Friday, February 20, 2026
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खंडहर से जर्जर बिल्डिंग में शिफ्ट विद्यालय

  • न छात्र और न ही शिक्षकों का अता-पता
  • सरायलालदास कन्या विद्यालय की बिल्ंिडग 2018 में हुई थी धराशायी
  • स्कूल को ठठेरवाड़ा में किया गया था शिफ्ट
  • ठठेरवाड़ा विद्यालय की बिल्ंिडग पहले से ही है जर्जर
  • ऐसे में एक साथ दो विद्यालयों को जर्जर बिल्ंिडग में चलाया जा रहा

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: इसे शिक्षा विभाग की लाचारी कहें या लापरवाही, जिस विद्यालय की बिल्ंिडग धराशायी हो गई। उसमें पढ़ने वाले छात्रों को ऐसे विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया। जहां पहले से ही बिल्ंिडग जर्जर हालत में है। वहीं पिछले चार सालों से इन दोनों विद्यालयों में छात्रो की संख्या काफी कम हो गई है। वहीं, दूसरी ओर दोनो विद्यालयों में एक-एक शिक्षा मित्रों की नियुक्ति है। जबकि एक शिक्षक को अस्थाई रूप से दोनो विद्यालयो का इंचार्ज बनाया गया है।

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शहर के बीचों बीच स्थित प्राथमिक कन्या विद्यालय सरायलाल दास की बिल्ंिडग की छत 2018 में गिर गई थी। गनीमत यह रही थी कि इस हादसे में किसी भी छात्रा को चोट नहीं आई थी। इसके बाद विद्यालय की सभी कक्षाओं को प्राथमिक विद्यालय ठठेरवाड़ा में शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन जिस विद्यालय में सरायलालदास को मर्ज किया गया था। उसकी खुद की बिल्ंिडग जर्जर हालत में है। यहां पर केवल तीन कमरे हैं। जिनमें 10 कक्षाओं को चलाया जा रहा है।
जर्जर बिल्ंिडग में चल रहीं 10 कक्षाएं

प्राथमिक विद्यालय ठठेरवाड़ा की बिल्ंिडग में केवल तीन कमरे है। न यहां पानी की व्यवस्था है, नहीं शौचालय की। बिल्ंिडग के कमरों की छत से हर समय मलबा गिरता रहता है। यहां तक की बिजली का कनेक्शन भी विद्यालय में नहीं है। ऐसे में दो विद्यालयों की 10 कक्षाओं को किस तरह चलाया जा रहा है। यह बड़ा सवाल है।

गंदगी का अंबार

बरसात के मौसम में संचारी व गंदगी से फैलने वाली बीमारियों की बाढ़ आ जाती है। ऐसे में इस विद्यालय में लगा गंदगी का अंबार छात्रों को शिक्षा के बदले बीमारी परोसने का जरिया बना हुआ है। दोनों विद्यालयों के छात्रों की संख्या बेहद कम हो गई है।

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सरायलालदास विद्यालय की कक्षा एक से पांच तक में कुल छह छात्राएं पंजीकृत है जबकि ठठेरवाड़ा प्राथमिक विद्यालय में केवल पांच छात्र है। इनको पढ़ाने के लिए दो शिक्षामित्रों की नियुक्ति है, लेकिन बिना बिल्ंिडग के कैसे पढ़ाई होती होगी यह बड़ा सवाल है।

कम हो गई छात्रों की संख्या

एक तरफ तो सरकार सरकारी विद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ने का दावा कर रही है, जबकि इसके विपरीत इस विद्यालय में छात्रों की संख्या में भारी कमी है। जितने छात्र पहले थे अब उनमें से नाममात्र के लिए ही छात्र रह गए है। अब विभाग भी इन विद्यालयों में कैसे छात्रों को आने के लिए कार्यक्रम चलाएं यह भी बड़ा सवाल है। बिल्ंिडग नहीं होने के कारण अभिभावकों ने अपने बच्चों के नाम कटा लिए है। जबतक बिल्ंिडग नहीं होगी छात्रों को दाखिला कैसे दिया जा सकता है।

दोनों विद्यालयों के इंचार्ज ने विद्यालयों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। जल्दी ही इन्हें दूसरी जगह स्थानांत्रित कर दिया जाएगा। विद्यालयों में केवल दो शिक्षा मित्रों की तैनाती है, इसकी वजह यह है कि पिछले 10 सालों से नगरीय क्षेत्र में नए शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। जबकि सेवानिवृत होने वाले शिक्षको की संख्या अधिक है। ऐसे में शिक्षकों की कमी को किस तरह पूरा किया जाए।
-सतेन्द्र पाल सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र मेरठ।

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