- अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए खुद ही सृजित कर दिया था पद
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि के पूर्व कुलपति प्रो. आरके मित्तल के जल्दबाजी के फैसलों ने ही उनकी नैय्या को डूबाया है। कु लपति ने अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए विवि में खुद ही नए पद तक सृजित कर दिए थे। जबकि शासन से इन पदों की कोई स्वीकृति नही थी। कम अनुभवियों को ऐसी पद पर बिठाने जो बेहद गंभीर और जिम्मेदार पद थे।
उनके इस फैसले ने भी उनकी छवि को धूमिल किया। हालांकि कुलपति एक के बाद एक फैसला लेते गए और यह फैसला उनके अहित में ही रहा। पश्चिमी यूपी के रहने वाले कुलपति प्रो. आरके मित्तल ने यहां के ही लोगों से दूरी बनाकर रखी। बाहरी लोगों को तवज्जे देने में प्राथमिकता दी।
कुलपति का पहला यह फैसला ही उनके लिए बेहद खराब रहा। क्योंकि यहां के लोग ही उनके खिलाफ लॉबिंग करने में जुट गए थे। क्योंकि कुलपति द्वारा अब तक जितने भी फैसले लिए गए हैं। उन फैसलों में बाहरी और अपने चहेतों को लाभ दिया गया है। पश्चिमी यूपी के रहने वाले किसी भी कर्मचारी और अधिकारी को कोई लाभ नही दिया। कुलपति ने विवि में प्रशासन अनुश्रवण का पद खुद ही सृजित कर दिया था।

अपने चहेते को इस पद का लाभ देने के लिए बिना शासन से स्वीकृति लिए पद को सृजित कर दिया। कुलपति के बाद रजिस्ट्रार का पद विवि में ऐसा है। जो अनुभवी को इस पद पर काबिज किया जाता है, लेकिन कुलपति ने कुछ ऐसे पद थे। जिन पर कम अनुभवी लोगों को बैठा दिया था। जो विवि में चर्चा का विषय बने हुए थे।
आज लेंगे नए कुलपति विवि का चार्ज
चन्द्रशेखर कृषि विवि कानपुर के कुलपति डा. दुनिया रामसिंह को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कृषि विवि मोदीपुरम का चार्ज दिया है। यह चार्ज जब तक दिया गया है। जब तक कोई अन्य आदेश राजभवन से न आ जाए। कुलपति डा. दुनिया राम आज विवि पहुंचेंगे और विवि में कुलपति के पद का चार्ज लेंगे। विवि के जनसम्पर्क अधिकारी रितुल सिंह ने इसकी पुष्टि की है। अभी फिलहाल नए कुलपति के सामने बड़ी चुनौतियां है। वह इस चुनौती से कैसे निपटेंगे। अब कुलपति को देखना होगा।
तरह-तरह की चर्चाओं ने पकड़ रखा है जोर
कृषि विवि में जब से आर के मित्तल को राजभवन ने हटाया है। तब से तरह-तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। क्योंकि कुलपति आरके मित्तल एक रसूखदार कुलपति थे। जिनकी लगातार शिकायते हो रही थी, लेकिन उनका कुछ नहीं हुआ, लेकिन अचानक से राजभवन द्वारा आदेश जो जारी किया गया है। उसे देखकर हर कोई हैरत में पड़ गया। इसके बाद से विवि में तरह-तरह की चर्चाओं ने जोर पकड़ रखा है।

