Saturday, May 2, 2026
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रूस-अमेरिका टकराव के रास्ते पर!

Samvad 1


ashok bhatiyaरूस के लड़ाकू विमान से मंगलवार को अमेरिका का मानवरहित निगरानी ड्रोन टकरा गया था। ये टक्कर ब्लैक सी के ऊपर हुई थी जिसके बाद से दोनों देशों बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। अब अमेरिका के रक्षा सचिव लॉयड आॅस्टिन ने बुधवार को बयान जारी करते हुए कहा कि जहां भी अंतरराष्ट्रीय कानून की अनुमति होगी, अमेरिकी विमान वहां उड़ेंगे। अमेरिका के रक्षा सचिव लॉयड आॅस्टिन ने रूस को चेतावनी दी कि उसके जेट की वजह से अमेरिकी ड्रोन मार गिराया गया। इसके बाद वो आगे से सावधानीपूर्वक काम करें। रक्षा सचिव लॉयड आॅस्टिन ने ये बयान ब्लैक सी के ऊपर ड्रोन वाले मामले के तुरंत बाद घटना के बारे में रूसी समकक्ष सर्गेई शोइगु के साथ फोन पर बात की। दो रूसी लड़ाकू विमान की वजह से मानवरहित अमेरिकी निगरानी ड्रोन क्षतिग्रस्त हो गया, जिसमें ड्रोन के प्रोपेलर को नुकसान पहुंचा। वहीं टकराने के तुरंत बाद अमेरिकी निगरानी ड्रोन नीचे के पानी में गिर गया। इस घटना के बाद अमेरिका ने इसे लापरवाह और अनप्रोफेशनल करार दिया, जबकी रूस ने अमेरिका के आरोपों का खंडन करते हुए इनकार किया और अमेरिका पर ही क्षेत्र में गलत धारणा के साथ उड़ान भरने का आरोप लगाया।

दरअसल ये दुर्घटना तो छोटी थी और इंटरनेशनल एयरस्पेस में हुआ था। हम अनुमान भी लगाएं कि अगर ये इंटरनेशनल एयरस्पेस में नहीं होता या इंटरनेशनल वॉटर्स के ऊपर नहीं होता तो क्या होता। इसी प्रकार की दुर्घटनाएं दुनिया को युद्ध के कगार पर ले आती हैं। अगर आपको याद हो कि एक दुर्घटना ही थी, जिससे फर्स्ट वर्ल्ड वॉर की शुरुआत हुई थी। इस तरह की दुर्घटनाओं को हम ये नहीं कह सकते हैं होगी ही नहीं, या ऐसी आशंकाएं निर्मूल हैं, ऐसी होती रहेंगी। सवाल है कि दोनों देश कैसे रिएक्ट करती हैं।

रूस ने अपनी तरफ से कहा है कि यह उतनी सीरियस घटना नहीं है, लेकिन अमेरिका इसको सीरियस घटना मान रहा है। ऐसी दुर्घटनाओं का इतिहास भी रहा है। जैसे अगर 2015 में हम देखें तो सीरिया तुर्की के बॉर्डर पर एक रूसी सिविलियन एयरक्राफ्ट को गिरा दिया गया था। उस समय तुर्की चूंकि नाटो का सदस्य है तो रूस में कोई लड़ाई जैसी बात नहीं हुई। लेकिन अभी विश्व एक ऐसे मुहाने पर है जहां युद्ध की आशंका बहुत ज्यादा है, खासकर रूस और अमेरिका का आमने-सामने आना एक बहुत बड़ी घटना हो सकती थी।

मान लीजिए इसमें 16 हार्पून मिसाइल होती जो जेनरली अनमैन्ड एरियल वीकल कैरी करते हैं तो क्या होता। दुर्घटनाओं पर अगर ध्यान न दिया जाए, अगर सिर्फ इस घटना पर ही ध्यान दिया जाए तो ये एक बहुत बड़ी घटना है। लेकिन जैसे कि अनुमान लगाया जा रहे हैं, अमेरिका प्रोटेस्ट कर रहा है। उनके एम्बेसडर्स को बुलाया। लेकिन अब उनके एम्बेसडर्स ने भी कहा कि ये क्रीमिया की तरफ बढ़ रहा था। उन्होंने ये नहीं कहा कि उनको गिराया है।

आप समझ सकते हैं कि किसी भी फाइटर प्लेन के लिए बड़ा आसान होता है कि एक मिसाइल दाग दो, वो गिर जाएगा। कोई भी आॅब्जेक्ट हो। ये अमेरिका में चीनी स्पाई बैलून के लिए अमेरिकन्स ने किया है। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने उसको हिट किया और उसका प्रोपेलर तोड़ा। यानी वो भी कहेंगे कि ऐक्सिडेंट था। लेकिन ये एक सीरियस घटना है। जिसे हमें नजरअन्दाज नहीं करना चाहिए।

वैसे इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। असल में ये जो घटना भी अगर बहुत ध्यान से देखें तो रूस ने क्या किया है? रूस ने उनको दिखा दिया कि हम आप को आॅब्जर्व कर रहे हैं। आप ये मत समझें कि आप सबसे शातिर हैं सर्विलांस के गेम में, इंटरसेप्शन के गेम में या कम्युनिकेशन के गेम में। हार देश एक दूसरे पर नजर रख रहे हैं। ये उसका पहला आॅब्जेक्टिव था।

यूक्रेन को जितनी ताकत मिली है आज, खासकर इन्टेलिजन्स के लिए, वो अमेरिका से या नाटो से या ऐसे देशों से मिली है जिसके चलते वो रूस पर काउन्टर अटैक कर रहा है। पूरे युद्ध प्रकरण में अगर देखें तो ड्रोन्स का का महत्व बहुत बढ़ गया है। उस लिहाज से हो सकता है कि आगे भी ऐसी घटनाएं हों। अगर इंटरनेशनल वॉटर्स में हुआ तो कोई प्रॉब्लम नहीं है या इंटरनेशनल एयरस्पेस में हुआ तो कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन अगर यही टोही ड्रोन अगर यूक्रेन में टकराया होता अमेरिकी प्लेन से तो शायद चीजें अलग तरह से देखी जाती।

लेकिन इस तरह की चीजें सबको पता है कि रूस भी करता है। अमेरिका भी करता है। इस तरह के इंटरसेप्शन का, इस तरह के कम्युनिकेशन इक्विपमेंट्स का। जब क्रूज मिसाइल या अन्य मिसाइलें छोड़ी जाती हैं जो आजकल रिमोटली कंट्रोल होती हैं उनमें सैटेलाइट्स का और ड्रोन्स का बहुत बड़ा रोल रहता है। उनके रास्ते को, उनकी स्पीड को उनके घुमाव को वो देखते हैं।

वैसे लग रहा है कि दोनों देशों ने संयम से काम लिया है। अब तक बहुत संयम से काम लिया है। लेकिन अमेरिका का नुकसान हुआ है। वो अपनी जनता को दिखाना चाहता है या नाटो को दिखाना चाहता है कि हम प्रोटेस्ट कर रहे हैं। लेकिन दोनों ने संयम से काम लिया। रूस ने तो बिलकुल डाउनप्ले किया है। हालांकि आपने डोमेस्टिक आॅडियंस में रूस ये दिखाएंगा कि देखो हमने अमेरिका का एक ड्रोन गिराया है।

तो उनके लिए एक प्रोपगैंडा वैल्यू अपनी जनता के लिए बहुत होगा। लेकिन दोनों ने इस को डाउनप्ले करने की कोशिश की है। सबसे अच्छी बात है कि ये ऐक्सिडेंट की तरह दिखाया गया है। जो हम सब जानते हैं, एक्सिडेंट नहीं होगा क्योंकि प्रोपेलर को 35 मिनट तक घेर कर उसको गिराना यानी तोड़ना बहुत एडवांस तरीके से किया गया है। ऐसा नहीं लगता है कि ये बात आगे बढ़ेगी।


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