Sunday, March 22, 2026
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मेडिकल में रेजीडेंट डाक्टर, फौजियों में हाथापाई

  • विरोध में डाक्टरों ने इमरजेंसी में इलाज बंद किया
  • दोनों पक्षों ने दी तहरीर, बाद में हो गया समझौता

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेडिकल इमरजेंसी में रेजिडेंट डाक्टर के साथ सेना के जवानों ने हाथापाई कर दी जिसके बाद काफी देर तक हंगामा हुआ। अंत में दोनों पक्षों में समझौता होने के बाद मामला शांत हुआ। इस दौरान इमरजेंसी में करीब दो घंटे तक अफरातफरी का माहौल बना रहा और डाक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया था।

रविवार शाम मेडिकल के प्रोफेसर डा. शशांक जिंदल का चालक बाइक से बेगमपुल गया था। बेगमपुल पर कार में आर्मी के अधिकारी बेटी के साथ जा रहे थे। इस समय चालक की बाइक आर्मी अधिकारी की कार से टकरा गई। घटना में कार चालक को मामूली चोट आई। जिसके बाद आर्मी के अधिकारी ने अपने चालक का इलाज कराने को कहा।

डा. शशांक का चालक घायल को मेडिकल इमरजेंसी लेकर पहुंचा और उसका इलाज कराया। इसी बीच आर्मी अधिकारी ने अपनी क्यूआरटी टीम को फोन कर दिया जिसके बाद आर्मी के करीब 15 जवान मेडिकल इमरजेंसी जा पहुंचे और मौके पर मौजूद जूनियर रेजिडेंट डाक्टर्स के साथ हाथापाई करने लगे।

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बताया जा रहा है करीब दो घंटे तक इमरजेंसी में हंगामा होता रहा। मौके पर पहुंचे मेडिकल के प्रिंसिपल डा. आरसी गुप्ता ने हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। इसी बीच डाक्टर्स के पक्ष में अन्य रेजिडेंट डाक्टर्स भी इमरजेंसी पहुंच गए। जबकि सेना के जवान मौके से चले गए।

दोनों पक्षो ने पहले एक-दूसरे के खिलाफ मेडिकल थाने पर तहरीर दी, लेकिन प्रिंसपल डा. आरसी गुप्ता व आर्मी अधिकारी के समझाने पर दोनों पक्षों में समझौता हो गया। इस बीच इमरजेंसी में करीब दो घंटे तक अफरातफरी का माहौल बना रहा। वहीं, मेडिकल थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ गलतफहमी के कारण विवाद हो गया था। दोनों पक्ष समझौता लिखकर दे गए हैं।

गर्मी में परेशान रहे मरीज

डाक्टरों और सेना के बीच चल रहे विवाद के कारण डाक्टरों ने इमरजेंसी में जब इलाज करना बंद कर दिया तो हाहाकार मच गया। कई मरीज ऐसे भी थे जो गंभीर थे लेकिन जूनियर डाक्टर बाहर निकल कर आ गए थे। डाक्टरों का कहना था कि जब तक आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होगी

तब तक वो काम नहीं करेंगे। इसको देखकर हाहाकार मच गया और मरीज इलाज के लिये शोर मचाने लगे। मेडिकल कालेज में अफरातफरी के बाद सेना के अधिकारी और कर्मचारियों के तेवर भी ढीले पड़े और दोनों पक्षों ने कार्यवाही न करने के लिये समझौता कर लिया गया।

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