- जयकरण, बीनू के शव रखकर बागपत रोड पर घंटों लगा जाम
- जाम में फंसे रहे सैकड़ों वाहन, ग्रामीणों से पुलिस की झड़प, कार्रवाई, मुआवजे की मांग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: परतापुर के गांव सोरखा में जिस घर में शहनाइयों की तैयारी थी, शादी के मंगल गीतों की मधुर आवाजें आनी थीं, उस घर से कलेजा चीर देने वाली सिसकियां सुनाई दे रही हैं। तीन दिन बाद जिस घर से बेटी चांदनी की डोली उठनी है, उस घर में पिता की अर्थी उठने की तैयारी चल रही है। पूरा सोरखा गमगीन है। गम भी ऐसा कि बातचीत में लोगों की आंखें नम हो जा रही हैं। कलेजा मुंह को आता है।
कुछ समझ नहीं आ रहा है कि ऐसा कैसे हो गया। भले ही माली हालत अच्छी नहीं थी लेकिन जयकरण अपने बेटी की शादी को लेकर बहुत खुश था। चार दिसंबर को बरात आनी थी, जिस बेटी को हंसते-हंसते उसे विदा करना था उसको विदा अब कौन करेगा क्योंकि बेटी की डोली उठने से पहले तो पिता की अर्थी उठ गयी। सोरखा के जय करण और उसके साथी बीनू की गुरूवार को जानी थाना के बागपत रोड पर एक डंपर से कुचले जाने के कारण मौत हो गयी।
सिस्टम के रवैये को लेकर भारी आक्रोश
जयकरण और बीनू के शव रखकर प्रदर्शन करने वाले ग्रामीणों की नाराजगी का बड़ा कारण सिस्टम का रवैया था। नाराजगी की पहली वजह चौबीस घंटे बाद भी उस डंपर व चालक का सुराग न लगाया जाना जिसने बाइक में टक्कर मारकर जयकरण और बीनू को कुचल कर मार दिया। दरअसल सड़क दुर्घटना के बाद चालक डंपर समेत फरार हो गया था। पुलिस उसका पता नहीं लगा सकी। उल्लेखनीय है कि जयकरण व बीनू शादी का कार्ड बांटकर लौट रहे थे। तभी सड़क दुर्घटना हुआ।
तीन दिन बाद आनी है बरात
जयकरण अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था। चार दिसंबर को उसकी बेटी की बरात आनी है। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पूरे गांव की जुवां पर एक ही सवाल है कि अब क्या होगा। कौन करेगा कन्या दान। कैसे विदा की जाएगी। बेटी। बरात आने में कुल तीन दिन का वक्त है, जयकरण के बगैर यह सब कैसे होगा, कौन करेगा। कुछ समझ में नहीं आ रहा है। जहां तक परिवार वालों की बात है कि जयकरण की मौत के बाद वो तो बदहवास हैं। उनकी हालात को अलफाजों में बयां नहीं किया जा सकता।

पत्नी ऊषा विलाप और बेटी चांदनी रोते-रोते कई बार बेहोश हो गई। बस यही बोलती रही, पापा तुम्हारे बिना शादी कैसे होगी। लोगों का कहना था कि हादसे के शिकार दोनों पर परिवारों की सारी जिम्मेदारी थी, अब कैसे गुजर बसर होगी। वहीं दूसरी ओर सोरखा के बीनू चौधरी जिनकी इस सड़क दुर्घटना में जयकरण के साथ मौत हो गयी है उनके एक बेटा और एक बेटी है। बड़ा बेटा आठ साल का है। बीनू का एक भाई और एक बहन है। बीनू पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी।
शव रखकर किया प्रदर्शन
जयकरण और बीनू दोनों के शव का शुक्रवार को मेडिकल में पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन हादसे से गुस्साए परिवारजन व गांव वाले दोनों के शव उनके घर परतापुर के गांव सोरखा ले जाने के जानी थाना के बागपत रोड पर सड़क दुर्घटना वाले स्थान पर लेकर पहुंच गए। सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया।
करीब शाम पांच बजे लगाए गए जाम के कारण इस नेशनल हाइवे पर सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गयीं। जाम में फंसे वाहनों की लंबी कतारों के चलते बाद में पुलिस ने रास्ता डायवर्ट कर दिया। दूसरे रास्तों से वाहनों को निकाला गया, लेकिन जो जाम पांच बजे के आसपास फंस गए थे, वो फंसे के फंसे रह गए। उनको निकाल नहीं जा सका।
तीन घंटे लगा रहा जाम, मुआवजे के आश्वासन के बाद ही खुला
सड़क हादसे में मारे गए जयकरण व बीनू चौधरी के शव रखकर करीब तीन घंटे तक गांव वालों ने जानी थाना क्षेत्र के बागपत रोड पर जाम लगाए रखा। जाम की सूचना पर तत्काल सीओ संजय जायसवाल, नायब तहसीलदार प्रमोद कुमार व कानूनगो भी मौके पर पहुंच गये। जाम की वजह से पूरे चारों ओर सड़क जाम होने की वजह से इंस्पेक्टर जानी प्रांजल त्यागी के अलावा थाना टीपीनगर से इंस्पेक्टर क्राइम के अलावा इंस्पेक्टर परतापुर व रोहटा थाना से भी भारी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया था।
शाम करीब सात बजे के बाद जब अधिकारियों ने परिजनों से बात की तब कही जाकर बीच का रास्ता निकाला जा सका। परिजन दोनों शवों के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार ने किसान बीमा योजना के 30 हजार नकद तत्काल दे दिए। इसके अलावा मुख्य मंत्री दुर्घटना बीमा राशि से अधिक से अधिक मदद दिलाए जाने का भी आश्वासन दिया। तब कहीं जाकर जाम लगाने वालों ने जयकरण और बीनू चौधरी के शव सड़क से हटाए और उनका अंतिम संस्कार कराया।
जमकर हुआ हंगामा
इससे पहले दोनों शव सड़क पर रख कर जाम लगाए जाने के दौरान जमकर हंगामा हुआ। जाम की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस से ग्रामीणों की कहासुनी हुई। जाम के दौरान कुछ चालकों ने भीड़ से बचकर निकलने का प्रयास किया तो उनके साथ धक्का मुक्की की गयी। वहीं दूसरी ओर जाम के बाद पुलिस ने हाइवे पर मोर्चा संभाला था। बागपत रोड की ओर जाने वाला सारा ट्रैफिक दूसरे रास्तों से डायर्वट कर दिया था। शाम करीब आठ बजे जाकर रोड क्लीयर किया जा सका।

