Saturday, March 14, 2026
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छह साल पहले पीओके में ऐसे कुचला गया था आतंक का सिर

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने आज से छह साल पहले पीओके में घुसकर पाकिस्तान परस्त 50 आतंकियों का सफाया कर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। यह जम्मू कश्मीर के उरी में सेना के शिविर पर किए गए हमले में शहीद 19 जवानों की मौत का बदला था। यह ऐसा बदला था, जिससे आज तक दुश्मनों के दांत खट्टे हैं। बुधवार को देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किए गए सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान की भी सर्जिकल स्ट्राइक की व्यूह रचना में अहम भूमिका थी।

दरअसल, 18 सितंबर 2016 को उरी में आतंकियों ने हमला किया था। इसमें 19 जवान शहीद हो गए थे। इसे लेकर पूरे देश में आतंकियों व उसके आका पाकिस्तान के खिलाफ जबर्दस्त रोष था। भारत सरकार भी हैरान होने के साथ ही बदले की आग में झुलस रही थी। आखिरकार सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पीओके में घुसकर आतंकियों का घर में सफाया कर डाला। इन दहशतगर्दों को ऐसा सबक सिखाया कि उनके डेरे कब्रगाह में बदल गए।

सर्जिकल स्ट्राइक को 28-29 सितंबर 2016 की रात पीएम नरेंद्र मोदी, तत्कालीन रक्षामंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर, तत्कालीन सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग, तत्कालीन डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह और उत्तरी कमान के तत्कालीन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल दीपेंद्र सिंह हुड्डा और एनएसए अजीत डोभाल की सुगठित रणनीति के तहत अंजाम दिया गया था।

उरी में 19 जवान हुए थे शहीद, 50 से लिया था बदला

उरी में चार आतंकियों ने सेना के क्षेत्रीय मुख्यालय पर हमला किया था। इस हमले में 19 जवान शहीद और 30 जवान घायल हुए थे। जवाबी कार्रवाई में चारों आतंकी मारे गए थे। इसके मात्र 10 दिन में भारत ने भी पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी और वहां चल रहे आतंकियों के अड्डों को तबाह कर दिया था। उरी हमले के बाद 28-29 सितंबर 2016 की रात में 125 कमांडो ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। भारत की इस कार्रवाई ने दुनिया को दिखा दिया था कि वह अपने दुश्मनों को घर में घुसकर मारने की हिम्मत रखता है।

सिर्फ सात लोगों को थी सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी

सर्जिकल स्ट्राइक का ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि इसकी जानकारी सिर्फ सात लोगों को थी। पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल ऑपरेशन के लिए कमांडो को मात्र दो घंटे का समय दिया गया था। आसमान में करीब 35 हजार फुट की ऊंचाई से भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर इस ऑपरेशन की निगरानी कर थे। 125 कमांडो डोगरा और बिहार रेजिमेंट के थे। दोनों रेजिमेंट से तैयार विशेष संयुक्त पैरा कमांडो ने तड़के इस कार्रवाई को अंजाम दिया। कमांडो पैदल मार्ग से ही पीओके में घुसे।

सोया रह गया आतंक का आका

सर्जिकल स्ट्राइक की पाकिस्तानी सेना को जरा भी भनक नहीं लग पाई और उसकी सेना व हुक्मरान सोए रह गए। उन्हें पता तब चला जब भारत के जांबाज स्पेशल सैनिक आतंकियों का काम तमाम कर घर लौट आए थे। जैसे ही पाकिस्तान को इसकी भनक लगी उसने अपने लड़ाकू विमान सीमा पर भेजे, लेकिन वो खाली हाथ रहे।

हालांकि, भारत ने इस अभियान को अंजाम देने के दौरान पाकिस्तान की किसी भी चुनौती से निपटने के भी पूरे इंतजाम कर रखे थे। यदि उसने उस दौरान कोई गुस्ताखी की होती तो ऐसा सबक मिलता कि वह कभी इस ओर देख नहीं पाता। सफल सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देश ने सेना के जांबाज को सलाम किया और देश का मान बढ़ने पर सभी ने गौरव अनुभव किया।

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