Saturday, March 14, 2026
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Bihar News: टिकट नहीं मिलने पर राजद नेता मदन साह का फूटा दर्द, राबड़ी आवास के बाहर फाड़ा कुर्ता, संजय यादव पर लगाए टिकट बेचने के आरोप

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: बिहार की सियासत रविवार को उस वक्त गरमा गई जब पूर्वी चंपारण के मधुबन विधानसभा क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व प्रत्याशी मदन साह का दर्द राबड़ी देवी आवास के बाहर फूट पड़ा। पार्टी से टिकट नहीं मिलने के ग़म में उन्होंने अपना कुर्ता फाड़ लिया और फूट-फूटकर रोने लगे।

सबके सामने मदन साह ने राज्यसभा सांसद और तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, “टिकट के बदले मुझसे ₹2.70 करोड़ की मांग की गई थी। पैसे नहीं दिए, तो टिकट काट दिया गया। अब मैं बर्बाद हो गया हूं। बेटे-बेटी की शादी तक टाल दी थी, चुनाव के लिए तैयारी कर रहा था।”

‘लालू जी ने खुद कहा था तैयारी करो’

मदन साह ने दावा किया कि 2020 के विधानसभा चुनाव में जब वे राजद के टिकट पर मधुबन से चुनाव लड़े और मात्र 5,878 वोटों से हारे, तब लालू यादव ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए अगली बार टिकट का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा, “पिछली बार कम वोटों से हारे थे, इस बार पूरा जोर लगाकर लड़ते, लेकिन टिकट ही काट दिया गया।”

लोकसभा चुनाव में NDA को दिया था समर्थन?

पार्टी सूत्रों की मानें तो 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान मदन साह पर राजद उम्मीदवार के बजाय NDA प्रत्याशी को गुपचुप समर्थन देने के आरोप लगे थे। मधुबन क्षेत्र की विधानसभा वाले लोकसभा सीट पर जदयू की लवली आनंद ने राजद की ऋतु जयसवाल को करीब 30,000 वोटों से हराया था, जिससे पार्टी नेतृत्व नाराज चल रहा था।

‘मैं बर्बाद हो गया हूं’, बोले मदन साह

राबड़ी देवी आवास के बाहर अपने फटे कुर्ते और आंसुओं के साथ मदन साह ने कहा, “संजय यादव ने कहा था, दो करोड़ सत्तर लाख दो, टिकट मिलेगा। मैंने इतनी बड़ी रकम कहां से लाऊं? अब सब कुछ चला गया, समाज में क्या मुंह दिखाऊंगा?”

राजद की तरफ से चुप्पी

इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक राजद की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। संजय यादव ने भी इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन सियासी गलियारों में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

राजनीतिक विश्लेषण

मदन साह के आरोप अगर सही हैं, तो यह राजद की अंदरूनी कलह और टिकट वितरण में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। लोकसभा चुनाव में उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जो पार्टी के निर्णय का कारण बनी हो सकती है।

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