Saturday, March 21, 2026
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प्यार में कभी कभी ऐसा हो जाता है

खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों, इस दुनिया से नही डरेंगे हम दोनों, जैसे गीत गाकर सड़कों पर प्यार का इजहार अब आसान नही रह गया है। सदियों से जमाना प्यार का दुश्मन रहा है। यदि प्यार का इजहार करना आसान होता, तो शीरी फरहाद, लैला मजनू, हीर रांझा, रोमियो जूलियट के किस्से प्रकाश में न आते। लोग अपनी जान हथेली पर रखकर प्यार का इजहार करने से न चूकते, भले ही उन्हें प्यार के इजहार की कीमत जान देकर चुकानी पड़ती। चाहे कितना भी जमाना बदले, मगर प्रेमियों के दुश्मनों की संख्या कम नहीं होती। कभी वेलेंटाइन दिवस पर प्यार का इजहार करने वालों पर प्यार के दुश्मन हमला करते हैं, कभी खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे का सड़कों पर घूमने वाले प्रेमी युगल की लट्ठ पूजा करके उनके प्रेम प्रदर्शन में विघ्न डालने से भी भी नहीं कतराते।

प्रेम मन का विषय है। न जाने कब किस से हो जाए। यदि मन की बात मन तक सीमित रहे, तब भी उचित नहीं है। अवसर देखकर प्रेम का प्रदर्शन किए जाने की परम्परा बरसों से निभाई जाती रही है। एक समय था, कि जब प्रेम की अभिव्यक्ति के पत्रों का सहारा लिया जाता था। अपने प्रिय के हाथों तक पत्र पहुंचाने के लिए गोपनीय योजनाएं बनार्इं जाती थीं। तिस पर भी यह गारंटी नहीं होती थी, कि क्रिया की प्रतिक्रिया किस रूप में होगी। प्रेम पत्र पुस्तक में छिपा कर रखा जाएगा या घर के स्वामी के सुपुर्द किया जाएगा। यदि एकांत में उसे बार बार पढ़कर सहेजा जाएगा तो उसका जवाब किस प्रकार उपलब्ध हो पाएगा। यदि घर के मुखिया के हाथ लग गया, उसकी प्रतिक्रिया में क्या होगा? क्या उसके प्रेमपत्र का राज उजागर करके प्रेमाभिव्यक्ति का मजाक उड़ाया जाएगा या विवाह का प्रस्ताव ही घर पहुंच जाएगा।

बहरहाल स्थिति तब तक संदेहास्पद बनी रहती थी, जब तक क्रिया की प्रतिक्रिया नहीं होती थी। अब युग बदल गया है। संचार क्रांति का युग है। बी प्रेक्टिकल की थ्योरी चल रही है। न लाज न शर्म सीधे प्रस्ताव। कभी आई लव यू, कभी आई लाइक यू। बदले में जवाब भी तुरंत मिल जाता है, मसलन आई लव यू टू, आई हेट यू, आई डिस्लाइक यू सरीखा। यह खुलापन भी बुरा नहीं है। कोई किसी गलतफहमी में नहीं रहता। लव यू टू या हेट यू से दूध का दूध और पानी का पानी। ऐसा नहीं, कि एक तरफा प्रेम कहानी बुनते हुए जिंदगी बर्बाद की जाए।

कभी-कभी प्रेम सनकीपन का शिकार भी बन जाता है। चाहे मन में प्रेम हो या न हो, मगर प्रेम प्रदर्शन करने के लिए उतर पड़ते हैं। वे जताते हैं, कि उनका प्रेम औरों से श्रेष्ठ है। इसलिए उन्हें खुलकर अपने प्रेम का प्रदर्शन करने का अधिकार है। बेचारे प्रेमी यह भूल जाते हैं, कि अति सर्वत्र वर्जयेत का सूत्र भी समाज में विद्यमान है। यह सूत्र क्रिया की प्रतिक्रिया अपने ही ढंग से देता है। वह प्रेम प्रदर्शकों की खबर इस प्रकार लेता है, कि बेचारे खुल्लम खुल्ला प्यार का इजहार करने की जगह उलटे पांव दौड़ने लगते हैं। ऐसे में बेचारे यह भी भूल जाते हैं कि वे घर से जूते चप्पल पहनकर भी आए थे या नहीं।

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