Tuesday, April 14, 2026
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मझवार आरक्षण पर घड़ियाली आंसू ना बहाये समाजवादी पार्टी: डॉ संजय कुमार निषाद

  • जातिगत जनगणना होनी चाहिये, किन्तु विसंगतियों के दूर होने के बाद।
  • मंत्री पद का लालच नहीं, समाज हित के लिए सभी सुखों का त्याग करने को तैयार।
  • अखिलेश शासनकाल में बेकसूर निषादों पर चलाई गई गोलियां।
  • निषादों की चिंता ना करें पार्टियां, निषाद पार्टी और डॉ संजय उनके लिए दिन रात कार्यरत।

जनवाणी ब्यूरो |

लखनऊ: मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा जातिगत जनगणना पर राष्ट्रीय अध्यक्ष, निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) एवं कैबिनेट मंत्री (मत्स्य विभाग) उ०प्र० सरकार डॉ संजय कुमार निषाद से पूछी गई। इस पर मंत्री डॉ संजय कुमार निषाद का कहना है निषाद पार्टी का गठन ही सामाजिक समरसता के लिए किया गया है, उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी शुरू से ही जातिगत जनगणना के पक्षधर में रही है बस जातियों की विसंगतियों को दूर करने के बाद ही जातिगत जनगणना होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पहले यह तय हो जाना चाहिए कि राष्ट्रपति द्वारा जारी सेंसस मेनुअल 1961 के आधार पर मछुआ/मझवार समाज अनुसूचित का हकदार है किंतु पूर्व की सपा/बसपा/कांग्रेस की सरकार द्वारा मछुआ समाज को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया है, और पूर्व की सरकारों ने अपने केवल एक वर्ग विशेष का ध्यान और उत्थान करने लिए मझवार आरक्षण के नाम पर मछुआ समाज को फुटबॉल की तरह समझकर बरगलाने का कार्य किया और आज बिहार राज्य की सरकार भी यही कर रही है उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि बिहार के निषाद/मछुआ समाज को अनुसूचित में गिनने का कार्य करेंगे या फिर पिछड़े वर्ग में क्योंकि जातिगत जनगणना तभी सफल होगी तब संबंधित सभी जातियों को सेन्सस मेनुअल 1961 के आधार पर गिना जाए।

उन्होंने कहा कि 1931 से लेकर 1991 तक मछुआ समाज को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र मिलता रहा है किंतु पूर्व की धोखेबाज सरकारों ने 1991 में मझवार के पुकारू नाम को निकालकर ओबीसी में दाल दिया। मझवार आरक्षण को परिभाषित करने का मामला है ना कि शामिल करने का है किंतु पूर्व की समाजवादी पार्टी/बहुजन समाज पार्टी/ कांग्रेस की सरकार मछुआ समाज का वोट लेने के शामिल करने के नाम पर 30 साल बहला फुसलाकर वोट लेने का कार्य किया, और जब सपा के ही राज्यसभा सांसद विशम्भर निषाद जी मझवार आरक्षण को सदन में उठाते हैं तो समाजवादी के सांसद बॉयकॉट कर देते हैं।

सपा/बसपा के सहयोग से 2004 से 2014 तक केंद्र सरकार चली है दिखाने के लिए तो मझवार आरक्षण का प्रस्ताव दिल्ली भेजा जाता था किंतु बैकडोर से वापस भी मँगवा लिया जाता था। उन्होंने कहा कि सपा जानते हुए भी की राज्य सरकार के पास अधिकार ही नही किसी जाति को अनुसूचित में शामिल करने का तब भी मछुआ आरक्षण पर घड़ियाली आंसू बहाकर आरक्षण देती थी और बसपा कोर्ट से स्टे लेने का कार्य करती थी।

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव जी द्वारा मंत्री पद का कटाक्ष करने पर भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा निषाद पार्टी और निषाद पुत्र कभी किसी मोहमाया और लालच में नही फसते हैं, निषाद पुत्र अपनी जान को जोखिम में डाल कर ना जाने प्रतिदिन कितने लोगों को जीवन दान करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के हित के लिए मंत्री नहीं दुनिया के सभी सुखों का त्याग करने के लिए तैयार हैं, किन्तु पहले अपने समाज को वो विकास की मुख्यधारा से जोड़ ले फिर अखिलेश सवाल पूछेगें की कितने निषाद पुत्रो का उन्होंने अपने 04 शासनकाल में किया।

उन्होंने कहा की सामाजिक हित मे आज वो अखिलेश के शासनकाल में लगे फर्जी 302 का मुकदमा लगाया गया था। 07 जून 2015 को निषाद पार्टी अपने समाज के हक हकूक के लिए रेल रोको आंदोलन कर रही थी, और रेलवे पर केंद्र का अधिकार होता है राज्य सरकार का नही, अगर आप निषाद समाज के पक्षधर थे तो गोली चलवाने का आदेश क्यों दिया? हमारा एक भाई पुलिस फायरिंग में शहीद हो गया, उन्होंने कहा कि अखिलेश समेत सभी नेता निषाद समाज की चिंता करना छोड़ दें उसके लिए निषाद पार्टी और डॉ संजय हैं।

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