Tuesday, January 27, 2026
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Baghpat News: शारदीय नवरात्रि में विशेष संयोग, हाथी पर सवार होकर आएगी माता रानी

जनवाणी संवाददाता |

बागपत: शारदीय नवरात्रि की तैयारियां शुरू हो गई है। 22 सितंबर से नवरात्र का शुभारंभ होगा और एक अक्टूबर को नवमी का पर्व मनाया जाएगा। दो अक्टूबर को दशहरा पर्व मनेगा। नवरात्रि में इस बार कई खास संयोग भी बन रहे हैं। माता इस बार विशेष संयोग में हाथी पर सवार होकर आएंगी जबकि प्रस्थान मनुष्य की सवारी पर होगा। उधर, नवरात्रि के साथ ही बाजारों में रौनक भी बढ़ जाएगी। क्योंकि वर्तमान में श्राद चले हुए हैं और बाजार में बिक्री कम है। नवरात्र के पहले दिन से ही मंदिर भी जहां दुल्हन की तरह सजे नजर आएंगे वहीं बाजारों में खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ती दिखाई देगी।

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22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा। 21 सितंबर तक श्राद है। उसके बाद 22 सितंबर से नवरात्रि की शुरुआत होगी और एक अक्टूबर को नवमी का पर्व मनाया जाएगा। नवरात्रि को लेकर चहुंओर तैयारियां शुरू हो गई हैं। बाजारों में भी दुकानदारों ने सामान लाकर रख लिया है और नवरात्र से पहले दुकानें भी सजी मिलेंगी। इसके अलावा मंदिरों में भी विशेष सजावट की तैयारियां की जा रही हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से इसकी शुरुआत होती है।

शारदीय नवरात्रि में मन में उमंग और उल्लास की वृद्धि होती है। दुनिया में सारी शक्ति नारी या स्त्री स्वरूप के पास ही है। इसलिए नवरात्रि में देवी की उपासना ही की जाती है और देवी शक्ति का एक स्वरूप कहलाती है, इसलिए इसे शक्ति नवरात्रि भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि 22 सितंबर से नवरात्र का शुभारंभ होगा। 30 सितंबर को अष्टमी और एक अक्टूबर को नवमी का पर्व मनाया जाएगा। दो अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन घट की स्थापना की जाएगी। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त पहले दिन यानी 22 सितंबर को सुबह 6:10 बजे से 9 बजे तक है। जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से 12:36 बजे तक रहेगा। भगवती की स्थापना शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए। तभी पूजा पाठ, व्रत आदि का संपूर्ण फल प्राप्त होगा। कलश की स्थापना ईशान कोण में ही करें, क्योंकि यह घर का वह क्षेत्र है जहां देवताओं का वास होता है।

ईशान कोण में ही देशी घी का अखंड दीपक स्थापित करें एवं अग्नि कोण में भैरव के लिए तेल का दीपक स्थापित करें। ताकि नाकारात्मक ऊर्जा का विनाश हो। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार भी विशेष संयोग बन रहे हैं। इस बार माता रानी हाथी पर सवार होकर आएंगी। माता का हाथी पर सवार होकर आना अत्यंत शुभ रहेगा। अच्छी वर्षा, धन-धान्य में वृद्धि और दूध का उत्पादन उत्तम रहेगा। माता का प्रस्थान मनुष्य की सवार पर होगा। इसका फल भी उत्तम है। सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस बार दस दिनों तक माता के नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाएगी। क्योंकि तृतीय तिथि बढ़ रही है। विधि विधान से की गई पूजा अर्चना का फल अवश्य मिलता है। वैसे नवरात्र का हर क्षण शुभ मुहूर्त है।

इस तरह करें कलश स्थापना

ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि कलश स्थापना ईशान कोण में करें, पास में अखंड जोत जलाएं। कलश के बायीं ओर माता की चौकी की स्थापना करें, चौकी पर लाल वस्त्र विद्वाकर माता को स्थापित करें। पूजा में रोली, चावल, कलावा, दूध, दही, गंगाजल, घी, शक्कर, फूल-फल, मिष्ठान आदि रखें। माता को भोग में मिश्री, अनार का फल शुभ होता है। बताया कि व्रत में बार-बार खाना-पीना नहीं चाहिए। व्रत का तात्पर्य निराहार रहें और फिर क्षमता के अनुसार करें। पूजा-पाठ में दुर्गा सत्तशती का पाठ और बीज मंत्र का जाप शुभ कारक है।

इस तरह होंगे नवरात्र

22 सितंबर- मां शैलपुत्री

23 सितंबर- मां ब्रह्मचारिणी

24 सितंबर -मां चंद्रघंटा

25 सितंबर- मां चंद्रघंटा

26 सितंबर- मां कुष्मांडा

27 सितंबर- मां स्कंदमाता

28 सितंबर- मां कात्यायनी

29 सितंबर- मां कालरात्रि

30 सितंबर- मां महागौरी

1 अक्टूबर- महानवमी

2 अक्टूबर- दशहरा

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