जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: केंद्रीय पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने रविवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मर्करी हॉल में आयोजित ‘‘कान्फ्रेंस ऑफ पंचायत-2022‘‘ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी व्यक्ति का बजट होता है या अकाउंट होता है उसी प्रकार धरती व जलवायु का भी एक बजट है।
विकसित राष्ट्रों की कार्बन उत्सर्जन के क्षेत्र में विकासशील देशों की अपेक्षा अत्यधिक भूमिका है। इन विकसित राष्ट्रों ने पृथ्वी व प्रकृति का शोषण किया है। रिन्यूबल एनर्जी पर भारत ने जो काम किया है उससे विकसित राष्ट्र भी प्रेरित होकर अपना रहें हैं। वर्तमान समय में कृषि पर जलवायु परिवर्तन का बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बदलते मौसम के प्रभाव से केवल फसलों का उत्पादन ही प्रभावित नहीं हो रहा है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
जलवायु परिवर्तन का कुप्रभाव पूरी दुनिया में हर स्तर पर देखा जा रहा है। मौसम का अचानक बदलना चक्रवात, तूफान या बिजली गिरने जैसी आपदाओं की संख्या में बढोत्तरी और खेती, पशुपालन, भोजन में पौष्टिकता की कमी सहित कई अनियमितताएं उभर कर सामने आ रहीं हैं।
केन्द्रीय पंचायती राज मंत्री ने तीन सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायतों को जलवायु मित्र ग्राम पंचायत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जलवायु परिवर्तन दिग्दर्शिका, जलवायु परिवर्तन क्षमता विकास प्रशिक्षण पुस्तिका, सशक्त पंचायत रूपरेखा, जैव विविधता प्रबंधन में जैव विविधता प्रबंध समितियों की भूमिका नामक पुस्तिका एवं श्रीमद्भागवत का वनस्पति संसार पुस्तक का विमोचन किया गया। साथ ही हरीतिमा मोबाइल ऐप एवं यूपी प्लास्टिक थॉन 2022 को भी लॉन्च किया गया।
कांफ्रेंस ऑफ पंचायत, 2022 में 250 ग्राम प्रधानों एवं पंचायत सचिवों को व्यक्तिगत रूप से तथा प्रदेश की अन्य समस्त लगभग 58 हज़ार ग्राम पंचायतों को पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश से समन्वय स्थापित कर ब्लाक स्तर से विडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से आमंत्रित किया गया। उक्त कांफ्रेंस में जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से 27 संवेदनशील जनपदों के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही प्रत्येक जनपद से एक पंचायत को अर्थात कुल 27 पंचायतों को जलवायु मित्र ग्राम पंचायत के रूप में सम्मानित किया गया।

