Wednesday, March 25, 2026
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सीसीएसयू में देखें 1857 क्रांति की झलक

  • विवि में बना संग्रहालय विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि इस क्षेत्र की है धरोहर
  • आजादी के आंदोलन का बिगुल क्रांतिधरा से ही बजा था

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: यह गौरव की बात हैं हम ऐसे ऐतिहासिक तथ्यों को एकत्र कर सहेज रहे हैं इतना ही नहीं इसको और अधिक समृद्ध करने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे। सोमवार को विवि कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने मार्च के प्रथम सप्ताह में होने वाले नैक को लेकर विवि के इतिहास विभाग का निरीक्षण किया जहां उन्होंने यह बात कही।

बता दें कि विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में बने सांस्कृतिक धरोहर व स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय में आस-पास के क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजा गया है। इसमें बरनावा से प्राप्त पुरातन सामग्री जिसमें चित्रित घूसर मृदभांड, एनबीपीडब्लू, बाण गंगा से प्राप्त कुषाण कालीन मृदभांड, काकोर से प्राप्त चित्रित घूसर मृदभांड, बामनौली से प्राप्त शुग कालीन मृणमूर्ति का सांचा प्रस्तुत किया गया है।

इसके अतिरिक्त शहजाद राय शोध संस्थान बड़ौत से शोध एवं प्रदर्शनी के लिए एन्टीना सोर्ड, ताम्रकालीन मानव आकृति, आठवीं शताब्दी की बंगाल से प्राप्त ताम्र अभिलेख को भी दर्शाया गया है। यह बहुत ही रोचक है कि एन्टीना सोर्ड एक ताम्र तलवार है जो कि सिनौली से भी प्राप्त हो चुकी है। यह सभी के लिए आकर्षण का केंद्र है। हस्तिनापुर से प्राप्त अवशेषों को भी सांस्कृतिक धरोहर संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया हैं, जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है।

इसके साथ ही स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय भी बनाया गया है। इस संग्रहालय में 1857 की क्रांति की प्रमुख घटनाओं का सजीव चित्रण किया गया हैं, जिससे मेरठ और उसके आसपास के क्षेत्रों में 1857 की क्रांति के बारे में विद्यार्थियों एवं आमजन को जागरुक किया जा सके। स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय में मेरठ के स्वतंत्रता आंदोलन में अभूतपूर्व योगदान देने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों के संबंध में बताया गया है। संग्रहालय मेरठ के 26 स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र उनके संक्षिप्त विवरण के साथ प्रदर्शित किए गए है।

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संग्रहालय में एक दीर्घा नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर बनाई गई है तथा एक दीर्घा चंद्रशेखर आजाद को समर्पित है। इतिहास विभाग निरंतर क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों व अनाम देशभक्तों के कार्यों को सामने लाने का कार्य कर रहा है। इस दिशा में विभाग द्वारा 160 शोध प्रबंध पर कार्य कराया जा चुका है तथा 165 लघु शोध प्रबंध स्वतंत्रता सेनानियों पर हैं जो विभाग की विशिष्टता है। संग्रहालय में प्रवेश करने से पूर्व ही मेरठ की धरोहर को दिखाया गया है।

संग्रहालय में बिल्लेश्वर मंदिर, सरधना का चर्च, नाई धरम सिंह का गुरूद्वारा, शाही ईदगाह जैसे स्मारकों को भी दिखाया गया है। इतिहास विभाग में प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व की एक लैब भी बनायी गई है जिसमें पाषाण काल के औजार, प्राचीन, मध्य, आधुनिक भारत के सिक्के व दूसरी कलाकृतियों का प्रदर्शित किया गया है। विभाग के अध्यक्ष प्रो. विघ्नेश त्यागी ने बताया कि हमारी यह पहल उन क्रांतिकारियों को नमन एवं श्रद्धांजलि है।

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