- पीएम का रैपिड रेल का प्रोजेक्ट हो सकता है डिले, किसान लेंगे मोर्चा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: परिवहन विभाग की वर्कशॉप शिफ्ट करने पर विवाद खड़ा हो सकता हैं। क्योंकि मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने जो जमीन शताब्दीनगर में देने की बात कहीं है, वो विवादित है। वर्तमान में उस जमीन पर किसान काबिज है। जब भी जमीन पर कब्जा लेने की बात होगी, तभी बड़ा विवाद पैदा हो सकता है।
क्योंकि शताब्दीनगर की जमीन को लेकर किसान लंबे समय से आंदोलित है, जिसे प्राधिकरण किसानों से मुक्त नहीं करा पाये हैं। ऐसे में कोई भी बवाल हो सकता है, इसलिए एमडीए भी इसमें हाथ डालने से हमेशा डरता रहा है। एमडीए भैंसाली रोडवेज वर्कशॉप के लिए शताब्दीनगर सेक्टर-7 में जमीन दे रहा है।
सेक्टर-6 से 11 तक शताब्दीनगर की जमीन पर किसानों ने एमडीए को कब्जा नहीं दिया है। सेक्टर-7 में एमडीए ने भैंसाली रोडवेज वर्कशॉप के लिए जमीन देने के लिए हामी भर दी।
हालांकि एमडीए जमीन देने को तैयार है, एमडीए इसमें कहीं अवरोध पैदा नहीं कर रहा है, लेकिन जिस जमीन को एमडीए दे रहा है, वह विवादित है। इस जमीन पर जब भी कब्जा लिया जाएगा, तभी विवाद पैदा हो सकता है।
इस बात को एमडीए के अधिकारी भी जानते हैं, फिर विवादित जमीन भैंसाली रोडवेज वर्कशॉप के लिए क्यों दी जा रही है। दरअसल, भैंसाली रोडवेज वर्कशॉप में एनसीआरटीसी स्टेशन बना रहा है। इसके बदले में एनसीआरटीसी जमीन खरीदकर भैंसाली रोडवेज को दे रहा है।
यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, इसमें इस जमीन को लेकर रुकावट पैदा हो सकती है। एक दिन भी काम रुकने का सीधा मतलब है, प्रोजेक्ट पीछे खिसक सकता है। किसान नेता विजयपाल घोपला का कहना है कि किसान जिस जमीन पर काबिज है, उस पर कब्जा नहीं छोड़ेंगे।
कब्जा तभी दिया जा सकता है, जब किसानों को नई अधिग्रहण नीति से मुआवजा दिया जाएगा। यह भी महत्वपूर्ण तथ्य है कि जमीन को लेकर फिर टकराव के हालात बन सकता है। किसान व प्रशासन इसको लेकर फिर से आमने-सामने आ सकते हैं।
भैंसाली रोडवेज वर्कशॉप शताब्दीनगर में कैसे शिफ्ट होगी, इसको लेकर शंकाएं खड़ी हो गई है। इनका समाधान कैसे होगा? इसको लेकर एमडीए के अधिकारियों को किसानों से सीधे संवाद करना होगा, तभी इसमें कोई निष्कर्ष निकल सकता है।
अन्यथा प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट रैपिड रेल को दिक्कत हो सकती है। क्योंकि जब तक भैंसाली रोडवेज को वर्कशॉप की जमीन नहीं मिलेगी, तब तक वो वर्कशॉप की जमीन को खाली नहीं करेंगे। इसलिए इस मामले में विवाद लंबा भी खींच सकता है, जो प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए बड़ा झटका हो सकता है।

