Wednesday, March 4, 2026
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भाजपाइयों की ‘संयमहीनता’ ने थमाई रालोद को ‘जोत’

  • अतिउत्साह में कर बैठे किसानों से मारपीट, बन गया मुद्दा
  • मुकदमा दर्ज किये जाने व किसानों को रिहा किये जाने की मांग

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: जनपद में अपना जनाधार लगभग गंवा चुकी रालोद के हाथ भाजपा एक के बाद एक मुद्दा थमा रही है। तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों के कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन में अपनी भूमिका निभा रहे रालोद के हाथ सोमवार को भाजपाइयों के अति उत्साह ने एक ओर मुद्दा थमा दिया।

यह ऐसा मुद्दा है, जो रालोद को संजीवनी देने के साथ ही भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। अति उत्साह में भाजपाइयों द्वारा किसानों से की गई मारपीट के बाद ऐतिहासिक सौरम चौपाल पर हुई पंचायत के बाद जनपद में बड़ा आंदोलन हो सकता है, जो भाजपा को कहीं ने कहीं नुकसान अवश्य पहुंचायेगा।

जनपद में वर्ष 2013 के दंगों के बाद राष्ट्रीय लोकदल का वोटर माने जाने वाला जाट समाज रालोद को छोड़कर भाजपा के खेमे में पहुंच गया था, जिसके बाद लगातार रालोद को हार का सामना करना पड़ रहा है। एक समय था जब वेस्ट यूपी में रालोद का डंका बजता था और उत्तर प्रदेश में बनने वाली कमोबेश सभी सरकारों में रालोद की हिस्सेदारी होती थी।

2013 में हुए दंगों के बाद सबसे बड़ा नुकसान रालोद को पहुंचा था और वह जनपद ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शून्य की ओर चली गई थी। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में रालोद अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी, इसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल के हाथ बिल्कुल खाली थे।

2019 के लोकसभा चुनाव में रालोद के मुखिया चौधरी अजित सिंह स्वयं मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़े थे, परन्तु वह भाजपा के डा. संजीव बालियान से शिकस्त खा गये थे। इस चुनाव के बाद लगने लगा था कि अब रालोद का आखिरी दौर है, परन्तु भाजपा की नीतियों ने एक बार फिर रालोद में जान फूंक दी।

रालोद का परम्परागत वोटर फिर से अपनी पार्टी की ओर लौटने लगा है। मुजफ्फरनगर में हुई किसानों की महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने भरे मंच से स्वीकार किया था कि चौधरी अजित सिंह को हराना उनकी बड़ी भूल थी।

अब सौरम में हुई घटना के तुरन्त बाद ही जिस तरह से जयंत चौधरी ने अपने ट्वीटर हेंडल से ट्वीट कर घटना की भर्तसना की, उससे रालोद कार्यकर्ताओं में जोश भर गया और उन्होंने सोरम में हुई पंचायत से लेकर थाने के घेराव तक अपनी अहम भूमिका निभाई। रालोद एक बार फिर किसानों की मसीहा बनती नजर आई। सौरम में केन्द्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान के साथ पहुंचे उनके समर्थक माहौल को नहीं भांप पाये और अति उत्साह में रालोद के हाथ जोत थमा बैठे हैं।

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