
यमन में लाल सांगर के तट पर बसे कॉफी के व्यापार के लिए मशहूर ‘मोचा’ शहर के नाम पर मई के मध्य में बंगाल की खाड़ी में कहर बन कर आए ‘मोचा’ चक्रवात ने भले ही भारत में कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं किया हो-इस साल के पहले समुद्री बवंडर के साथ भारत के तटीय आबादियों पर अब दिसंबर तक ऐसे ही कई खतरे मंडरा रहे हैं। यह जानना जरूरी है कि यह एक महज प्राकृतिक आपदा नहीं है। असल में तेजी से बदल रहे दुनिया के प्राकृतिक मिजाज ने इस तरह के तूफानों की संख्या में इजाफा किया है। जैसे-जैसे समुद्र के जल का तापमान बढ़ेगा,उतने ही अधिक तूफान हमें झेलने होंगे। यह चेतावनी है कि इंसान ने प्रकृति के साथ छेड़छाड़ को नियंत्रित नहीं किया तो साईक्लोंन या बवंडर के चलते भारत के सागर किनारे वालें शहरों में आम लोगों का जीना दूभर हो जाएगा।