Tuesday, March 31, 2026
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टोल ठेका आय के नाम पर कैंट बोर्ड का रोड ‘होल्डअप’

  • बोर्ड सदस्यों से कोई उम्मीद नहीं, कैंट विधायक पर ही टिकी है शहर की उम्मीद
  • बोर्ड के उन सदस्यों की भूमिका से पर्दा उठे जिनकी निष्ठा ठेकेदार के प्रति
  • रियायत के नाम पर दी गयी छूटों की सीईओ से जांच की उम्मीद

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: टोल ठेके के नाम पर कैंट बोर्ड ने जिस प्रकार से अनाधिकृत सड़कों पर ठेकेदार को वसूली की खुली छूट दे दी है उसके चलते बोर्ड सदस्यों से तो अब कोई उम्मीद नहीं। रियायत के लिए अब लोगों की उम्मीद पूरी तरह से कैंट विधायक पर टिकी हुई है।

मवाना रोड के टोल नॉके पर जिस प्रकार से निगम की सड़क पर वसूली की जा रही है वो किसी भी प्रकार से रोड होल्डअप से कम नहीं। इसी प्रकार जिन सड़कों पर पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता टोल वसूली पर नाराजगी भरा पत्र सीईओ कैंट को लिख चुके हैं उस पर भी टोल वसूली को लोग रोड होल्डअप ही मान रहे हैं।

टोल को लेकर अब तक जिस प्रकार से तनातनी रही है उसको लेकर सबसे ज्यादा सवाल बोर्ड के भाजपाई सदस्यों की भूमिका पर उठाए जा रहे हैं।

ये साफ हो चुका है कि रुड़की रोड से मवाना रोड और दिल्ली रोड की सड़क प्रदेश के सार्वजनिक निर्माण विभाग की है। इसकी पुष्टि पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता के सीईओ कैंट को लिखे पत्र में हो चुकी है। इस सड़क का रखरखाव हमेशा पीडब्ल्यूडी करती है।

कभी भी कैंट बोर्ड ने इसका रखरखाव नहीं किया है। इसकी पुष्टि के बाद भी टोल की वसूली किस आधार पर कैंट बोर्ड कर रहा है। टोल ठेकेदार को जिला के जिस बडे अधिकारी का संरक्षण हासिल था और जिसके इशारे पर अब तक तमाम राहत भरी राहे उस अधिकारी के इशारे पर ठेकेदार के लिए तैयार की गयी, उक्त अधिकारी को तो यहां से सीएम ने चलता कर दिया है।

अब सवाल उठता है कि कैंट बोर्ड प्रशासन अब किस के प्रेशर या फिर बोर्ड के सदस्य के प्रेशर पर काम कर रहा है। इस पर से पर्दा उठना बोर्ड के लिए भी जरूरी है। टोल ठेके में अब तक तमाम खामियां हुई हैं। इनकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कैंट बोर्ड के अध्यक्ष व सीईओ कैंट को हाईकोर्ट में खडे होकर सॉरी तक बोलना पड़ा। यह सब ठेकेदार की कारगुजारियों के कारण ही हुआ।

अब सवाल उठता है कि ऐसी नौबत क्यों आयी। बोर्ड के किस सदस्यों व कर्मचारियों की कारगुजारियों से कैंट बोर्ड के दोनों सर्वोच्च पदस्थ अधिकारियों को सॉरी बोलना पड़ा इसका खुलासा तो बनता है।

विधायक बोले-जनहित सर्वोपरि

कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है। उनके लिए कैंट की जनता का हित सर्वोपरि है। वह पहले ही दिन से टोल के ठेके का विरोध कर रहे हैं। मवाना रोड दिल्ली रोड व रुड़की रोड पर टोल वसूली एकदम गलत है।

सदस्य बोर्ड या फिर ठेकेदार के साथ

सवाल पूछा जा रहा है कि कैंट बोर्ड के सदस्य खासतौर से वो सदस्य जो खुलकर ठेकेदार की पैरवी में उतरे हुए हैं वो बोर्ड के प्रति जवाबदेह है या फिर ठेकेदार के प्रति। गाहे-बगाहे ठेकेदार को राहत की नयी-नयी स्कीमें लाने वाले बोर्ड के सदस्य एक बार भी ठेकेदार पर बजाय से रिकबरी पर गंभीर नजर नहीं आते।

रेवेन्यू सेक्शन की रिपोर्ट संदेह के घेरे में

कैंट बोर्ड के रेवेन्यू सेक्शन की रिपोर्ट व भूमिका भी टोल ठेके को लेकर पूरी तरह से संदेह के घेरे में है। अब तक ठेकेदार को जितनी भी राहत पहुंचायी गयी है और कैंट बोर्ड के खजाने को जितना भी राजस्व नुकसान हुआ है उसका आधार रेवेन्यू सेक्शन की रिपोर्ट ही बनी है। जो भी निर्णय बोर्ड में लिया जाता है, उसका आधार रेवेन्यू सेक्शन की रिपोर्ट ही होती हैं।

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