- अमृत पीवो सदा चिर जीवो हर सिमरत अनंद अनंता… शबद गायन से वातावरण गुरुमय हुआ
- कवियों ने अपनी रचनाओं से संगत को गुरु इतिहास से रूबरू किया
जनवाणी संवाददाता |
नजीबाबाद: गुरुनानक की ज्योत के दसवें अवतार श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब का प्रकाशोत्सव अपार श्रद्धा के साथ मनाया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब की अमृतमयी वाणी और सुप्रसिद्ध कवियों द्वारा गुरु इतिहास को प्रदर्शित करतीं कविताओं को सुनकर श्रद्धालु निहाल हुए।
बुधवार को प्रात:गुरुद्वारा नानकशाही श्री गुरु सिंह सभा में मुख्य ग्रंथी ज्ञानी उपकार सिंह की देखरेख में अखंड पाठ के समापन उपरांत विशेष दीवान सजाए गए। इस दौरान ज्ञानी उपकार सिंह ने गुरु इतिहास व उनके आदर्शो की चर्चा की। ज्ञानी उपकार सिंह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह साहिब ने जुल्म और अत्याचार के खात्मे के लिए खालसा पंथ स्थापित किया था।
उन्होंने सभी धर्मों को समानता का दर्जा दिया। श्री गुरु ग्रंथ को जुगो जुग अटल गुरु का दर्जा दिया जाना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में विभिन्न धर्मों और वर्गों के पीर-पैगंबरों, साधु-संतों की वाणी दर्ज है।

उन्होंने कहा कि शुभ कार्यों को करने के लिए इंसान को कभी भी डरना नहीं चाहिए। वहीं इस दौरान अमृतसर से आए हुजूरी रागी जत्थे भाई चरन जीत सिंह व नवदीप सिंह ने गुरुबाणी गायन किया। तहि प्रकाश हमारा भयो पटना शहर बिखे भव लयो…, राजन तुम हो सब राजन के राजा…, अमृत पीवो सदा चिर जीवो हर सिमरत अनंद अनंता… शबद गायन से वातावरण गुरुमय हो गया। कवि दरबार में जालंधर से आए इंजी. करमजीत सिंह नूर, लुधियाना से आए डा.हरि सिंह जाचक, कुरूक्षेत्र से आए गुरशरण सिंह परवाना,जगाधरी से आए जसविन्द्र सिंह व गदरपुर से आई सरबजीत कौर ने कविताएं प्रस्तुत कर संगत को गुरु इतिहास से रूबरू किया।
अनंद साहिब के पाठ, अरदास एवं हुकुमनामे के साथ दीवान के समापन पर प्रसाद एवं लंगर वरताया गया। गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान नरेन्द्र सिंह, सचिव हरेन्द्र सिंह सिंह की देखरेख में दीवान की समाप्ति पर विभिन्न सेवाओं के लिए श्रद्धालुओं को सरोपा भेंट किया गया।
कार्यक्रम में नरेन्द्र सिंह,हरेन्द्र सिंह, कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र पाल सिंह, सरदार बलवीर सिंह, जितेन्द्र सिंह कक्कड़, मनमोहन सिंह, अमर जीत सिंह, जसपाल सिंह, रक्षपाल सिंह, कमल जोत सिंह, हरभजन सिंह, गुरमीत सिंह, परविन्द्र सिंह, अमरीक सिंह, सरदार चंचल सिंह तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे।

