Friday, March 13, 2026
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छात्रवृत्ति घोटाला: जांच के फैसले से ‘घोटालेबाजों’ के कान खड़े

  • मेरठ में अल्पसंख्यक स्कूलों कॉलेजों से लेकर मदरसों तक में हुए हैं बड़े घोटाले
  • दीपावली के बाद शुरू होगा जांच अभियान, मेरठ सहित सभी जिलों में होगी जांच

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के नाम पर लाखों करोड़ों रुपये डकारने वाले अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के कई ‘घोटालेबाज’ संचालकों के कान खड़े हो गए हैं। कारण प्रदेश की योगी सरकार ने केन्द्र सरकार की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में गड़बड़ी की शिकायतें मिलने के बाद अब अपनी अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना की जांच कराने का फैसला लिया है।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार योगी सरकार ने वर्ष 2022-23 में प्रदेश के लगभग साढेÞ तीन लाख छात्र-छात्राओं को 220 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति प्रदान की थी। अब दीपावली केबाद मेरठ सहित प्रदेश के सभी जिलों में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति की जांच के लिए अभियान शुरू किया जाएगा।

यह जांच पूरे एक माह तक चलेगी। केन्द्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के निर्देश पर वर्ष 2022-23 में छात्रवृत्ति एंव शुल्क प्रतिपूर्ति के आवेदनों की जो जांच हुई थी उसमें लगभग 14 हजार आवेदक फर्जी पाए गए थे। जिन जिलों में सबसे ज्यादा छात्रवृत्ति बांटी गई उसमें मेरठ जिले का नाम भी शामिल है।

छात्रवृत्ति के नाम पर मेरठ में हुई थी खुली लूट

मेरठ में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के नाम पर कई संचालकों ने खुली लूट मचाई थी। लूट का ख्ोल हजारों या लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में खेला गया। इस लूट में कई मदरसा संचालकों से लेकर कई अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोग वारे के न्यारे हो गए। इसकी शिकायतें भी ऊपर तक हुर्इं। इसके बाद लूट के सूत्रधारों पर जांच भी बैठ गई। कई को जेल की हवा भी खानी पड़ी।

मेरठ शहर के साथ साथ पूरे जिले में कई अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों द्वारा खेले गए इस गंदे खेल में गरीबों के हक मारे गए और खुद की जेंबे भरी गर्इं। मेरठ में लगभग 100 अल्पसंख्यक स्कूलों एवं मदरसों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज की गई जबकि लगभग इतने ही अन्य अल्पसंख्यक स्कूलों और मदरसों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। योगी सरकार द्वारा एक बार फिर से अल्पसंख्क छात्रवृत्ति घोटाले में जांच का फैसला लिए जाने से कई ‘घोटालेबाजों’ की सांसे ऊपर नीचे होनी शुरू हो गई हैं

तो कई के अभी से ही अल्पसंख्यक विभाग के कर्मचारियों से सांठगांठ की चर्चाएं हैं। कुछ अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के संचालकों का कहना है कि जब से छात्रवृत्ति सीधे विद्यार्थियों के खाते में जानी शुरू हुई है तब से वो इस बारे में विस्तार से कुछ भी बताने में असमर्थ हैं।

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