Saturday, March 21, 2026
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30 मालियों के भरोसे 460 पार्कों की जिम्मेदारी

  • नगर निगम की ओर से पार्कों की सुचारू व्यवस्था को कोई कार्ययोजना तक नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच कुछ फुरसत के पल निकालकर ताजा हवा लेने के लिए पार्क की सैर करने वाले महानगर के वाशिंदों के लिए यह अनुभव सुखद नहीं हो पाता। इसका कारण यह है कि नगर निगम की ओर से पार्कों की सुचारू व्यवस्था के लिए कोई कार्ययोजना तक नहीं है। बदहाली का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 460 पार्कों के रखरखाव के लिए महज 30 माली मौजूद हैं।

यानि सभी उद्यानकर्मी बिना अवकाश लिए रोस्टर बनाकर काम करें, तो 15 दिन से अधिक समय में एक पार्क का दुबारा नंबर आ पाता है। महानगर के मंगलपांंडे नगर, शास्त्रीनगर, साकेत, पांडवनगर, गंगानगर समेत अधिकांश नई कालोनियों और पुरानी बस्तियों में पार्कों की कोई कमी नहीं है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में छोटे-बड़े सभी पार्कों को मिलाकर कुल संख्या 460 तक पहुंच चुकी है।

महानगर में जहां-जहां वेलफेयर सोसायटी बनी हुई हैं, वहां स्थानीय नागरिक अपने स्तर से ही माली रखकर पार्कों की साफ-सफाई और कटाई-छंटाई का काम कराते रहते हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत अधिक नहीं है। मौजूदा स्थिति यह है कि शहर के प्रमुख पार्कों में जो लोग सुबह-शाम वॉक के लिए आते हैैं, उन्हें कई प्रकार की अव्यवस्थाओं से रूबरू होना पड़ता है। शहर के अनेक पार्क ऐसे हैं, जिनमें जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। नियमित रूप से सफाई न हो पाने के कारण डस्टबिन हर समय कूड़े से भरे रहते हैं।

पार्कों में हरी घास पर चलने का आनंद कुछ ही स्थानों पर मिल पाता है। वरना तो अधिकांश स्थानों पर पेड़-पौधे बिना देखरेख के मुरझा चुके हैं। पार्कों का काम देखने वाले सुपरवाइजर सुनील सोम का कहना है कि जहां कटाई-छंटाई की जरूरत होती है, वहां के नागरिक या पार्षद प्रभारी उद्यान अधिकारी के माध्यम से टीम को बुला लेते हैं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर स्थानों पर वेलफेयर सोसायटी ही अपने स्तर से पार्कों की देखरेख का काम कराती हैं।

वहीं प्रभारी उद्यान अधिकारी डा. हरपाल सिंह का कहना है कि पार्कों की देखभाल के लिए रोस्टर बनाया गया है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि उद्यान की देखरेख करने के लिए नगर निगम के पास बहुत कम कर्मचारी हैं। इनमें 10 नियमित और 20 आउटसोर्स कर्मी शामिल हैं। डा. हरपाल सिंह का कहना है कि कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रस्ताव दिया गया है।

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