जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: छावनी के चैपल स्ट्रीट बंगला 284 में हरे भरे पेड़ों के कटान मामले में लीपापोती कर दी गई है। हैरानी तो इस बात की है कि नीम समेत प्रतिबंधित कई अन्य हरे पेड़ काटने के मामले में जो स्टाफ कार्रवाई को गया था वो सेटिंग कर लौट गया। नीम का हरा पेड़ इस कोठी में रहने वालों ने टुकड़ों में कटावाया।
पेड़ के कटान पर रक्षा संपदा अधिकारी व सीईओ कैंट का स्टाफ बजाय आरोपियों के खिलाफ एफआईआर कराने के चुप्पी साधे बैठा रहा। करीब सप्ताह भर पूर्व भारी भरकम पेड़ का 50 फीसदी हिस्सा कटवा दिया गया। उसकी लकड़ी ठिकाने लगा दी गई। दो दिन पहले रातों रात इस पेड़ का बचा हुआ हिस्सा भी कटवा दिया गया, लेकिन डीईओ व कैंट बोर्ड प्रशासन की नींद नहीं टूटी। यह पेड़ अब जड़ से खत्म कर दिया गया है।
पता चला है कि स्टाफ के कुछ लोग यहां पहुंचे थे, लेकिन आरोप है कि बजाय कार्रवाई के सेटिंग-गेटिंग कर लौट गए। सदर पुलिस की भी भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध नजर आ रही है। नियमानुसार कैंट क्षेत्र में कोई भी हरा पेड़ डीईओ की अनुमति के बगैर कटवाना संभव नहीं है।
विगत दिनों आबूलेन स्थित एक कोठी में हरा पेड़ काट दिया गया था। उस मामले की सूचना मिलते ही कैंट बोर्ड के आला अफसर दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए थे और आरोपी के खिलाफ एफआईआर करा दी गई थी, लेकिन कैंट बोर्ड से चंद कदम की दूरी पर स्थित चैपल स्ट्रीट 284 में नील का हरा पेड़ काट दिए जाने के मामले में कैंट प्रशासन के हाथ कांप रहे हैं। वन विभाग को भी हरे पेड़ काटे जाने की सूचना दी गयी है, लेकिन वहां भी मुंह बंद कर दिया गया है। खुद के पर्यावरण प्रेमी होने का दम भरने वाले भी नीम के कत्ल पर चुप हैं।

