो के भाव भी कोई खरीदने को तैयार नहीं हैं।
जब किसान निर्माण कर लेते है तो उन पर बुलडोजर चला दिया जाता हैं। ग्रीन वर्ज जब छोड़ना ही था तो प्राधिकरण ने अपनी जमीन में क्यों नहीं छोड़ा? इसी से प्राधिकरण की नियम में पहले से ही घोट था, तभी तो किसानों की जमीन पर ग्रीन वर्ज लगा दिया।
टिकैत के निर्णय से मेडा अफसर परेशान
राकेश टिकैत पश्चिमी यूपी के ही नहीं, बल्कि किसानों के बड़े नेता हैं। पश्चिमी यूपी, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों में उनका डंका बज रहा हैं। दरअसल, राकेश टिकैत के किसानों के आंदोलन में कूदने से मेडा के अफसर परेशान हैं, लेकिन कह कुछ भी नहीं रहे हैं।
टिकैत की महापंचायत में ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी भीड़ जुटेगी। क्योंकि पश्चिमी यूूपी में राकेश टिकैत की सबसे मजबूत पकड़ किसानों पर हैं। राकेश टिकैत की एक हुंकार पर किसानों का जनसैलाब उमड पड़ता हैं। अब 14 सितंबर को महापंचायत के ऐलान के साथ ही किसानों ने मेरठ में महापंचायत के ऐलान के साथ ही तैयारी भी आरंभ कर दी हैं।

