जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पूर्व भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के मौजूदा शेड्यूल पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि लगातार आयोजित हो रहे बड़े आईसीसी टूर्नामेंट अपनी पहचान और प्रीमियम वैल्यू खोते जा रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका में जारी एसए20 लीग के दौरान कमेंट्री कर रहे उथप्पा ने मीडिया से बातचीत में क्रिकेट प्रशासन को इस पर गंभीरता से सोचने की सलाह दी।
आईसीसी टूर्नामेंट्स की ‘नवीनता’ हो रही खत्म
डरबन में बातचीत के दौरान उथप्पा ने कहा कि आईसीसी चैंपियनशिप्स का लगभग हर साल आयोजित होना दर्शकों और खिलाड़ियों—दोनों के लिए उनका आकर्षण कम कर रहा है। उनके मुताबिक, “अब हालात ऐसे हैं कि हर साल कोई न कोई आईसीसी टूर्नामेंट होता है। इससे उसका महत्व घट रहा है। टूर्नामेंट्स के बीच अंतराल होना जरूरी है, ताकि खिलाड़ी और दर्शक दोनों उसके लिए उत्साहित रहें।”
उथप्पा ने जोर देते हुए कहा कि किसी भी बड़े इवेंट की पहचान उसकी दुर्लभता और खास होने से बनती है, लेकिन लगातार आयोजन से यह भावना कमजोर हो रही है।
कम समय में चार बड़े आईसीसी इवेंट
पिछले करीब डेढ़ साल में आईसीसी कैलेंडर में चार बड़े टूर्नामेंट शामिल किए गए हैं। इनमें सितंबर–नवंबर 2025 में महिला वनडे विश्व कप, फरवरी–मार्च 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी, जून 2025 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल और फरवरी–मार्च 2026 में पुरुष टी20 विश्व कप शामिल हैं। उथप्पा का मानना है कि इतने कम अंतराल में इतने बड़े इवेंट्स कराने से उनका ‘प्रीमियम इफेक्ट’ कमजोर पड़ता है और वे सामान्य टूर्नामेंट जैसे लगने लगते हैं।
‘हर साल ICC चैंपियनशिप नहीं होनी चाहिए’
क्रिकेट प्रशासन को आईना दिखाते हुए उथप्पा ने कहा, “हमें यह समझने की जरूरत है कि खेल किस दिशा में जा रहा है। हर साल आईसीसी चैंपियनशिप कराना सही नहीं है। यह एक कठिन सच है, लेकिन प्रशासकों को इसे स्वीकार करना होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती फ्रेंचाइजी लीग्स और पहले से ही व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर के बीच आईसीसी टूर्नामेंट्स की विशिष्टता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। उथप्पा के इस बयान के बाद क्रिकेट जगत में आईसीसी के भविष्य के शेड्यूल और टूर्नामेंट्स की अहमियत को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना है।

