- अनिल चौधरी के सोफीपुर हिंदू श्मशान के समीप बना अवैध कॉम्प्लेक्स फाइलों में है सील
- जोनल अधिकारी ने मेडा के जोन-बी-2 के जेई से तलब की सील तोड़कर दुकानें बेचे जाने के मामले पर रिपोर्ट
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर के सोफीपुर हिंदू श्मशान घाट स्थित एक विवादित भूमि में बनाए गए अवैध सील मार्केट में दुकानें बेची जा रही है। इस मामले में मेडा प्रशासन भूमाफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। दरअसल, बिल्डर से भूमाफिया बने दौराला के अनिल चौधरी ने इस विवादित भूमि पर 100 दुकानें बना डाली हैं। विवादित कृषि भूमि पर जब अवैध मार्केट मामला मेरठ विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष के संज्ञान में आया तो उन्होंने जोनल अधिकारी से रिपोर्ट तलब कर ली।
रिपोर्ट तलब कर लिए जाने के बादी मार्केट को सील कर दिया गया। मेडा वीसी की विवादित भूमि पर बनाए गए अवैध मार्केट को सील करने की कार्रवाई को अनिल चौधरी के लिए झटके के तौर पर देखा गया। इतना ही नहीं इसका साइड इफेक्ट यह हुआ कि तब आसपास जितने भी अवैध निर्माण चले थे। जिनमें अनिल चौधरी का प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से हिस्सा माना जा रहा था। कुछ समय के लिए वहां काम भी तब बंद कर दिया गया था। डेढ़ साल पहले विवादित भूमि बनी इन दुकानों सील कर दिया गया था।
लावड़ रोड सोफीपुर के हिंदू श्मशान घाट से सटी विवादित कृषि भूमि पर मार्केट बनाने के मामले में जितना कसूरवार अनिल चौधरी है। उससे ज्यादा कसूरवार मेडा के वो अधिकारी हैं। जिनकी जिम्मेदारी प्राधिकरण के जोन बी-2 में अवैध निर्माणों को रोकने की थी। इस अवैध मार्केट से इतनी बात तो साफ हो गयी कि इस जोन के मेडा अधिकारियों ने अपनी ड्यूटी के प्रति निष्ठा दिखाने के बजाए भूमाफिया अनिल चौधरी के प्रति निष्ठा दिखाई।
खेतों में दुकानों का निर्माण कोई रातों रात नहीं हो गया। अवैध मार्केट बनाने में कई माह लगे। रात के अंधेरे में नहीं बल्कि दिन में उजाले में यह सब किया गया। विवादित कृषि भूमि पर केवल अवैध मार्केट बनाने का ही गुनाह नहीं किया गया है, बल्कि वहां मार्केट का काम शुरू होने से पहले महीनों चली खेतों की भराई के लिए जो मिट्टी दिन रात भारी वाहनों से मंगाई गयी वो भी अवैध खनन था।
इसलिए ही कहा जा रहा है कि भूमाफिया के हाथों केवल मेडा के तत्कालीन अधिकारी ही नहीं बल्कि अवैध खनन रोकने का जिनका काम है वो अफसर भी बिक गए। एक दो या दस बीस ट्रक मिट्टी की भराई नहीं की गयी है बल्कि दिन रात की गयी भराई में सैकड़ों चक्कर मिट्टी से लदे वाहनों ने लगाए तब जाकर भराई की गयी। उसके बाद यहां अवैध मार्केट का काम शुरू हुआ। अवैध खनन रोकने वालों ने कोई कार्रवाई यहां भराई करने वालों पर की गयी ऐसी कोई जानकारी तो नही मिलती।
विवादित भूमि का नहीं बदला जा सकता भू-उपयोग
कृषि भूमि के व्यवसायिक प्रयोग के लिए जरूरी है कि पहले उसका भू-उपयोग बदला जाए, लेकिन अवैध मार्केट बनाने वाला भूमाफिया प्रशासन पर भारी पड़ गया। उसने इस जमीन का भू-उपयोग बदले बगैर ही वहां अवैध मार्केट बना डाला। सोफीपुर स्थिति यह भूमि विवादित है, इसलिए इसका भू-उपयोग तब तक नहीं बदला जा सकता जब तक जमीन के विवाद से जुडेÞ सभी पक्ष सहमत ना हो। जमीन विवादित है, उसका भू-उपयोग बदला नहीं गया है, जो अवैध निर्माण सील किया गया है, उसकी सील खोलकर वहां रंगाई पुताई कर दी गयी और अब इन दुकानों को बेचने का सिलसिला जारी है।
न खरीदें अवैध मार्केट की दुकानें
मेडा प्रशासन ने आग्रह किया है कि सोफीपुर के अवैध मार्केट में कोई भी दुकान न खरीदी जाए। इसको कंपाउंड नहीं किया जाएगा। इसमें केवल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी इसके बेहतर है कि लोग जीवन भर के पसीने की कमाई यहां दुकानें खरीदने में ना झोकें। केवल मेडा से स्वीकृत मार्केट में ही दुकानें क्रय की जाएं। सोफीपुर का अनिल चौधरी का यह मार्केट हर दशा में जमीदोज किया जाएगा।
जेई से तलब की रिपोर्ट
सोफीपुर के अवैध सील मार्केट को लेकर जब जोनल अधिकारी अर्पित यादव से जानकारी मांगी गयी तो उन्होंने तत्काल जोन के जेई को तलब कर लिया। उन्होंने फाइलों में सील इस मार्केट की दुकानें बेचे जाने के मामले को लेकर रिपोर्ट तलब कर ली। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में जब जनवाणी संवाददाता ने अवैध मार्केट को लेकर मेडा वीसी से जानकारी ली की थी तो उन्होंने दो टूक बताया कि इसको कंपाउंड नहीं किया जा सकता। यह अवैध मार्केट खामियां का अंबार है।

