Sunday, July 21, 2024
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32 दिनों तक बंद रहेगी शहनाइयों की गूंज

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  • बैंड-बाजा और बरात पर लगा विराम
  • देवगुरु बृहस्पति के अस्त होने से अब 26 मार्च तक शादियों और मांगलिक कार्यों के लिए नहीं रहेंगे शुभ मुहूर्त

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मकर संक्रांति से मांगलिक कार्य की शुरुआत होने के बाद अब कुछ समय के लिए इन पर रोक लगने वाली है। अब फरवरी में विवाह के लिए 18 से 20 फरवरी का शुभ मुहूर्त भी पूर्ण हो गया है। इसके बाद करीब डेढ़ महीने के लिए शादी, गृह प्रवेश, मुंडन सहित अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।

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23 फरवरी से बृहस्पति ग्रह अस्त हो जाएंगे। देवगुरु बृहस्पति को मांगलिक कार्यों का कारक माना जाता है। शुभ काम को संपन्न कराने के लिए गुरु का उदय होना आवश्यक है। अब 15 अप्रैल के बाद ही शुभ मांगलिक कार्यों शादी, गृह प्रवेश, मुंडन सहित अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी।

सूर्य के राशि परिवर्तन से अस्त होंगे देवगुरु बृहस्पति

13 फरवरी रविवार को सुबह सूर्य ने देव कुंभ राशि में प्रवेश किया था। इस राशि में देवगुरु बृहस्पति पहले से ही मौजूद है। सूर्य के राशि बदलने के बाद 10वें दिन यानी 23 फरवरी को बृहस्पति अस्त हो गए जोकि अब अगले महीने 27 मार्च को उदय होगे। ज्योतिषीशास्त्र के अनुसार सूर्य के दोनों और लगभग 11 डिग्री पर गुरु होता है तो अस्त माना जाता है।

चूंकि देवगुरु बृहस्पति धर्म और मांगलिक कार्यों का कारक ग्रह है। इसलिए गुरु ग्रह के अस्त होने पर शुभ मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस बार 23 फरवरी से 26 मार्च तक गुरु अस्त रहेगा। इसलिए तकरीबन इन 32 दिनों तक विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं होंगे।

चार मार्च को फुलेरा दूज अबूझ मुहूर्त

चार मार्च को फुलेरा दूज होने की वजह से उस दिन कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं। इससे अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस दिन कोई भी मांगलिक कार्य कर सकते हैं। फिर होलाष्टक लग जाएगा। उसके बाद सूर्य देव के मीन मलमास शुरू हो जाएंगे। इस कारण 15 अप्रैल तक शुभ मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी।

अप्रैल 2022 में विवाह मुहूर्त

  • 15, 17, 19, 20, 21, 24 एवं 25 अप्रैल को शादी का मुहूर्त है।
  • मई 2022 में विवाह मुहूर्त
  • 3, 4, 10, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 26, 27 मई को विवाह का मुहूर्त है।

सूर्य और देव गुरुबृहस्पति एक ही राशि में होना

भारतीय ज्योतिष विज्ञान परिषद के आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि वैदिक ज्योतिष में गुरु को शुभ कामों का प्रतिनिधि ग्रह माना गया है। सूर्य जब गुरु की राशि धनु और मीन में प्रवेश करता है तो इससे गुरु निस्तेज हो जाते हैं और उनका प्रभाव समाप्त हो जाता है। शुभ कामों के लिए गुरु का पूरी तरह बलशाली अवस्था में होना जरूरी है।

बृहस्पति को शास्त्रों में शुभ कार्यों का प्रतीक माना गया है। ऐसे में उनके अस्त होते ही शुभ कार्यों पर रोक लग जाएगी। इसलिए एक इस दौरान शुभ काम करने की मनाही होती है। खासतौर से विवाह तो बिल्कुल नहीं किए जाते हैं क्योंकि शादी के लिए सूर्य और गुरु दोनों ग्रहों की स्थिति मजबूत होनी चाहिए।

मीन और धनु राशि के स्वामी है देव गुरु बृहस्पति

देवगुरु को धनु और मीन राशि का स्वामी ग्रह माना जाता है। जब बृहस्पति अस्त होंगे तब इन राशियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। ऐसे में इन राशियों को गुरु से संबंधित उपाय करने चाहिए। हर गुरुवार को व्रत रखें। चने की दाल, गुड़ आटे की लोई गाय को खिलाएं।

देव गुरु बृहस्पति के लिए उपाय

गुरु की कमजोर स्थिति से जातक को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। गुरु धनु और मीन राशि के स्वामी ग्रह हैं। ये कर्क राशि में उच्च और शनि की राशि मकर में नीच स्थिति में होता है। हर गुरुवार भगवान विष्णु को घी का दीपक लगाएं। गुरुवार का व्रत रखें और इस दिन पीली चीजों का दान करने से बृहस्पति का अशुभ असर खत्म होगा।

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