Friday, February 20, 2026
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शशि थरूर ने की मोदी सरकार की विदेश नीति की तारीफ या राहुल का विरोध!

 

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कांग्रेस प्रवक्ता टीवी चैनलों पर यूक्रेन से भारतीयों की वापसी के मुद्दे पर सरकार की असफलता गिनाते नहीं थक रहे लेकिन पार्टी सांसद शशि थरूर सरकार की विदेश नीति से गदगद हैं। उन्होंने विदेश मंत्री और उनकी टीम की जमकर तारीफ की है। थरूर ने विदेश मंत्रलय की तरफ से बुलाई गई मीटिंग में शामिल होने के बाद कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी टीम ने एक-एक सवाल का जिस गहराई से जवाब दिया है, वह बेहद प्रशंसनीय है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि विदेश नीति तो ऐसी ही होनी चाहिए। इस मीटिंग में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल थे।

गौरतलब है कि विदेश मंत्रलय ने रूस-यूक्रेन युद्ध से पैदा हुए संकट पर सलाहकार समिति की बैठक बुलाई। बैठक में छह राजनीतिक दलों के नौ सांसदों ने हिस्सा लिया। इन सभी ने मौजूदा संकट से निपटने के लिए सुझाव तो दिए ही, एक-से-बढकर एक सवाल भी दागे जिनका विदेश मंत्रलय ने विस्तृत जवाब दिया। इससे शशि थरूर इतने संतुष्ट हुए कि उन्होंने विदेश मंत्री की तारीफों के पुल बांध दिए। थरूर ने ट्वीट कर कहा, ‘यूक्रेन पर विदेश मंत्रलय की सलाहकार समिति की आज सुबह बुलाई गई बैठक जबर्दस्त रही।

हमारे सवालों और चिंताओं पर विस्तृत और बिल्कुल सटीक जवाबों के लिए डा. एस जयशंकर और उनके सहयोगियों का धन्यवाद।’ थरूर ने मोदी सरकार की विदेश नीति की तारीफ में कसीदे पढ़ डाले। उन्होंने लिखा, विदेश नीति में यही जोश-ओ-खरोश दिखना चाहिए। हमने कई बिंदुओं पर बातचीत की। विदेश मंत्री इसकी जानकारी देंगे। यह शानदार मीटिंग थी। हम सभी एकजुट हैं।’

सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एक बार फिर राहुल गांधी को गुस्सा दिलाने वाला काम कर दिया है। दरअसल शशि थरूर भी कांग्रेस के बागी गुट जी-23 के सदस्य हैं। कपिल सिब्बल की पहल पर और गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में सोनिया गांधी को स्थायी कांग्रेस अध्यक्ष की डिमांड के साथ जो चि_ी लिखी गयी थी, हस्ताक्षर करने वालों में शशि थरूर भी शामिल रहे। जब भी जी-23 ग्रुप की तरफ से कांग्रेस नेतृत्व को कोई सलाह दी जाती है, गांधी परिवार का गुस्सा फौरन फूट पड़ता है। जी-23 के पहले भी शशि थरूर कांग्रेस के उन सीनियर नेताओं में शामिल रहे हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी हमले से परहेज करने का सुझाव दे चुका है।

यह पहली बार नहीं है। इसके पहले भी शशि थरूर, सोनिया गांधी के गुस्से का शिकार हो चुके हैं। भरी मीटिंग में सोनिया गांधी ने एक बार डांट पिलाते हुए कहा था कि वो काफी इधर-उधर करते हैं। शशि थरूर को यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार में विदेश राज्य मंत्री भी बनाया गया था लेकिन अक्सर अपने बयानों के कारण विवादों में रहे और आखिरकार मंत्री पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था।हाल ही में शशि थरूर संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हिंदी में जवाब देने पर आपत्ति जताने को लेकर चर्चा में रहे लेकिन थरूर का वो एक्ट तो राहुल गांधी की लाइन को सूट करता था। राहुल गांधी और शशि थरूर दोनों ही फिलहाल केरल से कांग्रेस के सांसद हैं।

विदेश मंत्रलय की तरफ से यूक्र ेन के मुद्दे पर बुलायी गयी मीटिंग में राहुल गांधी और शशि थरूर दोनों ही मौजूद थे लेकिन बाहर आकर शशि थरूर ने ट्विटर पर जो कुछ लिखा, उसकी राहुल गांधी को तो कतई अपेक्षा नहीं होगी। असल में शशि थरूर ने मोदी सरकार पर लगातार हमले के पाटीर्लाइन से अलग टिप्पणी की है। यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की वापसी को लेकर बुलायी गयी मीटिंग में विदेश मंत्रलय की सलाहकार समिति के 21 सदस्यों में से मीटिंग में छह राजनीतिक दलों के सिर्फ नौ सांसद ही पहुंचे थे और उनमें राहुल गांधी और शशि थरूर भी शामिल थे।

कांग्रेस की तरफ से हिस्सा लेने वाले तीसरे सांसद आनंद शर्मा रहे। शिवसेना सांसद प्रियंका चतुवेर्दी ने भी मीटिंग में हिस्सा लिया था। बाकियों की तरह प्रियंका चतुवेर्दी ने भी विदेश मंत्रलय के प्रजेंटेशन पर सहमति जतायी और जोर देते हुए कहा कि भारतीय छात्रों को वापस लाना हमारी प्राथमिकता है।कांग्रेस ने यूक्र ेन के मसले पर संयुक्त राष्ट्र में मोदी सरकार के स्टैंड का समर्थन किया है लेकिन राहुल गांधी ने सरकार की एडवाइजरी को भ्रमित करने वाला बताया है। साथ ही ये भी कहा है कि सरकार की तरफ से जरूरी कदम उठाने में भी देर की गयी।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला तो अब भी मोदी सरकार की कोशिशों को फेक बता रहे हैं और सीधा आरोप है कि सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही नहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह चुनावी रैलियों में व्यस्त हैं और हमारे बच्चे वहां मुसीबत की घड़ी में संघर्ष कर रहे हैं।विदेश मंत्रलय की मीटिंग में राहुल गांधी ने अपना पसंदीदा मुद्दा चीन और पाकिस्तान के करीब आने का भी उठाया लेकिन ये भी माना कि अभी तो हमारी प्राथमिकता यूक्र ेन में फंसे भारतीय छात्रों को निकालना ही होनी चाहिये।

पहले भी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से यूक्रेन में फंसे छात्रों को लाये जाने के एक्शन प्लान को लेकर सवालिया लहजे में सुझाव भी दिये थे।शशि थरूर की राय से बिलकुल अलग राहुल गांधी ने मीटिंग में आरोप लगाया कि मोदी सरकार की तरफ से छात्रों को निकालने में देरी की गयी और सरकार की तरफ से जारी एडवाइजरी भी भ्रम पैदा करने वाली रही।

यूक्रेन पर विदेश मंत्रलय की मीटिंग के बाद शशि थरूर ने ट्वीट कर कुछ झलकियां पेश की। थरूर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके सहयोगियों को शुक्रि या कहने के साथ ही मीटिंग को जबरदस्त बताया। शशि थरूर के मुताबिक, सदस्यों के सवालों और चिंताओं पर सटीक और विस्तार से जवाब तो मिले ही, कई बिंदुओं पर बात भी हुई।शशि थरूर की तरफ से मोदी सरकार की फारेन पालिसी को लेकर जो सबसे बड़ी बात कही गयी है, वो है, ‘विदेश नीति में ऐसा ही जोश-ओ-खरोश दिखनी चाहिये।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार की नीतियों को लेकर राहुल गांधी का सदाबहार स्टैंड एक जैसा ही होता है लेकिन शशि थरूर की प्रतिक्रि या मौके के हिसाब से अलग अलग होती है। हाल ही में संसद में तमिलनाडु के दो सांसदों के अंग्रेजी में पूछे गये सवाल का हिंदी में जवाब देने पर शशि थरूर नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर बिफर उठे थे, तब भी जबकि संसद सदस्य ने सवाल अपनी भाषा में भी नहीं पूछा था।

अगर सवाल तमिल में पूछा गया होता तो भी ऐतराज के पीछे कम से कम एक तर्क तो नजर आता ही। असल में तब राहुल गांधी ने तमिलनाडु का मुद्दा उठाया था और पूरी राजनीति तब समझ में आयी जब एमके स्टालिन ने राहुल गांधी के प्रति आभार प्रकट कर दिया।कांग्रेस सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी से भी मिला था और यूक्र ेन में फंसे भारतीय छात्रों को निकालने के लिए सरकार की तरफ से कोशिशें तेज करने का आग्रह किया। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल में पंजाब के ही सांसद मनीष तिवारी, रवनीत बिट्टू, गुरजीत औजला, अमर सिंह और जसबीर गिल शामिल थे।

लेकिन उसके बाद मनीष तिवारी ट्विटर पर काफी आक्रामक नजर आये। मनीष तिवारी भी जी-23 ग्रुप के सदस्य हैं और यूक्रेन के मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी सहित अन्य कांग्रेस नेताओं को कठघरे में खड़ा कर रहे थे और बेहद आक्रामक अंदाज में ट्विटर पर लिखा हैं, ‘मुझे हैरानी है कि पंजाब कांग्रेस के नेता उस वक्त न दिखाई दे रहे है, न कुछ बोल रहे हैं जब हमारे हजारों बच्चे खतरे में हैं। क्या सिर्फ पंजाब के सांसदों को ही कोशिश करनी होगी?‘ मु?यमंत्री चन्नी के साथ साथ पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, सुनील जाखड़ और पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी को टैग करते हुए मनीष तिवारी ने पूछा है कि सब के सब कहां हैं? (युवराज)

अशोक भाटिया


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