Sunday, March 15, 2026
- Advertisement -

Greater Noida Accident: सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत मामले में SIT की जांच तेज, 125 से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज

जनवाणी ब्यूरो |

यूपी: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में पानी से भरे गड्ढे में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच तेज हो गई है। शुक्रवार को SIT ने देर रात तक एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण से जुड़े 125 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। इससे पहले SIT ने संबंधित विभागों से लिखित जवाब मांगे थे। अब इन जवाबों और दर्ज बयानों के आधार पर निष्कर्ष निकालते हुए SIT अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी।

SIT के सामने लड़खड़ाए कई जिम्मेदार

सूत्रों के मुताबिक, बयान दर्ज कराने पहुंचे कई जिम्मेदार अधिकारी SIT के सवालों के सामने असहज नजर आए। कुछ अधिकारियों की जुबान लड़खड़ाती दिखी तो कई पसीने से तरबतर रहे। बयान दर्ज करने के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा।

एडीजी भानु भास्कर कर रहे हैं SIT की अगुवाई

शुक्रवार दोपहर करीब पौने दो बजे SIT नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-6 स्थित कार्यालय पहुंची। SIT की अगुवाई एडीजी जोन मेरठ भानु भास्कर कर रहे हैं। उनके साथ

मंडलायुक्त मेरठ भानु चंद्र गोस्वामी

लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अजय वर्मा भी जांच दल में शामिल हैं। इस दौरान पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह, जिलाधिकारी मेधा रूपम और नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ कृष्णा करुणेश मौके पर मौजूद रहे।

SDRF, NDRF और पुलिस टीम से अलग-अलग पूछताछ

हादसे के समय मौके पर पहुंची एसडीआरएफ और अग्निश्मन विभाग की टीम में शामिल एक-एक जवान के बयान SIT के तीनों अधिकारियों ने अलग-अलग दर्ज किए। इसके अलावा एनडीआरएफ से आए जवानों से भी पूछताछ की गई।

पुलिस विभाग से

चौकी प्रभारी

नॉलेज पार्क थाना प्रभारी

एसीपी, डीसीपी

डायल-112 पर कॉल मिलने के बाद पहुंची पीआरवी के जवान

सभी को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया। सभी बयान नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड रूम में दर्ज किए गए।

बचाव कार्य में देरी पर कड़े सवाल

SIT ने सभी विभागों से यह जानने की कोशिश की कि घटना की सूचना उन्हें कब मिली

सूचना मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई मौके पर पहुंचने के बावजूद युवराज की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी एसडीआरएफ और फायर विभाग से विशेष रूप से पूछा गया कि बचाव के लिए कौन-कौन से उपाय किए गए और उनमें कहां चूक हुई।

जांच के दौरान अफरातफरी, गेट बंद

बयान दर्ज होने के दौरान नोएडा प्राधिकरण में अफरातफरी का माहौल रहा। सुरक्षा कारणों से सभी गेट बंद कर दिए गए थे। केवल जांच अधिकारी, प्रशासनिक अफसर और बयान दर्ज कराने वालों को ही प्रवेश दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, जिलाधिकारी मेधा रूपम ने आनन-फानन में अपने स्टेनो से संशोधित रिपोर्ट मंगवाई, जबकि पुलिस प्रशासन ने भी मौके पर ही अपनी रिपोर्ट में संशोधन कराया। इसके लिए सिटी मजिस्ट्रेट को भी बुलाया गया।

इन अधिकारियों-कर्मचारियों के भी दर्ज हुए बयान

SIT ने प्राधिकरण के कई अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की, जिनमें शामिल हैं—

ट्रैफिक सेल से बर्खास्त जेई नवीन कुमार

वरिष्ठ प्रबंधक विश्वास त्यागी

वर्क सर्किल-10 के प्रबंधक अरविंद

वरिष्ठ प्रबंधक प्रवीण सलोनिया
सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी।

बयानों और लिखित जवाबों में मिला विरोधाभास

सूत्रों का दावा है कि विभागों द्वारा पहले दिए गए लिखित जवाबों और शुक्रवार को दर्ज बयानों में कई स्तर पर विरोधाभास सामने आया है। जहां लिखित जवाब वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तैयार कराए गए थे, वहीं बयान निचले स्तर के कर्मचारियों तक के दर्ज हुए। SIT ने इन विरोधाभासों को गंभीरता से नोट किया है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Crude Oil: पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल की कीमतों में 41% उछाल, वैश्विक बाजार में बढ़ा दबाव

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल...

BCCI Awards: शुभमन गिल और स्मृति मंधाना चमके, BCCI नमन अवॉर्ड 2026 में जीते बड़े पुरस्कार

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI)...

Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी रद्द, गृह मंत्रालय ने दी स्वतंत्रता की जानकारी

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जलवायु...
spot_imgspot_img