जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: शोभित विश्वविद्यालय में विरासत यूनिवर्सिटी हेरिटेज रिसर्च सेंटर के समन्वयक एवं शोधार्थी राजीव उपाध्याय ‘यायावर’ द्वारा प्रस्तुत शोध “रामायण और राष्ट्रीय शिक्षा नीति : मूल्यपरक शिक्षा की खोज” इण्डियन जर्नल ऑफ सोशल कन्सर्न्स (Indian Journal of Social Concerns) की अंतर्राष्ट्रीय द्वै–मासिक, पीयर-रिव्यूड एवं रेफरीड शोध पत्रिका के मई-जून 2025 अंक में प्रकाशित हुआ है। यह शोध रामायण में निहित ज्ञान-वर्ग, चिंतन-वर्ग, व्यवहार-वर्ग तथा आत्म-विकास-वर्ग के जीवन मूल्यों को आधुनिक शिक्षा और समाज के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करता है।
राजीव उपाध्याय ‘यायावर’ ने अपने शोध में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मूल लक्ष्यों – नैतिकता, समावेशिता, सह-अस्तित्व, संवैधानिक मूल्यों, और सांस्कृतिक बोध को रामायण के दृष्टांतों से जोड़ते हुए यह प्रतिपादित किया है कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक समग्र जीवन-दर्शन का स्रोत है। यह शोध समसामयिक शिक्षा व्यवस्था को मूल्यनिष्ठ, चरित्रप्रधान तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से संपृक्त बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।
समाज में जीवन-मूल्यों के क्षरण, नैतिक दुविधाओं और सांस्कृतिक विस्मृति के दौर में यह शोध नई पीढ़ी के लिए आचरण, संवाद और सह-अस्तित्व जैसे मूल्यों को शिक्षा के माध्यम से पुनर्स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। विद्वत् समुदाय में इस शोध को अंतरविषयी दृष्टिकोण और मूल्यों की वर्गीकृत व्याख्या के लिए सराहना मिली है। राजीव उपाध्याय यायावर का शोध “महर्षि वाल्मीकि रामायण के जीवन मूल्य शिक्षा नीति 2020 के आलोक में” विषय पर चल रहा है।

