नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। आज से श्रावण मास की पवित्र शुरुआत हो रही है, जिसे भगवान शिव को समर्पित सबसे पुण्यकारी और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण महीनों में गिना जाता है। यह पूरा महीना शिव भक्ति, व्रत, पूजन और आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर होता है। हिंदू धर्म में श्रावण मास को “अबूझ मुहूर्त” माना जाता है अर्थात् ऐसा शुभ समय जिसमें किसी भी पूजा, व्रत, धार्मिक अनुष्ठान या शुभ कार्य को बिना किसी विशेष ज्योतिषीय गणना के भी प्रारंभ किया जा सकता है। मान्यता है कि इस मास में भगवान शिव की उपासना अत्यंत फलदायक होती है और उनका आशीर्वाद शीघ्र प्राप्त होता है। इस मास के दौरान श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप, और शिव चालीसा का पाठ करते हैं। खासकर हर सोमवार को ‘श्रावण सोमवार व्रत’ रखा जाता है, जो विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति और वैवाहिक सुख के लिए प्रसिद्ध है। श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा किसी भी दिन, किसी भी समय की जा सकती है।
सावन क्यों खास है?
भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सावन में की गई पूजा विशेष फल देती है।
श्रावण मास में किसी भी दिन, विशेष रूप से सोमवार को, पूजा बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी की जा सकती है।
विशेष रूप से महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और अच्छे पति व सुखमय जीवन की कामना करती हैं।
सावन के पहले दिन का पूजन मुहूर्त
पहला पूजन मुहूर्त: प्रातः 4:16 मिनट से प्रातः 5:04 मिनट तक
दूसरा पूजन मुहूर्त: प्रातः 8:27 मिनट से प्रातः 10 बजकर 06 मिनट तक
तीसरा पूजन मुहूर्त: दोपहर 12:05 मिनट से दोपहर 12: 58 मिनट तक
चौथा मुहूर्त: सायं 7: 22 मिनट से 7:41 मिनट तक
इस अबूझ मुहूर्त में क्या करें?
भगवान शिव का रुद्राभिषेक करें जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और शमीपत्र से।
ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
श्रावण सोमवार व्रत रखें और शिव कथा सुनें।
घर में शांति व समृद्धि के लिए शिव चालीसा, रुद्राष्टक या शिव सहस्त्रनाम का पाठ करें।
दान-पुण्य करें खासकर गरीबों को अन्न, वस्त्र या जलदान करें।
आज के दिन क्या करें?
सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें
शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करें।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करें।
यदि संभव हो तो व्रत रखें।
गरीबों को भोजन व जल का दान करें।
अबूझ मुहूर्त में पूजा करने के लाभ
अबूझ मुहूर्त में की गई पूजा में मुहूर्त दोष नहीं लगता, इसलिए यह ईश्वर तक सीधा पहुंचती है।
विशेष रूप से सावन माह में अबूझ मुहूर्त में भगवान शिव का पूजन करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
नौकरी, विवाह, संतान, सुख-शांति जैसे सांसारिक और आत्मिक इच्छाओं की पूर्ति होती है।
यह समय पूर्व जन्मों के दोष व वर्तमान जीवन के संकटों से मुक्ति दिलाता है
पूजा से वातावरण में सात्त्विक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिससे मानसिक शांति और आत्मिक बल प्राप्त होता है।
यह समय साधना, मंत्रजप, ध्यान और तपस्या के लिए अत्यंत फलदायक होता है।

