- नकारात्मक सोच पर सकारात्मक विजय प्राप्त करेगी ये फिल्म
- ये फिल्म समाज को दशा—दिशा देने का काम करेगी: राज्यपाल
जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: यूं तो केंन्द्र व प्रदेश की सरकारें बेटी बचाओं बेटी पढाओं के अभियानों को चलाकर करोडों रूपये पानी की तरह बहा रही हैं वही अब सरकार की इन योजनाओं को एक संत की बेटी ने पंख लगाते हुए। बधाई हो बेटी हुई है नामक फिल्म बनाकर समाज के उन लोगों को जागरूक किया है।
जो बेटे और बेटी में फर्क समझते है। आज के युग में बेटी किसी बेटे से कम नही ये समझाने का काम इस फिल्म के माध्यम किया गया जिसकी कई प्रदेश के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री केंन्द्रीय मंत्री सांसदों ने संत की बेटी की खूब प्रशंसा करते हुए कहां इससे लोगों में जागरूकता आयेगी।

आपको बता दे कि बधाई हो बेटी हुई है…. नारी सशक्तिकरण पर बनाई गई यह अभूतपूर्व फिल्म का टाइटल है। और इस फिल्म का निर्माण करने वाली भी एक सशक्त नारी है देश विदेश में सनातन धर्म प्रचार करने वाले राष्ट्रीय संत डा. स्वामी कुमारन स्वामी की बेटी यामिनी स्वामी है जिन्होंने लेखन निर्देशन व फिल्मांकन तक स्वयं किया है।
जिसको लेकर झारखंड़ के राज्यपाल रमेश बैस ने भी बहुत प्रशंसा कि और कहां बेटियां ही परिवार और समाज को जोड़ने काम करती हैं ये फिल्म नही एक नकारात्मक सोच पर सकारात्मक विजय का काम करेगी इस फिल्म की पटकथा में नारी को सशक्त बनाने के लिए झकझोर कर रख देने वाले संवाद लिखे गए हैं….
एक ऐसी फिल्म जो समाज में बदलाव लाएगी ऐसा मुझे विश्वास है अभी तक विश्व में इस तरह की पटकथा व संवाद देखने को नहीं मिले। वही महामहिम रमेश बैस ने डा.स्वामी कुमारन की बेटी यामिनी स्वामी के इस महान कार्य से देश का समाज उन पर बहुत गौरवान्वित महसूस करगा उक्त फिल्म से समाज में बेटे बेटियों में फर्क करने व समझने वाले लोगों में जागरूकता आयेगी ओर बेटियों को एक समान सम्मान मिलेगा।
जिसके लिए उन्होने डा.स्वामी कुमारन और उनकी बेटी यामिनी स्वामी के उत्कर्ष कार्य के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं दी। साथ ही ईश्वर से प्रार्थना कि यामिनी स्वामी हमेशा समाज को इसी प्रकार सकारात्मक फिल्में दे ताकि लोगों में शांति और प्रेम का संदेश जाये और भेदभाव ना रहे और राष्ट्रीय एकता का संदेश जो इस फिल्म में दिया गया है वह जन जन तक पहुंचे, यही कामना है। जो भी हम फिल्मों के माध्यम से समाज को परोसते हैं लोग उसी प्रकार की जिंदगी को अपनाते हैं अच्छे विचार समाज को बदलते हैं…..

