Sunday, February 15, 2026
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नवजात शिशु पुनजीवनीकरण कार्यशाला का हुआ आयोजन

जनवाणी ब्यूरो |

लखनऊ: उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की अध्यक्षता में रविवार को गोमतीनगर स्थित होटल लीजेन में भारतीय बाल अकादमी व चिकित्सा शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से प्रदेश के सभी राजकीय व निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों के बाल रोग व स्त्री रोग विभाग के चिकित्सा शिक्षकों के लिये नवजात शिशु पुनजीवनीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश के लगभग 200 चिकित्सा शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नवजात शिशु की मृत्यु दर में कमी लाने के लिये भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार वचनबद्ध है। एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु में दो तिहाई बच्चों की मृत्यु जन्म के प्रथम माह में व प्रथम माह में होने वाली मृत्यु में दो तिहाई मृत्यु प्रथम सप्ताह में होती है। विशेषज्ञों द्वारा किये गये विश्लेषण में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि नवजात शिशु के लिये प्रथम सप्ताह, प्रथम दिवस व पहले कुछ मिनट बहुत ही ध्यान देने योग्य हैं। इस समय ध्यान देने से काफी नवजात शिशुओं को मृत्यु से बचाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में अभी नवजात शिशुओं की मृत्यु दर 32 प्रति एक हजार जन्म है जिसे 2030 तक 10 से कम किये जाने का लक्ष्य है।

डिप्टी सीएम ने कहा कि देश के किसी भी प्रदेश में इस प्रकार के सभी राजकीय व निजी मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ चिकित्सकों को एक साथ ट्रेनिंग देने की यह अनूठी पहल है। जिसमें चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य व भारतीय बाल रोग आकदमी एक साथ योगदान कर रहे हैं व इसे आगे और विस्तारित किया जायेगा। उन्होंने आयोजकों के इस कार्य की सराहना करते हुए आश्वस्त किया की सभी चिकित्सालयों में आवश्यक ट्रेनिंग संसाधन उपलब्ध कराये जायेंगे व वे स्वयं इस की मॉनिटरिंग भी करेगे। उन्होंने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में स्किल सेंटर बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य उप्र सरकार की प्राथमिकता है।

बाल मृत्यु दर में आई कमी: अमित मोहन

अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने प्रदेश में अब तक के अथक प्रयास व उनके परिणाम बताते हुए अवगत कराया की बाल मृत्यु दर में गत वर्ष 3 अंकों की कमी आयी है जिससे प्रतिवर्ष लगभग 17 हज़ार बच्चों को अकाल मृत्यु से बचाया गया। इस कार्यशाला में नवजात शिशुओं को जन्म पर सांस लेने में सहायता करने व आक्सीजन की कमी हाईपोक्सिया व कम तापमान हाईपोथर्मिया से बचाने और स्तनपान को बढावा देने के उद्देश्य से आयोजित की गयी है। ट्रेंड किये गये चिकित्सक अपने मेडिकल कॉलेजों में अन्य चिकित्सकों को व उत्तीर्ण हो रहे इंटर्स को ट्रेनिंग देंगे और अपने नजदीकी जनपदों में जिला चिकित्सालयों, सीएचसी व पीएचसी के चिकित्सकों और प्रसूति कार्य में सम्मिलित स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित अंतराल पर हैंड्स-आन ट्रेनिंग प्रदान करते रहेंगे।

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