Saturday, March 14, 2026
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सालौर पलायन प्रकरण: टूटा कुनबा और बिखर गए परिवार

  • प्रशासन से भी नहीं मिला सुरक्षा का भरोसा
  • एक और परिवार ने किया गांव से पलायन

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: सालौर से मुसलसल पलायन कर रहे अनुसूचित जाति के लोगों के चेहरों पर दहशत भी है और गांव छोड़ने का अफसोस भी। दहशत यह है कि विवाद में नामजद खुले घूम रहे पांच आरोपी कब उनका बुरा हश्र कर दें पता नहीं। अफसोस इस बात का है कि गांव में सैकड़ों बरस साथ रहे गुर्जर बिरादरी के प्रबुद्ध लोगों ने भी आगे आकर उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं की। प्रशासन से भी उन्हें सुरक्षा न मिलने की शिकायत है।

शुक्रवार को सालौर दक्षिणी से अनुसूचित जाति के शीशपाल पुत्र चंदन सिंह का परिवार भी पलायन कर गया। गांव से आश्रुपूर्ण नेत्रों से विदा हुए शीशपाल ने कहा कि प्रधानपति बरन सिंह और उसके परिवार के लोगों से तो उसे मारपीट का भय है ही गांव छोड़ने का भी दु:ख है। कहा कि सबसे बड़ा अफसोस यह है कि सप्ताह भर में उनका कुनबा टूटकर बिखर गया सात परिवार गांव छोड़ गए, लेकिन सैकड़ों बरस साथ रहे गुर्जर बिरादरी के प्रबुद्ध लोगों ने आगे आकर उन्हें रोकने की हिम्मत नहीं जुटाई।

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कहा कि अनुसूचित जाति के तमाम लोग प्रधान परिवार के खौफ से गांव छोड़ रहे हैं। पलायन कर चुके आधा दर्जन से अधिक परिवारों में सिर्फ बीर सिंह फौजी और हेमसिंह के पास मुरलीपुर में निजी मकान हैं। छह परिवार घर होने पर भी बेघर हो गए। किराए के घरों में रहकर गुजर करने को मजबूर हैं।

गांव छोड़ चुके पूर्व सैनिक बीर सिंह, विरेंद्र, अमित, सुशील उर्फ लटूर, हेमसिंह, शीशपाल आदि को प्रशासन से भी खास शिकायत है। उनका कहना है कि पुलिस या अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी सुध लेने, सुरक्षा का भरोसा दिलाने की जरूरत नहीं समझी।

फौजी के जाने पर असुरक्षा का आभास

शीशपाल ने बताया कि उनके चाचा फूल सिंह का पुत्र बीर सिंह फौजी निडर और साहसी है। पूरे कुनबे को साथ लेकर चलता था। गत 30 जून को गुर्जरों से भयभीत होकर जब उसने गांव छोड़ा तभी शेष परिवार खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे। विवाद में नामजद खुले घूम रहे प्रवेश, आदित्य, अरुण, अक्षय और सुनील उन्हें भुगत लेने की धमकी दे रहे थे। इसलिए उन्हें यहां जानमाल का खतरा महसूस हो रहा था। बताया कि जल्द ही उनका भाई देशराज और चाचा अतर सिंह भी गांव छोड़ जाएंगे।

क्या है मामला

सालौर दक्षिणी में टीकम गुर्जर और पूर्व सैनिक बीर सिंह दलित के परिवार के बीच रंजिश चल रही है। तीन वर्ष पूर्व बीर सिंह की पत्नी जगवती की जंगल में घास काटते वक्त हत्या कर दी गई थी। जिसमें टीकम का बेटा अनिल जेल गया हुआ है।

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बकौल बीर सिंह तभी से गुर्जर उन पर फैसले का दबाव बना रहे हैं। 28 जून को बीर सिंह का बेटा दीपक कोचिंग से घर लौट रहा था। गांव में मुख्य मार्ग पर सुनील और प्रधानपति बरन सिंह ग्रामींणों संग खड़े बात कर रहे थे। तभी दीपक की साइकिल प्रधानपति से टच हो गई। जिस पर पुन: विवाद बढ़ गया।

सालौर से कुछ परिवारों के पलायन की जानकारी मिली थी। बाद में पता चला कि गांव छोड़ रहे तमाम लोग बाहर काम करते हैं और अपने हिसाब से सैटल हो रहे हैं। सीओ किठौर को मामले की जांच सौंपी गई है। -केशव मिश्र, एसपी देहात

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