
आत्मविश्वास मानसिक एवं आध्यात्मिक शक्ति है, जिसके माध्यम से हम महान कार्यों का संपादन कर सकते हैं। स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं, आप ईश्वर में तब तक विश्वास नहीं कर पाएंगे, जब तक आप अपने आप में विश्वास नहीं करते हैं। मनुष्य के पास संसाधन का अथाह भंडार होते हुए भी कुछ नहीं कर पाता है, जब तक उसके अंदर आत्मविश्वास जागृत नहीं होता। दुबलता के दंभ में जीने वाला व्यक्ति अपने आत्मविश्वास के बल पर चमत्कार कर देता है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी। आत्मविश्वास के सहारे आत्मनिर्भता भी बढ़ती है। आत्मविश्वास के लिए हमें स्वयं को जाना आवश्यक है, स्वयं की क्षमता को पहचाना जरूरी है। हमें अपने योग्यता व क्षमता के अनुसार कार्य करना चाहिए।
कभी-कभी हम अपने योग्यता के विपरित कार्य करते हैं, जिसका परिणाम नकारात्मक होता है और इसका प्रभाव हमारे आत्मज्ञान पर पड़ता है, हमारे मनोबल टूटने लगते हैं, जिसके चलते आत्मविश्वास जैसे तत्व हमसे दूर हो जाते हैं। मानव के विभाजित शक्तियों में शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शक्ति है। हमारी शारीरिक, मानसिक शक्तियां तभी कार्य करती है, जब आत्मिक शक्ति पूरी तरह से सक्रिय होती है। आत्मिक शक्ति को हम योग, महापुरुषों के चरित्र का अनुसरण कर के, प्रकृति के समीप जा कर, ईश्वर में आस्था जाकर प्राप्त कर सकते हैं। आत्मविश्वास हमारे कल्पनाओं को पूरी तरह से साकार करने में मदद करती है। आत्मविश्वास से परिपूर्ण व्यक्ति महान कार्यों को पूरा करता है।
प्रस्तुति : अजय प्रताप तिवारी


