जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेडिकल के कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में स्टॉफ का ड्यूटी करना किसी जोखिम से कम नहीं। आइसोलशन वार्ड में ड्यूटी करने वालों को एन-95 मास्क तक नहीं मिल रहे हैं। ड्यूटी करने वाले स्टाफ के लिए आईसीएमआर की ओर से कोविड-19 गाइड तय की गयी है। उसका पालन कराने के बजाय गंभीर उल्लंघन किया जा रहा है। जिसके चलते कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करने वाले स्टाफ के कारण ही संक्रमण के फैलने का खतरा आसन्न है।
दरअसल हो यह रहा है कि जो भी स्टाफ कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी कर रहा है, नियमानुसार ड्यूटी के बाद उन्हें परिवार व अन्य लोगों से अलग रखना जरूरी है। इसके अलावा आठ या फिर 14 दिन की ड्यूटी पूरी होने के बाद दो दिन का क्वारंटाइन जरूरी है।
पहले यह 14 दिन था बाद में सात दिन कर दिया गया। अब दो दिन के लिए ड्यूटी करने वाले स्टॉफ को क्वारंटाइन कराया जाना जरूरी किया गया है। लेकिन हो यह रहा है कि जो स्टाफ कोविड-19 आइसोलेशन वार्ड में जो भी स्टॉफ ड्यूटी कर रहा है, मेडिकल प्रशासन की ओर से समुचित इंतजाम न होने की वजह से वो लोग बजाय मेडिकल में रूकने के ड्यूटी के बाद घर चले जा रहे हैं।
पहले प्राइवेट वार्ड में ड्यूटी करने वाले स्टाफ के रुकने का इंतजाम किया गया था, लेकिन वहां भी अब बदइंतजामी अधिक नजर आती है। जिसके चलते स्टॉफ खासतौर से महिला स्टाफ घर चला जाता है। लेकिन घर चले जाने के खतरे कम नहीं है। कोविड ड्यूटी के बाद जो स्टाफ घर जा रहा है उनके कोरोना कॅरियर होने के खतरे की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन नाम न छापे जाने की शर्त पर स्टॉफ इसको अपनी मजबूरी बताता है।
उनका कहना है कि पहले खाने आदि की व्यवस्था मेडिकल प्रशासन की ओर से की जाती थी अब वो भी बंद कर दी गयी है। इसके अलावा सबसे ज्यादा किल्लत एन-95 मास्क की है। स्टाफ तो छोड़ो आरटीपीसीआर की जांच के लिए किट तक नहीं है। किट न होने की वजह से ओपीडी की मार्फत भर्ती होने वाले मरीजों की सर्जरी में देरी हो रही है।
वहीं दूसरी ओर सूत्रों ने जानकारी दी है कि इन अव्यवस्थाओं का जिम्मेदारी का ठीकरा मेडिकल प्रशासन पर फोड़ना मुनासिब नहीं। दरअसल कोरोना के नाम पर जो फंड सरकार से मेडिकल प्रशासन को दिया जाता था उसमें अब शासन स्तर पर ही कंजूसी बरती जा रही है।
कोरोना के बढ़ते मामलों से शादी वाले घरों में दहशत
कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर जहां प्रशासन चिंतित हो गया है वहीं उन घरों में बैचेनी बढ़ गई है जिसमें आने वाले महीनों में शादी होने वाली है। ऐसे परिवार इस बात से परेशान है कि कहीं प्रशासन शादी समारोह में शामिल होने वालों की संख्या सीमित न कर दे।
गत वर्ष कोरोना के कारण संपूर्ण लॉकडाउन लगाया गया था। इस दौरान शादी ब्याह में डर के कारण काफी कम लोग शामिल हुए थे। बाद में प्रशासन ने शादी समारोह के लिये पहले पचास लोगों की अनुमति दी थी जिसे बाद में बढ़ाकर सौ कर दिया गया था। इस निर्णय से वैंक्वेट हाल मालिकों ने विरोध भी जताया था। प्रशासन ने विवाह मंडपों को कड़े नियमों से बांध दिया था।
कोरोना की स्थिति नार्मल होने के बाद प्रशासन ने अपना निर्णय वापस ले लिया था। अब मार्च महीने में एक बार फिर से कोरोना का ग्राफ बढ़ने लगा है और इसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। खुद डीएम ने इस बाबत गाइड लाइन जारी कर दी है। वहीं दूसरी ओर अप्रैल और मई महीने में काफी शादियां हैं और लोग इस बात से डरे हुए हैं कि कोरोना के कारण कहंी सारी तैयारियां न धरी रह जाए।
इसको लेकर दो दिन लोगों के फोन मीडिया हाउसों और एडीएम सिटी के आफिस में खड़कते रहे। जिस तरह प्रशासन लगातार गाइड लाइन जारी कर रहा है उसको देखते हुए ऐसे परिवारों में दहशत आनी लाजिमी है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जब तक प्रशासन का रुख साफ न हो जाए तब तक तैयारियां जोरशोर से न की जाए। इसको देखते हुए विवाह मंडप वाले परेशान दिख रहे हैं।
आरटीपीसीआर जांच के नाम पर प्राइवेट लैब को लूट की खुली छूट
कोरोना संक्रमण का पता लगाने के लिए आरटीपीसीआर जांच बगैर मूल्य तय किए प्राइवेट लैबों को दिए जाने पर सवाल खडेÞ हो रहे हैं। आरटीपीसीआर जांच के लिए मूल्य निर्धारण न किए जाने की वजह से प्राइवेट लैब इस जांच के नाम पर लूट मचाए हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल ये है कि जो जांच केवल माइक्रोबोयलॉजी लैब में ही हो सकती है, उसे कराने का अधिकार पैथलैबों को दिए जाने पर भी गंभीर सवाल हैं। इन तमाम बातों की शिकायत आईएमए के पूर्व सचिव डा. अनिल नौसरान ने कमिश्नर को लिखे पत्र में की है।
साथ ही आरटीआई की मार्फत इसको लेकर सीएमओ कार्यालय से तमाम सवाल भी पूछे हैं। डा. नौसरान द्वारा पूछे गए सवालों का तय अवधि में जवाब दिए जाने के निर्देश कमिश्नर कार्यालय ने सीएमओ कार्यालय को दिए हैं। मामला कमिश्नर के संज्ञान में आने से स्वास्थ्य हल्कों में हड़कंप मचा हुआ है।
यहां करायी जा सकती हैं जांच
सीएमओ कार्यालय से गत आठ मार्च को आईएमए, नर्सिंग होम एसोसिएशन, पैथोलॉजी एसोसिएशन व समस्त प्रबंधक व मालिक निजी हॉस्पिटल को जारी किए गए पत्र में आरटीपीसीआर जांच को लेकर जानकारी दी गयी है। इनकी जानकारी देते हुए आरटीपीसीआर जांच कहीं अन्य न कराए जाने की हिदायत भी दी गयी है। साथ ही सभी आरटीपीसीआर जांच की पॉजिटिव रिपोर्ट की सूचना आईडीपीएस सैल को प्रेषित किए जाने को भी कहा है। जिन लैब में जांच की बात कही गयी है।
- एलएलआरएम मेडिकल
- सुभारती मेडिकल कालेज
- एनसीआर इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल सांइस (मुलायम सिंह यादव)
- डा. आकाश जैन-पैथ काइंड लैब
- डा. अंकित जैन-लाल पैथलैब
- डा. प्रवीण गुप्ता-मॉडर्न डायग्नोस्टिक/न्यूबर्ग पैथोलॉजी लैब
- डा. सौम्या गुप्ता-एसआरएल पैथोलॉजी लैब
- डा. राजन गोयल-आरसीआर पैथोलॉजी लैब
ये है आपत्ति
कमिश्नर को भेजे गए पत्र व आरटीआई में मांगी गयी जानकारी में मुख्य आपत्ति आरटीपीसीआर जांच का मूल्य न तय किया जाना। इसके अलावा माइक्रोबॉयलोजी लैब के लिए अधिकृत आरटीपीसीआर की जांच पैथोलॉजी लैब में कराया जाना भी शामिल हैं।
आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच का मूल्य न तय किए जाने की वजह से प्राइवेट लैब जांच के नाम पर अंधाधुंध वसूली कर रही हैं। अंधाधुंध वसूली करने की वजह से लोग कम से कम जांच कराएंगे। जांच यदि कम होगी तो इससे कांटेक्ट के जरिये कोरोना संक्रमण के बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा।

