Tuesday, April 7, 2026
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मिलीभगत से खुलवाई पेट्रोल पंप की सील

  • एक लाख लीटर पेट्रोल निकालने को सील खुलवाने की निगम से मांगी थी अनुमति
  • तीन महीने से नहीं निकला एक लाख लीटर पेट्रोल पीड़ित ने लगाया आरोप
  • बिना लीज की भूमि पर अवैध रूप से पेट्रोल पंप संचालित करने का लगाया आरोप

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कलक्ट्रेट से चंद कदम दूरी पर स्थित पेट्रोल पंप को अवैध रूप से संचालित करने का आरोप लगाया है। पीड़ित शिकायतकर्ता का आरोप है कि बिना लीज एवं मानक के यह पेट्रोल पंप संचालित हो रहा है। जिसकी शिकायत डेढ़ वर्ष पूर्व की तो निगम के अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों के आदेश के दबाव के चलते पेट्रोल पंप पर सील लगा दी। जिसमें पेट्रोल पंप संचालक ने कोर्ट से गुहार लगाई कि उसका करीब एक लाख लीटर पेट्रोल का स्टॉक अभी शेष है।

उसे निकालने की अनुमति दी जाये, कोर्ट ने पेट्रोल पंप संचालक एवं नगर निगम को सशर्त अनुमति दी जाये कि एक लाख लीटर पेट्रोल जो स्टॉक में है। वह ही निकाला जायेगा। नई कोई खरीद या बिक्री पेट्रोल पंप पर नहीं हो सकेगी। पीड़ित का आरोप है कि कोर्ट को गुमराह कर इस तरह का आदेश प्राप्त करने के बाद पेट्रोल पंप संचालक निगम के अधिकारियों की मिलीभगत से धड़ल्ले से पेट्रोल पंप का संचालन कर रहा है।

माधवपुरम निवासी दीपांकर स्वरूप शर्मा ने मंगलवार को नगरायुक्त अमितपाल शर्मा को एक शिकायती पत्र दिया। शिकायती पत्र देते हुये बताया कि कचहरी के मुख्य गेट के निकट एक पेट्रोल पंप करीब 1951 से संचालित होता चला आ रहा है। जिसमें उसको पांच वर्ष के लिये लीज पर अनुमति मिली थी, लेकिन उसके बाद न तो पेट्रोल पंप की भूमि को लीज पर लिया गया और न ही पेट्रोल पंप के संचालन के लिये लाइसेंस रिनुअल कराया गया।

उन्हे इस मामले की जानकारी करीब दो वर्ष पूर्व हुई तो मामले की शिकायत नगर निगम के अधिकारी, डीएम व कमिश्नर एवं शासन में की। जिसके बाद नगर निगम हरकत में आई और पेट्रोल पंप को सील कर दिया गया। जिसके बाद मैसर्स बसंतलाल बैनी प्रसाद द्वारा पार्टनर सरला देवी ईस्टर्न कचहरी रोड के द्वारा मामला हाईकोर्ट में डाल दिया गया। जिसके साथ ही उनके द्वारा पेट्रोल पंप के टेंक में शेष करीब एक लाख लीटर पेट्रोल होने की बात कही और उसे निकालने की सशर्त अनुमति कोर्ट से मांगी।

जिसके बाद कोर्ट ने पेट्रोल पंप पर न कोई खरीद के लिये नया स्टॉक रखने एवं नई बिक्री पर रोक लगा दी। जिसके बाद सहायक नगर आयुक्त के द्वारा जो एक लाख लीटर का स्टॉक था। उसे निकालने एवं उसकी बिक्री के लिये अनुमति दी गई। साथ ही हिदायत दी गई कि नई खरीद एवं पेट्रोल की बिक्री नहीं होगी, यदि उसके बाद भी संचालन होता पाया गया तो वह कोर्ट की अवमानना माना जायेगा,

नगर निगम के सहायक आयुक्त के द्वारा सील को खोल दिया गया। वहीं अब शिकायतकर्ता दीपांकर स्वरूप का आरोप है कि कोर्ट को गुमराह करके इस तरह का आदेश पारित कराया और निगम की मिलीभगत से पेट्रोल पंप का खुलेआम संचालन किया जा रहा है,निगम के अधिकारियों को चाहिए था कि वह एक लाख लीटर पेट्रोल टैंक से निकलवाकर दोबारा से शील लगाकर उसका संचालन बंद करा देते, लेकिन ऐसा नहीं किया।

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