Monday, March 23, 2026
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विश्व रक्तदान दिवस पर विशेष: अपने आप में इंसानियत का कार्यक्रम हैं संत कमल किशोर

  • अब तक 150 बार कर चुके हैं रक्तदान, सैकड़ों की बचाई है जान

जनवाणी संवाददाता |

सहारनपुर: अगर सांसों की डोर टूटने को हो तो कई बार खून की एक-एक बूंद संजीवनी का काम करती है। ऐसे में रक्तदान करने से बड़ा पुण्य और क्या हो सकता है। इस पुण्य को एशिया में अगर किसी ने सबसे ज्यादा कमाया है तो वह हैं संत कमल किशोर। सहारनपुर में दिल्ली रोड के निकट एक कालोनी में रहने वाले कमल किशोर अपने आप में इंसानियत का कार्यक्रम हैं। मानवता की जीती-जागती मिसाल हैं। भारतीय संस्कृति-परंपरा के संवाहक हैं। वह अपने आप में व्यक्ति नहीं, व्यक्त्वि हैं। दिलचस्प यह है कि शून्य फाउंडेशन के संस्थापक कमल किशोर ने अब तक 150 बार रक्तदान किया है। उन्हें “वर्ल्ड किंग्स” पुरस्कार भी मिल चुका है।

संत कमल किशोर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वह युवा अवस्था से ही सामाजिक कार्योंं में रुचि लेने लगे थे। उन्होंने अध्यात्म, सेवा-सुश्रूषा और परोपकार में अपना पूरा जीवन झोंक दिया। अगर रक्तदान की बात करें तो संत कमल किशोर ने अब तक 150 बार अपना खून देकर सैकड़ों लोगों का जीवन बचाया है। यह प्रेरणा कमल किशोर को उनके पिता से मिली थी। कमल किशोर बताते हैं कि उन्हें जो संस्कार माता-पिता से मिले, उसी की बदौलत उन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा में समर्पित कर दिया।

कमल किशोर कहते हैं कि युवा अवस्था में एक बार मेरठ के हस्तिनापुर में एक हादसे में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। वह मौके पर मौजूद थे। डाक्टर ने तुरंत रक्त चढ़ाने को कहा। कमल किशोर घायल के साथ अस्पताल में मौजूद थे। उन्होंने दो बोतल खून दिया। कमजोरी भी आ गई। लेकिन, घायल की जान बच जाने से बहुत आत्मसंतोष हुआ। कमल किशोर ने तब से लेकर अब तक 150 बार रक्तदान किया है और अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद उनकी आंखों को रोशनी आई बैंक को दान किया। उनका कहना है कि शरीर तो माटी है। मृत्यु के बाद इसका कोई मोल नहीं। इसलिए आंख को भी दान करना-करना पुण्य का काम है। रक्तदान के लिए कमल किशोर को वर्ल्ड किंग्स पुरस्कार दिया जा
चुका है।

यही नहीं ब्रावो इंटरनेशनल बुक आफ रिकार्ड में भी उनका नाम दर्ज है। कमल किशोर कहते हैं कि रक्त का कोई विकल्प आज तक विज्ञान नहीं खोज सका है। ऐसे में रक्तदान महादान है। कमल किशोर के सामाजिक कार्यों में रक्तदान के शिविर, आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर, अनाथ या निर्धन बच्चों की शिक्षा व्यवस्था, अनाथ कन्याओं का कन्यादान, निर्धन कन्याओं के विवाह सामग्री, शासन प्रशासन की सहायता लिए बिना शहर की सड़कों को जनसहयोग से गड्ढा मुक्त करना, पौधारोपण, कपड़े के थैले बांटकर पोलिथीन मुक्त भारत अभियान, रक्तदान, मरणोपरांत नेत्रदान एवं देहदान के लिए जनमानस को प्रेरित करना है।

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