Tuesday, May 21, 2024
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शासक और शेर

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कंफ्यूशियस और उनके शिष्यों का जीवन सुरक्षित नहीं था। उनके ज्ञान और सत्यप्रियता के कारण ऐसे राजनैतिक और धार्मिक लोग उनसे ईर्ष्या रखते थे, जो जनता को बेवकूफ बनाकर उनका शोषण करते थे। वे उन्हें हानि पहुंचाने की फिराक में रहते थे। कंफ्यूशियस और उनके शिष्य एक प्रांत से दूसरे प्रांत, बीहड़, जंगल आदि में भटकते रहते थे।

वे ऐसा इसलिए नहीं करते थे कि उन्हें अपना जीवन प्रिय था; वे सर्वजनहित की खातिर अपने जीवन की रक्षा करते थे। वे जानते थे कि उनका जीवन अनमोल था। एक बार वे एक घने जंगल में विचरण कर रहे थे। वहां उन्होंने एक स्त्री को विलाप करते हुए सुना। वे उसके पास गए और उन्होंने देखा कि वह किसी व्यक्ति के क्षत-विक्षत शव के समीप बैठी रो रही थी।

कंफ्यूशियस ने उससे पूछा कि वह व्यक्ति कौन था और उसकी ऐसी दशा कैसे हुई। स्त्री ने उसे बताया कि मृतक उसका पति था, जिसे शेर ने अपना शिकार बना लिया था। इससे पहले शेर उसके पिता को भी अपना शिकार बना चुका था। कंफ्यूशियस ने उससे पूछा, ‘यदि तुम्हारे प्राणों को यहां इतना संकट है, तो तुम लोग किसी सुरक्षित स्थान पर जाकर क्यों नहीं रहते हो?’

स्त्री ने उत्तर दिया, ‘क्योंकि यह जंगल सभ्य समाज से बेहतर है। यहां कोई क्रूर और भ्रष्टाचारी शासक नहीं है।’ कंफ्यूशियस ने अपने शिष्यों से कहा, ‘बच्चों, यह स्त्री सत्य कहती है। अपनी प्रजा से अन्याय और उस पर अत्याचार करने वाले शासकों के राज्य में रहने से अच्छा है कि जंगल में हिंसक जानवरों के बीच रहा जाए।’


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