Thursday, March 26, 2026
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जंग खा रहे डाकघर के लेटर बॉक्स

  • उतार-चढ़ाव के बावजूद इतना विश्वास कोई और संस्था आज तक नहीं कर सकी अर्जित

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: डाकिया डाक लाया। यह गाना 1977 के दशक में सभी की जुबान पर था । यह वो दौर था, जब आम आदमी पोस्टमैन पर भरोसा करता था। तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद इतना विश्वास कोई और संस्था आज तक अर्जित नहीं कर सकी। उस वक्त लोग पत्रों के माध्यम से ही एक-दूसरे से वातार्लाप करते थे। एक-दूसरे को पत्र लिख कर लाल रंग के पोस्ट बॉक्स में डाल कर आते और जवाब आने का इंतजार करते थे। वहीं कई बड़ी कोठियों में दरवाजे पर लेटर बॉक्स बना होता है। जिसमें पोस्टमैन पत्र डालकर जाता था और वो शाम को खुलता था।

धीरे-धीरे वक्त बदला और इसकी जगह डिजिटल वाट्सऐप, इंस्टाग्राम ,फेसबुक जैसी ऐप ने ले ली जिससे अपनों से बात करना महज कुछ सेकंड की दूरी भर का रह गया। आधुनिकता और टेक्नोलॉजी ने लेटर बॉक्स की जगह ले ली। बावजूद इसके अब भी शहर में कई जगह पोस्ट बॉक्स लगे हुए हैं पर उनकी जर्जर हालत किसी से छुपी नही है। किसी में जंग लग गया है, किसी का रंग उड़ गया है तो कोई टूटा हुआ है।

वर्तमान में लोगों को भी पोस्ट आॅफिस और लेटर बॉक्स सिर्फ रक्षाबंधन, तीज-त्योहार पर राखी भेजने के लिए ही याद आते हैं। इस कारणवश शहरों में कई जगह से पोस्ट बॉक्स हटा भी दिए गए हैं और मुख्य जगहों पर ही लेटर बॉक्स लगे हैं जिसमें डाक घर, उप डाक घर, सरकारी कार्यालय आदि शामिल हैं। आज के समय में डाकघरों में सरकारी योजनाएं, आरडी और बचत खातों का मुख्य काम रह गया है।

लोगों की छूटी आदत

लेटर बॉक्स की इस दुर्दशा के जिम्मेदार आम नागरिक भी हैं। जब से वाट्सऐप और डिजिटलाइजेशन का युग आया है तब से युवा हो या बुजुर्ग सब ही डिजिटल माध्यम से वीडियो मैसेज कॉलिंग का प्रयोग करने लगे। उस चिट्ठी वाले दौर को भूल सब आगे निकल गये। पोस्टमैन राम सिंह बताते हैं कि उनको इस नौकरी मे 40 साल हो गये हैं। पहले इस काम में मन लगता था, लोग उनकी राह देखते थे आवभगत करते थे, लेकिन आज कोई राह देखने वाला नहीं, अब सिर्फ नौकरी की खानापूर्ति कर रहे हैं।

डीटीडीसी ने डाला असर

डिजिटलाइजेशन के आलावा डाकघर पर डीटीडीसी ने भी पिछले कुछ सालों में असर डाला है। डीटीडीसी एक प्राइवेट कोरियर कंपनी है, जिसका काम पार्सल पहुंचाना है।हालांकि यह सरकारी डाक से महंगा पड़ता है, परन्तु लोगों के सरकारी डाक घर पर बनते अविश्वास के कारण आज यह ज्यादा प्रचलन में है। प्रवर अधीक्षक डाकघर अनुराग निखारे बताते है कि भारतीय डाक विभाग से सामान भेजना प्राइवेट कोरियर से कहीं सस्ता है। भारतीय डाक सेवा भारत के सभी शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध है जबकि कोरियर कंपनी मात्र शहरी क्षेत्र तक ही सीमित है। इसके अतिरिक्त भारत के सभी सरकारी कार्यालयों व संस्थानों में भारतीय डाक सेवा का ही उपयोग किया जाता है।

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