- शहर में नए अल्ट्रासाउंड सेंटरों की अनुमति पर सीएमओ की सख्ती
- आसान नहीं होगा अल्ट्रासाउंड सेंटरों का नवीनीकरण करना
- बगैर नवीनीकरण वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों को स्वास्थ्य विभाग चलने नहीं देगा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोख के कातिलों पर स्वास्थ्य विभाग के मेरठी अफसरों का शिकंजा पूरी तरह से कस गया है। जन्म लेने से पहले पेट में ही कत्ल करने वालों से निपटने के लिए चाहे जो भी कुछ करना पड़े स्वास्थ्य विभाग वो सब करने पर उतारू है। इसका साफ संकेत सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों से साफ है कि कोख के कातिल या तो धंधा बंद करेंगे या फिर शहर छोड़ देंगे। हालांकि कोख के कातिलों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की मुहिम की यदि बात की जाए तो एसीएमओ डा. प्रवीण गौतम का जिक्र किए बगैर यह खबर अधूरी ही रहेगी। कोख के कातिलों के खिलाफ एसीएमओ डा. गौतम ने लंबी और सफल जंग लड़ी व जीती भी है।
जिसके चलते कई अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक तामझाम समेट कर यहां से निकल गए हैं। वहीं, दूसरी ओर इन पर शिकंजा कसने की कवायदों की यदि बात की जाए तो सीएमओ ने जानकारी दी कि अल्ट्रासाउंड सेंटरों की आड़ जो लिंग परीक्षण की घटनाओं पूर्व में इजाफा देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कुछ अल्ट्रासाउंड सेंटरों के नवीनीकरण को लेकर नियम बेहद सख्त कर दिए हैं। नियमों में की गयी इस सख्ती का फायदा यह होगा कि लिंग परीक्षण के मंसूबे रखने वाले या तो अपना अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद ही कर देंगे या फिर वो लिंग परीक्षण का काम छोड़ देंगे।
जहां तक नए लाइसेंस की बात है तो यह प्रक्रिया भी बेहद जटल की जा रही है। फिलहाल नए लाइसेंस जारी करने पर पूरी सख्ती की गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की नजर भी ऐसे अल्ट्रा साउंड सेंटरों पर बनी रहती है पूर्व में जिनकी गतिविधियां संदिग्ध रही हैं या जिन पर कार्रवाई की जा चुकी हैं वो किसी छदम नाम से यदि दोबारा से काम शुरू करते हैं।
आउटर की मार्फत धन वर्षा
जानकारों की मानें तो कोख के कत्ल के काले कारोबार में आमतौर पर हरियाणा तथा अन्य राज्यों के दलाल यानि आउटर मेरठ के अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर नोटों की बारिश कराते रहे हैं। हालांकि साल साल 2021 से अब तक लिंग परीक्षण के काले धंधे में लगे 44 किरदारों को जेल भेजा जा चुका है। इन दिनों स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर से लिंग परीक्षण करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर शिकंजा कसने का काम किया है।
फर्स्ट टाइम एमबीबीएस डाक्टर पर कार्रवाई
इन 44 में सिर्फ एक ही नाम ऐसा है डा. मनीषा रस्तौगी का जो बाकायदा रजिस्टर्ड एमबीबीएस डाक्टर हैं। मेरठ की बात की जाए तो किसी रजिस्टर्ड एमबीबीएस डाक्टर के इस धंधे में पाए जाने से स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी भी खासे चिंतित इसलिए हैं, क्योंकि यह एक बेहद गलत और गंभीर तथा डाक्टरी जैसे पेशे से जुड़े लोगों के लिए शर्मसार करने वाली शुरुआत है।
बाहरी दलालों से जुड़े तार
इस पूरे मामले को जो सबसे गंभीर पहलू है वो यह कि लिंग परीक्षा के शर्मसार करने वाले धंधे में लगे लोगों ने मेरठ में स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के बाद अब अपने कनेक्शन हरियाणा, दिल्ली राजस्थान व मेरठ से बाहरी दलालों से बना लिए हैं। कुछ समय पहले कचहरी स्थित प्रखर अल्ट्रासाउंड सेंटर और एक दिन पहले दौराला क्षेत्र के अल्ट्रा साउंड सेंटर पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के लिंग परीक्षण करने वालों के काम करने के तरीके या कहें स्वास्थ्य विभाग की नजरों से खुद को बचाए रखने की नाकाम कोशिश को बेपर्दा कर दिया है।

लिंग परीक्षण करने वालों के खिलाफ मेरठ में साल 2021 दिसंबर माह से ही पारी की शुरुआत करने वाले एसीएमओ व नोडल अफसर डा. प्रवीण गौतम ने सनसनी खेज खुलासा इसको लेकर किया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के चलते लिंग परीक्षण करने वालों ने मेरठ के दलालों से हाथ छुड़ाकर दूसरे राज्यों के दलालों से हाथ मिला लिया है।
हरियाणा सबसे ज्यादा बदनाम
इंसानियत को शर्मसार करने वाले लिंग परीक्षण के काले धंधे की यदि बात की जाए तो स्वास्थ्य विभाग की नजर में हरियाणा सबसे ज्यादा बदनाम और सबसे आगे हैं। बहारी दलालों से हाथ मिलाने के लिंग परीक्षण करने वालों को दो फायदे हुए पहला तो यह कि मेरठ में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से काफी हद तक बचाने में कामयाब रहे थे, हालांकि यह बात अलग है कि स्वास्थ्य विभाग ने अब इनकी ये बदमाशियां पकड़ ली हैं
और अपने काम करने की तरीके को लेकर भी रणनीति बदल दी है। जिसका नतीजा भी सामने हैं। वहीं, दूसरी ओर लिंग परीक्षण करने वालों को यूपी से बाहर के दलालों से हाथ मिलाने का यह फायदा हुआ कि उन पर अब धन वर्षा होने लगी है। मेरठी दलालों के थ्रू पहले जिस लिंग परीक्षण में उन्हें आठ से 10 हजार तक मिलते थे, वहीं दूसरी ओर हरियाणा के दलालों के थ्रू उसी काम यानि लिंग परीक्षण के उन्हें 40 से 50 हजार तक मिल जाते हैं
और उनका खतरा भी पहले से कम हुआ है। एक बात जो सबसे डराने वाली है वो यह कि अब तक इस धंधे में केवल झोलाछाप ही थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड कोई डाक्टर वो भी महिला डाक्टर पहली बार जेल भेजी गयी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों की मानें तो अब तक लिंग परीक्षण करने वाले 44 को जेल भेजा जा चुका है।
स्वास्थ्य विभाग ने की सख्ती
लिंग परीक्षण के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने काफी सख्ती की है। अब आसानी से अल्ट्रासाउंड सेंटरों का नवीनीकरण नहीं कराया जा सकता। इसके अलावा नया अल्ट्रासाउंड सेंटर खोलने के लिए लाइसेंस आसान नहीं रह गया है। -डा. अखिलेश मोहन, सीएमओ, मेरठ
विभाग का अभियान जारी
मेरठ में स्वास्थ्य विभाग लिंग परीक्षण करने वालों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग की सख्ती के चलते ही लिंग परीक्षण के काले धंधे में शामिल लोगों ने अब बाहरी दलालों के माध्यम से काम शुरू कर दिया है, लेकिन ऐसे लोगों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग लगातार अभियान जारी रखे हैं। -डा. प्रवीण गौतम, एसीएमओ/नोडल अधिकारी

