जनवाणी संवाददाता |
मवाना: जमीन पर फाइनल जजमेंट कराने के नाम पर एसडीएम के पेशकार सुल्हड़ सिंह द्वारा पच्चीस हजार रुपये की रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को तहसील परिसर से रंगेहाथ दबोचने के बाद टीम ने पुलिस को सौंप दिया। किसान की तहरीर पर एंटी करप्शन टीम प्रभारी ने थाने में मुकदमा दर्ज कर बुधवार को संबंधित धाराओं में जेल भेज दिया है।
मवाना तहसील में तैनात एसडीएम कमलेश कुमार गोयल के पेशकार सुल्हड़ सिंह ने फलावदा के गांव नगौरी निवासी सतेंद्र सिंह पुत्र हरि सिंह से काफी समय से आठ बीघा जमीन को लेकर परिवार के सदस्य गुलबीर सिंह से विवाद चला आ रहा है। जिसका मामला तहसील कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन चल रहा है।
19 अक्टूबर को पेशकार सुल्हड़ सिंह ने बहस के लिए तो वही 23 अक्टूबर को मुकदमे में फाइनल जजमेंट के लिए किसान से 25 हजार रुपये की डिमांड कर दी और निर्णय कराने को कहा। किसान सतेंद्र सिंह ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन विभाग के प्रभारी अशोक कुमार से लिखित रूप में की।
मंगलवार को रिश्वत के रुपये देने पहुंचे किसान ने पेशकार सुल्हड़ सिंह को फाइल पर जजमेंट कराने के 25 हजार रुपये सौंप दिए। इसी बीच किसान के साथ तहसील पहुंची एंटी करप्शन टीम प्रभारी अशोक कुमार ने पेशकार सुल्हड़ सिंह को रंगेहाथ रिश्वत के आरोप में पकड़ लिया।
घंटों तक चली पेशकार से पूछताछ के बाद जुर्म कबूल लिया। एंटी करप्शन टीम प्रभारी अशोक कुमार ने सभी कागजी कार्रवाई कर थाने में मुकदमा दर्ज कराकर रिश्वतखोर पेशकार को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने पकडे गए आरोपी पेशकार सुल्हड़ सिंह को बुधवार को संबंधित धाराओं में कोर्ट में पेश किया। जहां मजिस्ट्रेट ने रिश्वतखोर पेशकार को जेल भेज दिया है।
अकेले पेशकार ही निशाना क्यों ?
अधिकारियों के पेशकार और स्टेनो रिश्वत लेते हुए पकड़े जाते है और जेल जाते है। ये जानने की कोशिश किसी भी अधिकारी ने नहीं की कि आखिर आरोपी ने जिस काम के लिये घूस ली है क्या वो काम कराने की ताकत रखता है। क्या वो काम खुद करता या फिर अपने अधिकारी से करवाता।
हर बार बलि का बकरा वही बन जाता है जो रंगेहाथ पकड़ा जाता है। एसडीएम मवाना कमलेश गोयल का पेशकार सुल्हड़ सिंह ने जिस काम के लिये 25 हजार रुपये लिये थे क्या वो खुद आदेश करने वाला था। स्टेनो और पेशकार एक माध्यम होते हैं नंबर दो के पैसों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिये।
एंटी करप्शन ने इस वर्ष एक दर्जन से अधिक घूसखोर कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सभी ने यही बताया था कि वो तो आदेश के बाद पैसा ले रहे थे। अगर आरोपियों का यह दावा सही है तो जिन लोगों के पास पैसा पहुंचाया जाता है उनको जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया जाता है। इस यक्ष प्रश्न का जबाव कोई भी जिम्मेदार अधिकारी देने को तैयार नहीं होता है।

