Monday, April 13, 2026
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मालवाहक वाहन बनीं रोडवेज, अनुबंधित बसें

  • बसों में अवैध रूप से ढोये जा रहे माल के जरिये हर दिन लाखों रुपये जीएसटी की होती है चोरी
  • यात्रियों होने वाली असुविधा से चालक-परिचालकों को नहीं कोई सरोकार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: रोडवेज विभाग भले ही हर साल करोड़ों के घाटे में जाए, लेकिन इनको चलाने वाले चालक-परिचालकों में बहुत से ऐसे हैं, जिनकी अवैध रूप से माल ढुलाई करके मोटी कमाई हो रही है। ये अलग बात है कि उनके इस कदम से एक ओर ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को घाटा उठाना पड़ता है, वहीं हर दिन लाखों रुपये जीएसटी की चोरी भी होती है।
महानगर में तीन डिपो हैं, जिनमें मेरठ डिपो और सोहराब गेट डिपो से परिवहन निगम और भैंसाली डिपो से अनुबंधित बसों का संचालन किया जाता है।

मेरठ परिक्षेत्र की अगर बात की जाए तो विभाग का हर साल करोड़ों रुपये का घाटा उठाना पड़ता है। एक ओर निगम लगातार घाटे में चल रहा है, वहीं इनको चलाने वाले चालक-परिचालकों का एक वर्ग ऐसा भी है, जिसे न तो विभाग को होने वाले घाटे की कोई परवाह है और न ही माल ढोने के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया से यात्रियों को होने वाली परेशानियों से कोई सरोकार है। इन तीनों डिपों से चलने वाली बसों में कई के चालक-परिचालक ने इन्हें मालवाहक वाहन बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी है।

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बताया गया है कि रोडवेज और अनुबंधित बसों के चालक-परिचालक अपनी जेब भरने के लालच में बसों की डिग्गी और सीटों के नीचे बिना बुक किए माल भर लेते हैं। अपने इस अवैध काम को अंजाम देने के लिए उन्होंने महानगर में कई पॉइंट बना रखे हैं। जहां पहले से ही व्यापारी अपना सामान लेकर पहुंच जाते हैं और सामान को यात्रियों को होने वाली असुविधा का कोई ख्याल किए बगैर सीटों के नीचे और ऊपर जल्दी-जल्दी में भरते देखे जा सकते हैं।

बसों को रोककर अवैध माल ढोने के लिए जिन स्थानों का अधिकांश तौर पर प्रयोग किया जाता है, उनमें जली कोठी चौराहा, मेट्रो प्लाजा, ईदगाह चौपला, रिठानी टीवी चौपला गांधी आश्रम, जीआईसी चौराहा, तेजगढ़ी चौराहा, हापुड़ रोड और गढ़ रोड समेत कई दर्जन स्थान शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि इनमें से अधिकतर स्थान संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने आज तक इस और गंभीर होकर कोई ध्यान नहीं दिया है।

इस मामले में मेरठ के ट्रांसपोर्टरों में पुलिस प्रशासन के साथ-साथ कर से जुड़े विभागों के अधिकारियों से शिकायत की है, वहीं परिवहन विभाग के अधिकारियों से भी मिलकर अपनी शिकायत दर्ज करा चुके हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि रोडवेज बसों में यात्रियों से ज्यादा माल ढुलाई होने से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। शिकायत के बाद भी इस पर लगाम नहीं लग रही है। बताया गया है कि यह काम सुबह सवेरे ज्यादा होता है, जिस समय अधिकारी अपने घरों में सोये रहते हैं।

इस अवैध माल ढुलाई से हर दिन लाखों रुपये के टैक्स की चोरी किए जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। यह स्थिति तब है जबकि इस मामले में एमडी स्तर से एक एडवाइजरी पूर्व में ही जारी की जा चुकी है। जिसमें बताया गया कि रूट पर निरीक्षण और शिकायतों में यह बात सामने आ चुकी है कि निगम की बसों में कोरियर पार्सल सेवा के लिए अधिकृत फर्म द्वारा बुक भार अथवा परिचालक द्वारा बुक भार के साथ उसका मालिक यात्रारत नहीं रहता है।

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इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि माल व्यवसायिक है या घरेलू प्रयोग के लिए ले जाया जा रहा है। एमडी की एडवाइजरी के अनुसार किसी भी प्रकार का अनबुक्ड सामान बसों में ले जाने, सामान की टिकट उसके वास्तविक किराये से कम की बनाने, बिना मालिक के सामान एक स्थान से दूसरे स्थान पर ढोने और भ्रष्टाचार करते हुए यात्रियों को परेशान करने पर डिपो एआरएम, स्टेशन प्रभारी और परिचालक पर कार्रवाई की जाएगी। भार स्वामी की अनुपस्थिति में भार को बस डिपो के वरिष्ठ केंद्र प्रभारी/केंद्र प्रभारी के पास जमा कराकर भार स्वामी के सुपुर्द किया जाएगा, लेकिन इस पर कितना अमल होता है, यह किसी से छिपा नहीं है।

ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन मेरठ के पदाधिकारी अध्यक्ष गौरव शर्मा और महामंत्री दीपक गांधी का कहना है कि उनके नेतृत्व में ट्रांसपोर्ट व्यवसायी एक जुलाई और 20 फरवरी 2022 को आर टीओ प्रवर्तन से मिले और उन्हें ट्रांसपोटर को आ रही समस्या के विषय में अवगत कराया था। उन्हें बताया गया कि बसों के जरिये ट्रांसपोटरों के माल का परिवहन किया जा रहा है, जिसे ट्रांसपोर्ट को काफी नुकसान हो रहा है। अधिकारियों से मांग की गई कि बसों में ट्रांसपोटरों के माल की ढुलाई पर रोक लगाने और सख्त कार्रवाई की जाए। लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है।

परिवहन निगम और अनुबंधित बसों में अवैध माल की ढुलाई की शिकायतों पर नियंत्रण के लिए टीआई को लगाया गया है। जिन्हें बसों में बिना टिकट यात्रा के साथ-साथ अवैध रूप से माल ले जाने के मामलों को देखने का दायित्व भी दिया गया है। इसके लिए एक टीम मुख्यालय की लगाई गई है, जबकि तीन टीम हर समय चेकिंग के काम में लगी रहती है। इसके अलावा सभी एआरएम और केन्द्र प्रभारियों को भी बिना बुक किए माल ले जाने पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगर ऐसा कोई मामला पकड़ा जाता है, तो संबंधित चालक-परिचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। -केके शर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, मेरठ परिक्षेत्र उप्र परिवहन निगम

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